ये वाराणसी का श्री शिव प्रसाद गुप्त मंडलीय अस्पताल है। यहां सिर्फ वाराणसी ही नहीं बल्कि आसपास के शहरों के मरीज इलाज के लिए आते हैं। यहां बर्न वार्ड के बाहर ही मां शीतला की छोटी सी मंदिर है। यहां 50 से 100 मुर्गे हमेशा मौजूद रहते हैं। यह मुर्गा उन लोगों ने रखे हैं जिनके मरीज बर्न वार्ड में भर्ती रहते हैं और ठीक होकर घर चले जाते हैं। मरीज के ठीक होने पर परिवार के लोग इस मंदिर पर मां शीतला को मुर्गा चढ़ाते हैं। यही कारण है कि यहां पर बड़ी संख्या में मुर्गा दिखते हैं। कुछ लोगों को लगता है कि मां शीतला को मुर्गा चढ़ाने से उनका मरीज जल्दी ठीक हो जाएगा। हालांकि डॉक्टर और अन्य स्टाफ ऐसा करने से मना करते हैं। इसके बावजूद लोग चोरी से मुर्गा चढ़ाकर वहीं छोड़कर चले जाते हैं। पश्चिम बंगाल से आई महिला ने की शुरूआत बताया जा रहा है कि कुछ साल पहले ही पश्चिम बंगाल की एक महिला परिवार के किसी सदस्य को लेकर इसी अस्पताल में भर्ती थी। बर्न वार्ड में कई दिनों तक इलाज चला, इसके बाद मरीज ठीक हो गया। महिला ने बर्न वार्ड के बाहर स्थित तक मां शीतला को मुर्गा चढ़ा दिया। बताया जाता है कि पश्चिम बंगाल की आदिवासी समुदाय की ज्यादातर महिलाएं मां शीतला को जीवित बकरा या मुर्गा चढ़ाती हैं। बस इसी के बाद से लगातार लोग इस तरह का कार्य यहां कर रहे हैं। अब भी लोग यहां मुर्गा चढ़ाते हैं। ‘यहां मुर्गा-मीट बनाना मना है’ यहां मंदिर के पास दीवारों पर दो जगह लिखकर सचेत करने का प्रयास किया गया है। लिखा गया है कि मंदिर के पास अंडा, मुर्गा, मीट व मछली बनाना मना है। मंदिर के बगल में ही स्थित है लांड्री। यहां पिछले 25 वर्षों से काम करने वाले मंशाराम बताते हैं, पहले यहां पर मंदिर नहीं हुआ करता था। नीम का पेड़ ही था। करीब 2 साल पहले मंदिर जब बनाया गया तो बड़ी संख्या में लोग यहां मुर्गा दान करने लगे हैं। बर्न वार्ड के एक जूनियर डॉक्टर ने बताया, काफी समय से ही यहां पर लोग मुर्गा चढ़ा देते है। जबकि इसके लिए सख्ती से मना किया गया है। लोग चढ़ाते हैं इसलिए हम भी करते हैं मुर्गा दान चोलापुर की रहने वाली संगीता देवी अपनी मां को लेकर बर्न वार्ड में एडमिट हैं। वह गंभीर स्थिति में हैं। संगीता बताती हैं, सब लोग यहां पर ठीक होने के बाद मुर्गा चढ़ाते हैं इसलिए हमारी मां यदि ठीक हो जाती हैं तो हम भी मुर्गा दान करेंगे घंटा और नारियल भी चढ़ाते हैं लोग राजेंद्र साहनी अपनी पत्नी को लेकर 34 महीने से बर्न वार्ड में भर्ती हैं। वह कहते हैं मां शीतला से हमने मनौती मांगी है यदि पत्नी ठीक हो जाए तो हम यहां पर नारियल, चुनरी और लड्डू चढ़ाएंगे। राजेंद्र बताते हैं, एक सप्ताह में तीन लोग ठीक होकर इस वार्ड से निकले तो तीनों ने मुर्गा चढ़ाया था। दिन रात मुर्गों के आवाज से हम लोगों को परेशानी होती है लेकिन इसके लिए आखिर शिकायत किससे करें। अस्पताल में आने वाले लोग इसे बंद कराने की मांग भी किए हुए हैं। वहीं, इस संबंध में अस्पताल के अधीक्षक डॉक्टर बृजेश कुमार कहते हैं कि कुछ लोग चोरी से आते हैं और मुर्गा छोड़कर चले जाते हैं जबकि वहां पर हमने जागरूकता के लिए लिखवा भी दिया है कि कोई भी यहां पर मुर्गा नहीं छोड़ेगा। अब इस पर और शक्ति की जा रही है।

