बिहार सरकार के कला एवं संस्कृति विभाग की महत्वाकांक्षी ‘आम्रपाली प्रशिक्षण योजना’ का शुभारंभ स्थानीय प्रेक्षागृह परिसर में किया गया। जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी राकेश कुमार (DACO)ने इसका विधिवत उद्घाटन किया। यह योजना कला, संगीत और संस्कृति के क्षेत्र में रुचि रखने वाले सभी आयु वर्ग के लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर साबित होगी। उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए राकेश कुमार ने कहा कि बिहार की सांस्कृतिक विरासत प्राचीन काल से ही समृद्ध और गौरवशाली रही है। नई पीढ़ी को कला और संगीत से जोड़ना लक्ष्य यहां की लोक कला, संगीत और नृत्य ने देश-दुनिया में अपनी विशेष पहचान बनाई है। आम्रपाली प्रशिक्षण योजना का उद्देश्य इसी सांस्कृतिक परंपरा को पुनर्जीवित करना तथा नई पीढ़ी को कला और संगीत से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार चाहती है कि बिहार के युवा कला और संगीत के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करें और प्रदेश का नाम रोशन करें। अधिकारी ने बताया कि योजना के तहत फिलहाल गायन, वादन एवं नृत्य तीन विषयों में प्रशिक्षण दिया जाएगा। इन पाठ्यक्रमों में अब तक 100 से अधिक प्रतिभागियों का नामांकन किया जा चुका है। प्रतिभागियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए प्रतिदिन दो सत्रों में कक्षाओं का संचालन किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक लोग प्रशिक्षण प्राप्त कर सकें। योजना एक महत्वपूर्ण पहल जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी ने कहा कि बिहार का इतिहास कला एवं संस्कृति के क्षेत्र में अत्यंत समृद्ध रहा है। आवश्यकता इस बात की है कि उस गौरवशाली परंपरा को फिर से जीवित किया जाए। आम्रपाली प्रशिक्षण योजना इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इसके माध्यम से राज्य में प्रतिभाशाली कलाकारों की नई श्रृंखला तैयार होगी और युवा पीढ़ी को अपनी प्रतिभा निखारने का बेहतर मंच मिलेगा। कार्यक्रम के दौरान कला एवं संस्कृति विभाग के कर्मी, प्रशिक्षक और बड़ी संख्या में प्रतिभागी उपस्थित रहे। बिहार सरकार के कला एवं संस्कृति विभाग की महत्वाकांक्षी ‘आम्रपाली प्रशिक्षण योजना’ का शुभारंभ स्थानीय प्रेक्षागृह परिसर में किया गया। जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी राकेश कुमार (DACO)ने इसका विधिवत उद्घाटन किया। यह योजना कला, संगीत और संस्कृति के क्षेत्र में रुचि रखने वाले सभी आयु वर्ग के लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर साबित होगी। उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए राकेश कुमार ने कहा कि बिहार की सांस्कृतिक विरासत प्राचीन काल से ही समृद्ध और गौरवशाली रही है। नई पीढ़ी को कला और संगीत से जोड़ना लक्ष्य यहां की लोक कला, संगीत और नृत्य ने देश-दुनिया में अपनी विशेष पहचान बनाई है। आम्रपाली प्रशिक्षण योजना का उद्देश्य इसी सांस्कृतिक परंपरा को पुनर्जीवित करना तथा नई पीढ़ी को कला और संगीत से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार चाहती है कि बिहार के युवा कला और संगीत के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करें और प्रदेश का नाम रोशन करें। अधिकारी ने बताया कि योजना के तहत फिलहाल गायन, वादन एवं नृत्य तीन विषयों में प्रशिक्षण दिया जाएगा। इन पाठ्यक्रमों में अब तक 100 से अधिक प्रतिभागियों का नामांकन किया जा चुका है। प्रतिभागियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए प्रतिदिन दो सत्रों में कक्षाओं का संचालन किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक लोग प्रशिक्षण प्राप्त कर सकें। योजना एक महत्वपूर्ण पहल जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी ने कहा कि बिहार का इतिहास कला एवं संस्कृति के क्षेत्र में अत्यंत समृद्ध रहा है। आवश्यकता इस बात की है कि उस गौरवशाली परंपरा को फिर से जीवित किया जाए। आम्रपाली प्रशिक्षण योजना इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इसके माध्यम से राज्य में प्रतिभाशाली कलाकारों की नई श्रृंखला तैयार होगी और युवा पीढ़ी को अपनी प्रतिभा निखारने का बेहतर मंच मिलेगा। कार्यक्रम के दौरान कला एवं संस्कृति विभाग के कर्मी, प्रशिक्षक और बड़ी संख्या में प्रतिभागी उपस्थित रहे।


