Layoffs News: दुनियाभर में छंटनी का दौर चल रहा है। टेक कंपनियां तेजी से AI इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश कर रही हैं और कॉस्ट कटिंग के लिए लोगों को निकाल रही हैं। लेकिन नौकरीपेशा आदमी को यह समझना होगा कि कंपनियां छंटनी से हफ्तों, बल्कि कई बार महीनों पहले से ही संकेत देने लगती हैं। अचानक मिलने वाली लेऑफ की खबर कर्मचारियों के लिए किसी झटके से कम नहीं होती। इसलिए अमेरिका की जानी-मानी रिक्रूटर श्रेया मेहता 7 ऐसे संकेतों के बारे में बता रही हैं, जो कंपनियां पहले से देना शुरु कर देती हैं। आइए इन संकेतों के बारे में जानते हैं।
पहले से चलती है लेऑफ की तैयारी
मेहता के मुताबिक, लेऑफ कोई रातोंरात लिया गया फैसला नहीं होता। कंपनियां पहले चुपचाप अपनी आंतरिक संरचना बदलने लगती हैं और फिर हफ्तों या महीनों बाद सार्वजनिक ऐलान होता है। उन्होंने यह भी साफ किया कि अच्छी परफॉर्मेंस रेटिंग नौकरी की गारंटी नहीं होती। कई बार पूरी की पूरी टीम सिर्फ इसलिए हटा दी जाती है, क्योंकि कंपनी ने अपनी बिजनेस प्राथमिकताएं बदल ली हों या बजट कटौती करनी हो।
ये 7 संकेत दिखने लगे तो समझ जाना कंपनी में होने वाला है लेऑफ
मेहता ने ऐसे सात वॉर्निंग साइन्स बताए हैं, जो छंटनी से पहले अक्सर दिखने लगते हैं।

- पहला संकेत तब मिलता है जब स्किप-लेवल मैनेजर यानी आपके बॉस के बॉस अचानक आपके काम के बारे में बहुत विस्तार से सवाल पूछने लगें, जबकि पहले उनकी कोई खास दिलचस्पी नहीं होती थी।
- दूसरा संकेत है अचानक ऐसी मीटिंग्स का होना जिनमें टीम स्ट्रक्चर, वर्कफोर्स प्लानिंग पर चर्चा हो, खासकर उन डिपार्टमेंट में जहां पहले ऐसी बातें कभी नहीं होती थीं।
- तीसरा संकेत है हायरिंग फ्रीज। अगर आपकी टीम में नई भर्ती रुक गई हो लेकिन दूसरे डिपार्टमेंट में तेजी से हायरिंग हो रही हो, तो यह इशारा हो सकता है कि बजट की रिअलोकेशन हो रही है।
- चौथा संकेत मैनेजर के बर्ताव में बदलाव से मिलता है। कभी-कभी मैनेजर बिना किसी कारण के बेहद शांत और दूरी बनाने वाले हो जाते हैं, तो कभी अचानक असामान्य रूप से मिलनसार और मदद करने वाले हो जाते हैं। दोनों ही स्थितियां कुछ न कुछ संकेत देती हैं।
- पांचवां संकेत है पहले से चल रहे प्रोजेक्ट्स का अचानक रुकना, उनकी प्राथमिकता बदलना या उन्हें किसी बड़े प्रोजेक्ट में मर्ज कर देना। ये संकेत बताते हैं कि लीडरशिप खर्चों और टीम के आकार पर दोबारा विचार कर रही है।
- छठा संकेत कॉर्पोरेट भाषा में छुपा होता है। जब कंपनी की होने वाली मीटिंग्स में ‘रीऑर्गेनाइजेशन’ (पुनर्गठन), ‘स्ट्रीमलाइनिंग’ (कार्यों को व्यवस्थित करना), ‘एफिशिएंसी’ (दक्षता), या ‘हाई-इम्पैक्ट वर्क’ (प्रभावशाली काम) जैसे शब्दों का इस्तेमाल बार-बार किया जाता है, तो इस तरह के संकेतों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
- सातवां और सबसे बड़ा संकेत है जब सीनियर लीडर्स चुपचाप कंपनी छोड़ने लगें और उनकी जगह लंबे समय तक खाली रहे। ऐसी स्थिति में लेऑफ होने की आशंका ज्यादा होती है।
इन सब संकेतों को बताने के बाद मेहता ने स्पष्ट किया कि इनमें से कोई एक संकेत अकेला इस बात की पुष्टि नहीं कर सकता की लेऑफ हो सकता है लेकिन यदि जब कुछ समय में ही एक साथ कई संकेत मिलते हैं तो यह इत्तेफाक नहीं होता। ऐसे में लेऑफ की आशंका ज्यादा बढ़ जाती है।
अभी से तैयारी करें
आगे मेहता सलाह देती हैं कि अगर ये संकेत दिखने लगें तो लेऑफ की आधिकारिक सूचना का इंतजार नहीं करना चाहिए। जब आप आर्थिक रूप से स्थिर होते हैं और आपका मन शांत होता है तो आप नए मौके की तलाश शुरू कर सकते हैं। अपना सीवी अपडेट करना और नया नेटवर्क बनाना चाहिए। यह सब पहले से ही शुरू करना होगा, क्योंकि लेऑफ के बाद यही काम दबाव और तनाव में करना ज्यादा मुश्किल हो जाता है।
Meta में क्या पहले से थी लेऑफ की जानकारी
Meta में हाल ही में बड़े पैमाने पर छंटनी की खबरें सामने आई हैं। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी ने दुनियाभर में हजारों कर्मचारियों को निकाल दिया है। इसी घटनाक्रम के बीच श्रेया मेहता ने बताया कि Meta में लेऑफ की लिस्ट आधिकारिक ऐलान से पहले ही अंदर ही अंदर तैयार हो चुकी थी। टेक कर्मचारियों के बीच लोकप्रिय अनाॅनिमस फोरम Blind पर चल रही चर्चाओं का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि सीनियर लीडरशिप को छंटनी की जानकारी काफी पहले से थी।


