Share Market, Gold और FD में कितना-कितना लगाएं पैसा? 20 साल के डेटा ने बताया सबसे ज्यादा रिटर्न वाला फॉर्मूला

Share Market, Gold और FD में कितना-कितना लगाएं पैसा? 20 साल के डेटा ने बताया सबसे ज्यादा रिटर्न वाला फॉर्मूला

Long Term Investment: निवेश करने वाले लोग अक्सर इस उलझन में होते है कि अपने पैसे को कैसे इन्वेस्ट करें? एक जगह लगाए या उसे अलग-अलग बांटकर निवेश करें? FundsIndia की ताजा रिपोर्ट Wealth Conversations इन्हीं सवालों का जवाब देती है। रिपोर्ट के मुताबिक असली सवाल यह नहीं है कि कौन सा एसेट सबसे अच्छा है, बल्कि असली सवाल यह है कि इन्हें किस अनुपात में मिलाया जाए, जिससे ज्यादा रिटर्न मिले। 20 साल के डेटा के आधार पर रिपोर्ट में साफ किया गया है कि सही एसेट एलोकेशन न केवल बेहतर रिटर्न देता है, बल्कि बाजार की उठापटक में नुकसान को भी काफी हद तक सीमित करता है।

सिर्फ एक जगह पैसा लगाने में कितना जोखिम

रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 20 साल में सिर्फ इक्विटी पोर्टफोलियो में पैसा लगाने पर सालाना 11.3 फीसदी का रिटर्न मिला। यह रिटर्न देखने में अच्छा लगता है, लेकिन इसके साथ जुड़ा जोखिम भी उतना ही बड़ा है। बाजार में गिरावट के दौरान इस पोर्टफोलियो में अधिकतम 60 फीसदी तक की गिरावट भी देखी गई। यानी अगर किसी ने 10 लाख रुपए लगाए होते तो बुरे वक्त में उसकी वैल्यू घटकर महज 4 लाख रुपए तक आ सकती थी।

वहीं, सिर्फ डेट जैसे- FD या बॉन्ड्स में लगाए गए पैसों में केवल 4.4 फीसदी की अधिकतम गिरावट देखने को मिली, लेकिन रिटर्न भी सिर्फ 7.5 फीसदी सालाना रहा। 7.5 फीसदी का यह रिटर्न महंगाई को मात देने के लिए काफी नहीं है।

70-15-15 का फॉर्मूला क्यों है खास

एक जगह पैसा लगाने के बजाए निवेशक यदि 70-15-15 के फॉर्मूला को अपनाकर निवश करें तो इसके नतीजे चौकाने वाले मिलते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, 70 फीसदी इक्विटी, 15 फीसदी डेट और 15 फीसदी गोल्ड का मिश्रण सबसे संतुलित नतीजे देता है। इस पोर्टफोलियो ने 20 साल में 12.6 फीसदी का सालाना रिटर्न दिया। यह रिटर्न सिर्फ इक्विटी में मिले रिटर्न से बेहतर है। साथ ही अधिकतम गिरावट 39 फीसदी तक सीमित रही।

छोटी अवधि के लिए निवेश करने पर भी यह फॉर्मूला कारगर साबित हुआ है। 5 साल की अवधि में इस स्ट्रैटेजी ने 85 फीसदी मामलों में ज्यादा रिटर्न दिया और 7 साल की अवधि में इस स्ट्रैटजी ने 92 फीसदी मामलों में अच्छा रिटर्न दिया।

50-25-25 का विकल्प भी चुन सकते हैं

ऐसे निवेशक जो जोखिम से और ज्यादा दूरी बनाना चाहते हैं, उनके लिए 50 फीसदी इक्विटी, 25 फीसदी डेट और 25 फीसदी गोल्ड का मिश्रण भी बेहतर विकल्प है। इस एलोकेशन में रिटर्न लगभग 70-15-15 फॉर्मूले जितना ही रहा, लेकिन अधिकतम गिरावट घटकर 27.4 फीसदी रह गई। यह उन निवेशकों के लिए आदर्श है जो बाजार की तेज उठापटक से घबराते हैं या जो कम समय के लिए निवेश करना चाहते हैं।

डायवर्सिफिकेशन की असली ताकत

रिपोर्ट का मूल संदेश यह है कि लंबी अवधि में संपत्ति बनाने के लिए सबसे अच्छा एसेट चुनना जरूरी नहीं, बल्कि एसेट का सही मिश्रण तैयार करना जरूरी है। इक्विटी ग्रोथ देती है, डेट स्थिरता देता है और गोल्ड अनिश्चितता के दौर में सुरक्षा कवच का काम करता है। तीनों को सही अनुपात में जोड़ने पर निवेश का सफर न केवल ज्यादा फायदेमंद बनता है बल्कि मानसिक तनाव भी कम होता है।

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