उत्तर भारतीय परीक्षार्थियों पर हमला मामले में 18 साल बाद राज ठाकरे बरी, कोर्ट ने कहा- ठोस सबूत नहीं

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे को 2008 के चर्चित रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB) परीक्षा हिंसा मामले में बड़ी राहत मिली है। ठाणे की अदालत ने गुरुवार को इस मामले में फैसला सुनाते हुए राज ठाकरे समेत सभी आरोपियों को बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त और ठोस सबूत पेश करने में असफल रहा।

यह मामला वर्ष 2008 का है, जब कल्याण रेलवे स्टेशन पर रेलवे भर्ती बोर्ड (आरआरबी) की परीक्षा देने आए उत्तर भारतीय छात्रों पर कथित तौर पर हमला किया गया था। इस मामले में राज ठाकरे समेत कुल आठ लोगों को आरोपी बनाया गया था। हालांकि मुकदमे के दौरान दो आरोपियों की मौत हो चुकी है।

18 साल बाद आया अदालत का फैसला

करीब 18 साल तक चली सुनवाई के बाद ठाणे कोर्ट ने आखिरकार इस मामले में फैसला सुनाया। आज सुनवाई के दौरान खुद राज ठाकरे अदालत में मौजूद रहे। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि सरकारी पक्ष ऐसा कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर सका, जिससे आरोपियों की संलिप्तता स्पष्ट रूप से साबित हो सके।

मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अभिजीत कुलकर्णी ने अभियोजन और बचाव पक्ष की अंतिम दलीलें सुनने के बाद सोमवार को मामले को फैसले के लिए सुरक्षित रखा था। इसके बाद आज अदालत ने सभी आरोपियों को सबूतों के अभाव में निर्दोष घोषित कर दिया।

अदालत में क्या बोले राज ठाकरे?

सुनवाई के दौरान राज ठाकरे ने अदालत में कहा कि उनका इस मामले से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने दावा किया कि कथित घटना के समय वह नासिक में मौजूद थे। अदालत ने भी माना कि अभियोजन पक्ष यह साबित नहीं कर पाया कि राज ठाकरे घटनास्थल पर मौजूद थे या उन्होंने किसी प्रकार का उकसाने वाला भाषण दिया था।

बचाव पक्ष ने क्या दलील दी?

राज ठाकरे की ओर से पेश अधिवक्ता शैलेश साडेकर, सयाजी नागारे और शुभम कनाडे ने अदालत में तर्क दिया कि पूरा मामला विरोधाभासों से भरा हुआ है। बचाव पक्ष ने कहा कि न तो चार्जशीट और न ही मौखिक गवाहियों से राज ठाकरे की मौजूदगी साबित होती है।

साथ ही यह भी कहा गया कि अभियोजन पक्ष कथित भड़काऊ भाषणों का कोई ठोस प्रमाण पेश नहीं कर पाया। इतना ही नहीं, सरकारी गवाह भी अदालत में आरोपियों की पहचान नहीं कर सके।  

150 छात्र स्टेशन पर थे, इसके सबूत नहीं!

बचाव पक्ष ने अदालत को बताया कि अभियोजन पक्ष ने दावा किया था कि करीब 150 छात्र रेलवे परीक्षा देने आए थे, लेकिन अदालत में न तो प्रवेश पत्र, न पहचान पत्र और न ही कोई संबंधित दस्तावेज पेश किए गए। इसी आधार पर अदालत ने माना कि आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य मौजूद नहीं हैं।

राज ठाकरे की गिरफ्तारी के बाद उस समय यह मामला महाराष्ट्र की राजनीति में काफी चर्चित रहा था। इसके बाद ही महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) ने राज्य की राजनीति में तेजी से अपनी मजबूत पहचान बनाई थी।

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