बाड़मेर। पुरुषोत्तम अधिक मास के पावन अवसर पर गुरुवार को शहर में भक्ति, श्रद्धा और सनातन संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिला। अलसुबह 5 बजे शहर के सदर बाजार स्थित हनुमान मंदिर से विशाल नगर परिक्रमा का शुभारंभ हुआ। गंगागिरी मठ के महंत खुशालगिरी महाराज के सानिध्य में शुरू हुई इस धार्मिक यात्रा में हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लिया। श्रद्धालु जयकारों, भजन-कीर्तन और धार्मिक उत्साह के साथ लगभग 25 किलोमीटर की पदयात्रा करते हुए नगर परिक्रमा में शामिल हुए।
कार्यक्रम के मीडिया प्रभारी हरिसिंह राठौड़ ने बताया कि पुरुषोत्तम अधिक मास के उपलक्ष्य में आयोजित यह नगर परिक्रमा धार्मिक आस्था और सामाजिक एकता का प्रतीक है। नगर परिक्रमा को लेकर पूरे बाड़मेर शहर में उत्साह का माहौल बना रहा। उन्होंने बताया कि गुरुवार सुबह 5 बजे सदर बाजार स्थित हनुमान मंदिर से संत-महात्माओं के सानिध्य में नगर परिक्रमाबड़े हर्षोल्लास के साथ प्रारंभ हुई।
नगर परिक्रमा चौहटन चौराहा, गडरा रोड, रावलों की ढाणी और पहाड़ी क्षेत्र के पीछे से होते हुए सुबह करीब 8 बजे गोपाल गौशाला पहुँची। यहां श्रद्धालुओं ने एक घंटे विश्राम किया। इसके बाद सुबह 9 बजे यात्रा पुनः शुरू हुई, जो हिंगलाज माता मंदिर, नए बिजलीघर, इंद्रा कॉलोनी से जैसलमेर रोड और आरटीओ ऑफिस होते हुए शिवशक्ति धाम जसदेर पहुँची। यहां पर श्रद्धालुओं के लिए भोजन और विश्राम की विशेष व्यवस्था की गई। यहां शाम 4 बजे तक धार्मिक कार्यक्रम आयोजित हुए, जिनमें अधिक मास की कथा, भजन-कीर्तन तथा भामाशाहों का सम्मान समारोह शामिल हुए। इस दौरान पोकरण विधायक एवं संत महंत प्रतापपुरी महाराज, गंगागिरी मठ के महंत खुशालगिरी महाराज, महंत सियाराम महाराज, सीताराम आश्रम, सेवा लक्ष्मणपुरी सहित कई संत-महात्मा उपस्थित रहे।
पोकरण विधायक महंत प्रतापपुरी महाराज ने नगर परिक्रमा में तन, मन और धन से सहयोग करने वाले सभी श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि नगर परिक्रमा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक और भावनात्मक एकता का प्रतीक है। महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों के उत्साह की सराहना करते हुए कहा कि लंबे समय से माताएं और बहनें इस नगर परिक्रमा का इंतजार कर रही थीं। उन्होंने कहा कि इस आयोजन में मातृशक्ति की विशेष भूमिका है, क्योंकि पहला गुरु मां होती है, उसके बाद पिता और फिर ज्ञान देने वाले शिक्षक। उन्होंने कहा कि समाज में सनातन धर्म और संस्कारों को जीवित रखने में महिलाओं का सबसे बड़ा योगदान है। गंगागिरी मठ के महंत खुशालगिरी महाराज ने अपने संबोधन में कहा कि यह केवल धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति, सामाजिक समरसता और लोक आस्था का जीवंत उत्सव है। शास्त्रों के अनुसार पुरुषोत्तम मास में किए गए जप, तप, दान और पुण्य का फल कई गुना अधिक प्राप्त होता है। सनातन धर्म में पुरुषोत्तम मास का विशेष महत्व है और इसे अत्यंत पवित्र मास माना गया है। अधिक मास में नगर परिक्रमा की यह परंपरा पिछले 65 वर्षों से निरंतर चली आ रही है। हर तीन वर्ष में आयोजित होने वाली इस परिक्रमा में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है, जो समाज में धार्मिक जागरूकता और आस्था का परिचायक है। उन्होंने आयोजन को सफल बनाने में सहयोग करने वाले सभी लोगों और दानदाताओं का आभार व्यक्त किया।
कमेटी के मंत्री किशोर भार्गव ने बताया कि जसदेर धाम से शाम 4 बजे यात्रा पुनः शुरू हुई। इसके बाद परिक्रमासिंधरी चौराहे से होती हुई सदर बाजार स्थित हनुमान मंदिर पहुँची, जहां श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरण के साथ नगर परिक्रमा का समापन किया गया। वहीं, कमेटी के कोषाध्यक्ष बंशीलाल और सचिव गिरीश मथराणी ने नगर परिक्रमा के सफल आयोजन पर सभी श्रद्धालुओं, सर्व समाज, स्टॉल व्यवस्था सेवा धारियों, सहयोगकर्ताओं और विशेष रूप से दानदाताओं का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का मंच संचालन दिलीप तिवाड़ी और आनंद पुरोहित ने किया। इस नगर परिक्रमा को सफल बनाने में दिलीप बंसल, विष्णु मोदी, भीमराज पुगलिया, नंद किशोर छुछा, हंसराज सोनी, अशोक सराफ, मनोहर सिंह मेड़तिया, ओम प्रकाश मुथा, चंद्रशेखर अग्रवाल, भूर सिंह दोहट, ओम प्रकाश त्रिवेदी, स्वरूप वासु, गेमर सिंह परमार, पारस मल सोनी, अजय नाथ गोस्वामी, नरेश सोनी, कैलाश गिरी, सुखदेव बजरंगी, धर्मेंद्र गुप्ता, विजय शारदा, ताराचंद भूतड़ा, सुरेश बंगारी, जय नारायण खत्री, लूणकरण, धनश्याम जागिड़, छगन सिंह, दिनेश प्रजापत, ओम नाथ, मूला राम माली, प्रदीप शर्मा, अमित कल्ला, दिलीप तिवारी और ओम सिंह गोहिल सहित अनेक सर्व समाज बंधु जुटे थे।


