Heavy Exercise Kidney Injury: स्कूल या कोचिंग में सजा के तौर पर कराई जाने वाली ज्यादा उठक-बैठक कई बार बच्चों की सेहत पर भारी पड़ सकती है। हाल ही में नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. जैस्मीन सेठी ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक वीडियो शेयर कर बताया है कि एक बच्चे में ज्यादा उठक-बैठक (Sit-ups) के बाद एक्यूट किडनी इंजरी (Acute Kidney Injury) का मामला सामने आया। आइए जानते हैं कि भारी कसरत के बाद कौन से लक्षण खतरे का संकेत हो सकते हैं।
भारी कसरत से Kidney Injury कैसे होती है?
डॉक्टर के अनुसार, जब हमारी मांसपेशियों पर ज्यादा दबाव पड़ता है, तो वे अंदर ही अंदर टूटने लगती हैं। मेडिकल भाषा में इसको रबडोमायोलिसिस (Rhabdomyolysis) कहा जाता है। मांसपेशियों के इस तरह टूटने से उनके अंदर से एक खास तरह का प्रोटीन और जहरीले केमिकल निकलने लगते हैं। यह प्रोटीन खून के रास्ते जब किडनी तक पहुंचता है, तो किडनी के बारीक फिल्टर इसे छान नहीं पाते और वे पूरी तरह ब्लॉक हो जाते हैं। इसके कारण किडनी शरीर के गंदे पानी और टॉक्सिन्स को बाहर नहीं निकाल पाती और धीरे-धीरे डैमेज होने लगती है।
भारी कसरत या सजा के बाद दिखने वाले लक्षण
नेफ्रोलॉजिस्ट के अनुसार, अगर किसी बच्चे या बड़े को अत्यधिक शारीरिक मेहनत, कड़ी सजा या जिम में भारी एक्सरसाइज करने के बाद नीचे दिए गए बदलाव दिखाई दें, तो इन्हें मामूली थकान या बदन दर्द समझकर बिल्कुल न छोड़ें।
- मांसपेशियों में तेज दर्द।
- शरीर में अचानक सूजन।
- पेशाब का रंग गहरा (डार्क) होना।
- बहुत ज्यादा कमजोरी और सुस्ती।
- पेशाब की मात्रा कम होना।
Sit-ups के बाद ये लक्षण दिखें तो क्या करें?
BMJ journal के अनुसार, अगर भारी कसरत या उठक-बैठक के बाद इनमें से कोई भी लक्षण शरीर में दिखे, तो बिना मरीज को डॉक्टर या नेफ्रोलॉजिस्ट के पास ले जाना चाहिए। ऐसे मामलों में घरेलू नुस्खे अपनाने या दर्द कम करने वाली दवाइयां (पेनकिलर्स) खुद से देने की गलती बिल्कुल न करें, क्योंकि ये दवाइयां किडनी को और ज्यादा नुकसान पहुंचा सकती हैं।
शुरुआती स्टेज में सही इलाज किडनी को स्थाई रूप से खराब होने से बचाया जा सकता है। इसके साथ ही, बच्चों को खेल-कूद, जिम या स्कूल में सजा के नाम पर कभी भी उनकी शारीरिक क्षमता से बाहर जाकर कोई भी काम करने के लिए मजबूर नहीं करना चाहिए।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।


