अमरीका-ईरान युद्ध की वजह से पेट्रोलियम पदार्थों को लेकर जो वैश्विक संकट आया है, उससे आप-हम कोई भी अछूता नहीं रह गया है। राजधानी रायपुर सहित पूरे छत्तीसगढ़ में पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस सिलेंडर के लिए पेट्रोल पंपों और गैस एजेंसियों में लंबी-लंबी कतारें अभी भी देखी जा रही हैं।
वैश्विक संकट का सामना करने के लिए ईंधन बचाने की प्रधानमंत्री की अपील के बाद विभिन्न प्रकार से पहल की जा रही है। राज्य सरकार और शासन-प्रशासन के स्तर पर सरकारी गाड़ियों के काफिले को छोटा करने सहित अन्य उपायों को अमल में लाना शुरू कर दिया गया है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने भी ईंधन बचाने के लिए जजों और स्टाफ को कार-पूलिंग के लिए प्रोत्साहित किया है, यह सराहनीय पहल है। इसी तरह की पहल जिलों से लेकर प्रदेश के सभी सरकारी कार्यालयों में आला अफसरों को करनी चाहिए। क्योंकि अधिकारियों और कर्मचारियों को सरकारी आवास आवंटित होता है, जहां से वे अलग-अलग वाहनों की बजाय एकसाथ कार्यालयों में आना-जाना कर सकते हैं। वहीं, आमजनों के लिए सार्वजनिक परिवहन सेवाओं को दुरुस्त करना होगा। साथ ही साथ इसे सुलभ और सस्ता भी बनाना होगा।
ईंधन बचाने के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों यानी ईवी को भी इन दिनों प्रोत्साहित किया जा रहा है। फौरीतौर पर देखा जाए तो ईंधन बचाने का यह एक अच्छा उपाय नजर आ रहा है, क्योंकि पेट्रोल-डीजल पर हमारी निर्भरता खत्म हो जाती है। पर क्या निकट भविष्य में हम दूसरे संकट की ओर तो नहीं बढ़ रहे हैं? ऊर्जा यानी कि विद्युत संकट की ओर। ईवी सहित एसी व अन्य विद्युत उपकरणों के बेतहाशा इस्तेमाल से यह संकट भी कतार में है।
सरकार को चाहिए कि वह ईंधन बचाने के साथ ही ऊर्जा संरक्षण की दिशा में भी ठोस प्रयास करे। आप और हम भी ईंधन और ऊर्जा का सही इस्तेमाल कर इसमें योगदान दे सकते हैं।-अनुपम राजीव राजवैद्य anupam.rajiv@in.patrika.com


