सीएम बनते ही शुभेंदु अधिकारी ने मदरसों पर लिया बड़ा फैसला, अब गूंजेगा ‘वंदे मातरम्’ गाना, बढ़ी सियासी हलचल

सीएम बनते ही शुभेंदु अधिकारी ने मदरसों पर लिया बड़ा फैसला, अब गूंजेगा ‘वंदे मातरम्’ गाना, बढ़ी सियासी हलचल

Suvendu Adhikari Vande Mataram In Madarsa: पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। राज्य की बीजेपी सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए अब सभी मदरसों में भी प्रार्थना सभा के दौरान ‘वंदे मातरम्’ गाना अनिवार्य कर दिया है। इस फैसले के बाद बंगाल का सियासी माहौल गर्म हो गया है। एक तरफ बीजेपी इसे राष्ट्रभक्ति से जुड़ा कदम बता रही है, तो वहीं विपक्ष इसे धार्मिक संस्थानों में सरकारी दखल के तौर पर देख रहा है।

सरकारी मदरसों तक ही सीमित नहीं (Suvendu Adhikari Vande Mataram In Madarsa)

बताया जा रहा है कि ये नियम सिर्फ सरकारी मदरसों तक सीमित नहीं रहेगा। सहायता प्राप्त, गैर सहायता प्राप्त और मान्यता प्राप्त सभी मदरसों में इसे लागू किया जाएगा। अल्पसंख्यक कार्य और मदरसा शिक्षा विभाग की ओर से जारी निर्देश में साफ कहा गया है कि क्लास शुरू होने से पहले होने वाली प्रार्थना सभा में ‘वंदे मातरम्’ गाना जरूरी होगा। इसके साथ ही पुराने सभी नियमों और प्रक्रियाओं को बदलने की बात भी कही गई है। शुभेंदु अधिकारी के इस नियम के बाद बड़े सियासी भूचाल की आहट सुनाई दे रही है।

Suvendu Adhikari Vande Mataram In Madarsa

दरअसल, कुछ दिन पहले ही राज्य सरकार ने सभी सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में ‘वंदे मातरम्’ को अनिवार्य किया था। अब उसी नीति को आगे बढ़ाते हुए मदरसों को भी इसके दायरे में लाया गया है। सरकार का कहना है कि राष्ट्रगीत देश की एकता और सम्मान का प्रतीक है, इसलिए इसे शिक्षा संस्थानों में शामिल करना जरूरी है।

राजनीति पर भी होगा असर

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बंगाल में यह फैसला सिर्फ शिक्षा नीति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध राज्य की बदलती राजनीति से भी है। पिछले कुछ वर्षों में बीजेपी ने बंगाल में राष्ट्रवाद और सांस्कृतिक मुद्दों को लगातार प्रमुखता से उठाया है। ऐसे में मदरसों में ‘वंदे मातरम्’ अनिवार्य करने का फैसला राजनीतिक रूप से भी अहम माना जा रहा है।

फैसले पर मुस्लिम संगठनों की प्रतिक्रियाएं

इस फैसले के बाद कई मुस्लिम संगठनों और विपक्षी दलों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं। कुछ लोगों का कहना है कि शिक्षा संस्थानों में राष्ट्रगीत गाने में कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए, जबकि कुछ इसे धार्मिक स्वतंत्रता से जोड़कर देख रहे हैं। हालांकि सरकार की तरफ से साफ संदेश दिया गया है कि यह आदेश सभी संस्थानों को मानना होगा।

मदरसों के लिए साफ निर्देश जारी

बंगाल में पहले भी ‘वंदे मातरम्’ को लेकर बहस होती रही है। लेकिन पहली बार मदरसों के लिए इस तरह का स्पष्ट और सख्त निर्देश जारी किया गया है। यही वजह है कि यह मुद्दा अब सिर्फ शिक्षा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का बड़ा विषय बन गया है।

आने वाले दिनों में इस फैसले पर और विवाद बढ़ सकता है, क्योंकि विपक्ष सरकार से इस आदेश को लेकर कई सवाल पूछ रहा है। वहीं बीजेपी इसे राष्ट्रहित का फैसला बताते हुए लगातार बचाव कर रही है। फिलहाल बंगाल के मदरसों में ‘वंदे मातरम्’ की अनिवार्यता ने राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।

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