बुरहानपुर शहर का 200 वर्ष प्राचीन स्वामीनारायण मंदिर पुरुषोत्तम मास के दौरान भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र बना हुआ है। यहां लक्ष्मीनारायण देव 6 किलो सोने से निर्मित सिंहासन पर विराजमान हैं। देशभर से श्रद्धालु दर्शन, दुग्ध अभिषेक और कथा श्रवण के लिए पहुंच रहे हैं। मंदिर के महंत कोठारी पीपी स्वामी ने बताया कि मंदिर की प्रमुख विशेषता 6 किलो सोने से निर्मित तीन दिव्य सिंहासन हैं। इन सिंहासनों में मध्य में लक्ष्मीनारायण देव हरेकृष्ण महाराज, दाएं घनश्याम महाराज और बाएं भगवान की सुख सैया स्थापित है। यह विश्व का एकमात्र स्वामीनारायण मंदिर
मीडिया प्रभारी गोपाल देवकर ने जानकारी दी कि यह विश्व का एकमात्र स्वामीनारायण मंदिर है, जहां पूरे पुरुषोत्तम मास के दौरान प्रतिदिन दुग्ध अभिषेक किया जाता है। शनिवार को छपिया के ब्रह्मचारी हृस्वरूपानंदजी, मुड़ी के हरिप्रकाशदासजी और अयोध्या के सर्वेश्वरदासजी ने अभिषेक व आरती संपन्न की। शास्त्री चिंतनप्रियदासजी ने अपने प्रवचन में कहा कि पुरुषोत्तम मास में स्नान, जप और दान का कई गुना फल मिलता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से भगवान से छल न करने और जरूरतमंदों को दान देने का आग्रह किया, यह कहते हुए कि सत्कर्म ही जीवन की असली पूंजी है। मंदिर में सुबह से देर रात तक भजन और पूजन का क्रम जारी है। कथा का संचालन नटवर भगत कर रहे हैं।


