सीवान में करोड़ों रुपए की लागत से बना मॉडल अस्पताल उद्घाटन के डेढ़ साल के अंदर ही बदहाली और भ्रष्टाचार की मिसाल बनता नजर आ रहा है। तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री और वर्तमान सदर विधायक मंगल पाण्डेय ने 3 दिसंबर 2024 को जिला स्थापना दिवस के मौके पर जल्दबाजी में इस भवन का उद्घाटन किया था। हालांकि, निर्माण कार्य आज भी अधूरा बताया जा रहा है। अब हालात ऐसे हैं कि अस्पताल की दीवारें फटने लगी हैं, बारिश में पानी टपक रहा है और भीषण गर्मी में मरीज व डॉक्टर बिना एसी के तड़पने को मजबूर हैं। जिस अस्पताल को आधुनिक और वातानुकूलित सुविधा के तौर पर प्रचारित किया गया था, वहीं आज सामान्य इमरजेंसी, महिला इमरजेंसी, ऑपरेशन थिएटर और वार्डों में मरीज बेहाल हैं। सबसे चिंताजनक स्थिति ऑपरेशन थिएटर की है, जहां न खिड़की है और न ही वेंटिलेशन। पूरा सिस्टम एसी पर निर्भर है, लेकिन पिछले लगभग दो महीनों से एसी बंद पड़ा है। गर्मी इतनी अधिक है कि महिला डॉक्टरों ने ऑपरेशन करने से तक इनकार कर दिया।
बदहाल व्यवस्था से मरीज की जान जोखिम में एक महिला डॉक्टर ने बताया कि ऑपरेशन थिएटर पूरी तरह बंद कमरा है। एसी खराब है और एक पंखा तक नहीं लगाया गया है। ऐसे में ऑपरेशन के दौरान डॉक्टर और मरीज दोनों की जान जोखिम में रहती है। डॉक्टर ने साफ कहा कि अगर किसी मरीज के साथ कोई अप्रिय घटना होती है तो उसका दोष डॉक्टरों पर मढ़ दिया जाएगा, जबकि असली जिम्मेदार बदहाल व्यवस्था है। चार मंजिला इस मॉडल अस्पताल में प्रथम तल पर इमरजेंसी, दूसरे तल पर महिला वार्ड और ऑपरेशन थिएटर, तीसरे तल पर जनरल वार्ड और चौथे तल पर ब्लड बैंक व अधीक्षक कार्यालय संचालित हैं। मरीजों और गर्भवती महिलाओं की सुविधा के लिए बनाई गई लिफ्ट कई महीनों से खराब पड़ी है। गर्भवती महिलाएं सीढ़ियों से ऊपर-नीचे करने को मजबूर मजबूरी में परिजन गर्भवती महिलाएं और गंभीर मरीज सीढ़ियों के सहारे और गोद मे उठाकर ऊपर-नीचे कर रहे हैं। यहां तक कि प्रसव के लिए आई महिलाओं के लिए स्ट्रेचर तक कि व्यवस्था नही है। चौथे तल पर जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र कार्यालय में आने वाले लोगों की हालत भी सीढ़ियां चढ़ते-उतरते खराब हो रही है। एक तरफ परिजन जान जोखिम में डालकर मरीजों को चढ़ा-उतार रहे है। वहीं दूसरी ओर डॉक्टरों और कर्मचारियों के लिए लगी अलग लिफ्ट सुचारु रूप से चल रही है, जिससे अस्पताल प्रबंधन की संवेदनहीनता साफ दिखाई दे रही है। गैस का इंजेक्शन उपलब्ध नहीं अस्पताल में मरीजों के परिजनों के बैठने तक की समुचित व्यवस्था नहीं की गई है। प्रसव कराने आई महिलाओं के परिजन वार्ड के बाहर फर्श और सीढ़ियों पर बैठकर समय काटने को मजबूर हैं। दूसरी तरफ दवाओं की उपलब्धता को लेकर सरकार के दावों की भी पोल खुल रही है। इमरजेंसी वार्ड में सबसे अधिक इस्तेमाल होने वाला गैस का इंजेक्शन कई दिनों से उपलब्ध नहीं है और मरीजों को निजी दुकानों से दवा खरीदनी पड़ रही है। इतना ही नहीं, कई बेड के पास लगे ऑक्सीजन पाइपों में सप्लाई तक बंद पड़ी है, जिससे इमरजेंसी सेवा पूरी तरह भगवान भरोसे चल रही है। एसी का कॉपर पाइप चुरा ले गए चोर मामले पर अस्पताल के हेल्थ मैनेजर कमलजीत कुमार ने सफाई देते हुए कहा कि दो महीने पहले चोर एसी का कॉपर पाइप चुरा ले गए थे, जिसके कारण एसी बंद है। उन्होंने दावा किया कि ठेकेदार को सूचना दे दी गई है और जल्द मरम्मत कराई जाएगी। वहीं लिफ्ट की खराबी को तकनीकी समस्या बताते हुए जल्द ठीक कराने की बात कही गई। हालांकि ऑक्सीजन सप्लाई बंद होने की जानकारी तक उन्हें नहीं थी। दूसरी ओर सिविल सर्जन डॉ. श्रीनिवास प्रसाद ने कहा कि सभी समस्याएं संज्ञान में हैं और जल्द सुधार कराया जाएगा। सीवान