बिस्फी प्रखंड के सिमरी पंचायत स्थित बड़की पोखर के सलहेस गहबर परिसर में शुक्रवार को राजा सलहेस पूजनोत्सव संपन्न हुआ। इस आयोजन में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भाग लिया और अपनी आस्था प्रकट की। पूजा के दौरान पूरा क्षेत्र भक्तिमय जयकारों से गूंज उठा। पूजनोत्सव की शुरुआत गुरुवार को डीहवार पूजा और आमंत्रण कार्यक्रम के साथ हुई थी। शुक्रवार दिनभर मुख्य पूजा से पहले, भक्त किशोरी कामत, रामविलास पासवान, सतीश कुमार और राजेश पासवान ने सलहेस गहबर में पान, सुपारी, लड्डू, धूप और दीप अर्पित कर पूजनोत्सव का संकल्प लिया। इसके बाद विधिवत पूजा-अर्चना आरंभ हुई। इस अवसर पर स्थानीय गायकों ने राजा सलहेस की वीरता, पराक्रम और जनकल्याणकारी कार्यों पर आधारित भक्ति गीत प्रस्तुत किए। श्रद्धालुओं ने राजा सलहेस से परिवार, समाज और क्षेत्र की सुख-समृद्धि एवं कल्याण की कामना करते हुए सामूहिक प्रार्थना की। ग्रामीणों, जिनमें अभिजीत पासवान, गुड्डू पासवान, आनंद पासवान, राजकुमार पासवान और रामबले पासवान शामिल थे, ने बताया कि बड़की पोखर स्थित इस गहबर में पिछले तीन पीढ़ियों से लगातार पूजा-अर्चना की परंपरा चली आ रही है। यह आयोजन हर वर्ष ग्रामीणों के सहयोग से बड़े उत्साह के साथ किया जाता है, जिसकी तैयारी एक सप्ताह पहले से ही शुरू हो जाती है। ग्रामीणों के अनुसार, राजा सलहेस को शक्ति, शील और सौंदर्य का प्रतीक माना जाता है। लोकमान्यताओं के अनुसार, वे अपनी प्रजा की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहते थे और शत्रुओं से संघर्ष कर राज्य की सुरक्षा करते थे। यही कारण है कि विशेष रूप से दलित समुदाय में राजा सलहेस को एक प्रमुख लोकदेवता के रूप में पूजा जाता है। बिस्फी प्रखंड के सिमरी पंचायत स्थित बड़की पोखर के सलहेस गहबर परिसर में शुक्रवार को राजा सलहेस पूजनोत्सव संपन्न हुआ। इस आयोजन में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भाग लिया और अपनी आस्था प्रकट की। पूजा के दौरान पूरा क्षेत्र भक्तिमय जयकारों से गूंज उठा। पूजनोत्सव की शुरुआत गुरुवार को डीहवार पूजा और आमंत्रण कार्यक्रम के साथ हुई थी। शुक्रवार दिनभर मुख्य पूजा से पहले, भक्त किशोरी कामत, रामविलास पासवान, सतीश कुमार और राजेश पासवान ने सलहेस गहबर में पान, सुपारी, लड्डू, धूप और दीप अर्पित कर पूजनोत्सव का संकल्प लिया। इसके बाद विधिवत पूजा-अर्चना आरंभ हुई। इस अवसर पर स्थानीय गायकों ने राजा सलहेस की वीरता, पराक्रम और जनकल्याणकारी कार्यों पर आधारित भक्ति गीत प्रस्तुत किए। श्रद्धालुओं ने राजा सलहेस से परिवार, समाज और क्षेत्र की सुख-समृद्धि एवं कल्याण की कामना करते हुए सामूहिक प्रार्थना की। ग्रामीणों, जिनमें अभिजीत पासवान, गुड्डू पासवान, आनंद पासवान, राजकुमार पासवान और रामबले पासवान शामिल थे, ने बताया कि बड़की पोखर स्थित इस गहबर में पिछले तीन पीढ़ियों से लगातार पूजा-अर्चना की परंपरा चली आ रही है। यह आयोजन हर वर्ष ग्रामीणों के सहयोग से बड़े उत्साह के साथ किया जाता है, जिसकी तैयारी एक सप्ताह पहले से ही शुरू हो जाती है। ग्रामीणों के अनुसार, राजा सलहेस को शक्ति, शील और सौंदर्य का प्रतीक माना जाता है। लोकमान्यताओं के अनुसार, वे अपनी प्रजा की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहते थे और शत्रुओं से संघर्ष कर राज्य की सुरक्षा करते थे। यही कारण है कि विशेष रूप से दलित समुदाय में राजा सलहेस को एक प्रमुख लोकदेवता के रूप में पूजा जाता है।