में करोड़ों रुपए की लागत से बना मॉडल अस्पताल उद्घाटन के डेढ़ साल के अंदर ही बदहाली और भ्रष्टाचार की मिसाल बनता नजर आ रहा है। तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री और वर्तमान सदर विधायक मंगल पाण्डेय ने 3 दिसंबर 2024 को जिला स्थापना दिवस के मौके पर जल्दबाजी में इस भवन का उद्घाटन किया था। हालांकि, निर्माण कार्य आज भी अधूरा बताया जा रहा है। अब हालात ऐसे हैं कि अस्पताल की दीवारें फटने लगी हैं, बारिश में पानी टपक रहा है और भीषण गर्मी में मरीज व डॉक्टर बिना एसी के तड़पने को मजबूर हैं। जिस अस्पताल को आधुनिक और वातानुकूलित सुविधा के तौर पर प्रचारित किया गया था, वहीं आज सामान्य इमरजेंसी, महिला इमरजेंसी, ऑपरेशन थिएटर और वार्डों में मरीज बेहाल हैं। सबसे चिंताजनक स्थिति ऑपरेशन थिएटर की है, जहां न खिड़की है और न ही वेंटिलेशन। पूरा सिस्टम एसी पर निर्भर है, लेकिन पिछले लगभग दो महीनों से एसी बंद पड़ा है। गर्मी इतनी अधिक है कि महिला डॉक्टरों ने ऑपरेशन करने से तक इनकार कर दिया।
बदहाल व्यवस्था से मरीज की जान जोखिम में एक महिला डॉक्टर ने बताया कि ऑपरेशन थिएटर पूरी तरह बंद कमरा है। एसी खराब है और एक पंखा तक नहीं लगाया गया है। ऐसे में ऑपरेशन के दौरान डॉक्टर और मरीज दोनों की जान जोखिम में रहती है। डॉक्टर ने साफ कहा कि अगर किसी मरीज के साथ कोई अप्रिय घटना होती है तो उसका दोष डॉक्टरों पर मढ़ दिया जाएगा, जबकि असली जिम्मेदार बदहाल व्यवस्था है। चार मंजिला इस मॉडल अस्पताल में प्रथम तल पर इमरजेंसी, दूसरे तल पर महिला वार्ड और ऑपरेशन थिएटर, तीसरे तल पर जनरल वार्ड और चौथे तल पर ब्लड बैंक व अधीक्षक कार्यालय संचालित हैं। मरीजों और गर्भवती महिलाओं की सुविधा के लिए बनाई गई लिफ्ट कई महीनों से खराब पड़ी है। गर्भवती महिलाएं सीढ़ियों से ऊपर-नीचे करने को मजबूर मजबूरी में परिजन गर्भवती महिलाएं और गंभीर मरीज सीढ़ियों के सहारे और गोद मे उठाकर ऊपर-नीचे कर रहे हैं। यहां तक कि प्रसव के लिए आई महिलाओं के लिए स्ट्रेचर तक कि व्यवस्था नही है। चौथे तल पर जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र कार्यालय में आने वाले लोगों की हालत भी सीढ़ियां चढ़ते-उतरते खराब हो रही है। एक तरफ परिजन जान जोखिम में डालकर मरीजों को चढ़ा-उतार रहे है। वहीं दूसरी ओर डॉक्टरों और कर्मचारियों के लिए लगी अलग लिफ्ट सुचारु रूप से चल रही है, जिससे अस्पताल प्रबंधन की संवेदनहीनता साफ दिखाई दे रही है। गैस का इंजेक्शन उपलब्ध नहीं अस्पताल में मरीजों के परिजनों के बैठने तक की समुचित व्यवस्था नहीं की गई है। प्रसव कराने आई महिलाओं के परिजन वार्ड के बाहर फर्श और सीढ़ियों पर बैठकर समय काटने को मजबूर हैं। दूसरी तरफ दवाओं की उपलब्धता को लेकर सरकार के दावों की भी पोल खुल रही है। इमरजेंसी वार्ड में सबसे अधिक इस्तेमाल होने वाला गैस का इंजेक्शन कई दिनों से उपलब्ध नहीं है और मरीजों को निजी दुकानों से दवा खरीदनी पड़ रही है। इतना ही नहीं, कई बेड के पास लगे ऑक्सीजन पाइपों में सप्लाई तक बंद पड़ी है, जिससे इमरजेंसी सेवा पूरी तरह भगवान भरोसे चल रही है। एसी का कॉपर पाइप चुरा ले गए चोर मामले पर अस्पताल के हेल्थ मैनेजर कमलजीत कुमार ने सफाई देते हुए कहा कि दो महीने पहले चोर एसी का कॉपर पाइप चुरा ले गए थे, जिसके कारण एसी बंद है। उन्होंने दावा किया कि ठेकेदार को सूचना दे दी गई है और जल्द मरम्मत कराई जाएगी। वहीं लिफ्ट की खराबी को तकनीकी समस्या बताते हुए जल्द ठीक कराने की बात कही गई। हालांकि ऑक्सीजन सप्लाई बंद होने की जानकारी तक उन्हें नहीं थी। दूसरी ओर सिविल सर्जन डॉ. श्रीनिवास प्रसाद ने कहा कि सभी समस्याएं संज्ञान में हैं और जल्द सुधार कराया जाएगा।


