PMCH में 200 MBBS छात्रों ने छोड़ी आंतरिक मूल्यांकन परीक्षा:‘सामूहिक सजा’ के विरोध में एग्जाम का बहिष्कार, प्राचार्य बोले- छात्रों को दोबारा मौका नहीं मिलेगा

PMCH में 200 MBBS छात्रों ने छोड़ी आंतरिक मूल्यांकन परीक्षा:‘सामूहिक सजा’ के विरोध में एग्जाम का बहिष्कार, प्राचार्य बोले- छात्रों को दोबारा मौका नहीं मिलेगा

बिहार के सबसे बड़े सरकारी मेडिकल संस्थानों में शामिल PMCH में बुधवार को आंतरिक मूल्यांकन परीक्षा को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया। 2022 बैच के करीब 200 एमबीबीएस छात्रों ने कॉलेज प्रशासन के फैसले के विरोध में सामूहिक रूप से परीक्षा का बहिष्कार कर दिया। छात्रों के इस कदम से कॉलेज प्रशासन भी हैरान रह गया। औषधि विभाग की आंतरिक मूल्यांकन परीक्षा दोपहर 1 बजे से 2 बजे तक आयोजित की जानी थी। निर्धारित समय पर परीक्षा शुरू हुई, लेकिन एक भी छात्र परीक्षा हॉल नहीं पहुंचा। पूरा एग्जाम हॉल खाली रहा, जबकि ड्यूटी पर तैनात शिक्षक छात्रों का इंतजार करते रहे। पूरे बैच को दी गई सामूहिक सजा- छात्र छात्रों का आरोप है कि कुछ सहपाठियों पर लगे कथित कदाचार के आरोप की सजा पूरे बैच को दी गई है। इसी के विरोध में छात्रों ने परीक्षा का बहिष्कार किया। वहीं, कॉलेज प्रशासन का कहना है कि परीक्षा की निष्पक्षता और शुचिता बनाए रखना संस्थान की प्राथमिक जिम्मेदारी है। कदाचारमुक्त परीक्षा सुनिश्चित करने के लिए विशेष तैयारी की गई थी। कई चिकित्सक शिक्षकों की ड्यूटी लगाई गई थी और निगरानी के लिए उड़नदस्ता टीम भी तैनात की गई थी। परीक्षा कक्ष की निगरानी के लिए डॉ. राजन कुमार, डॉ. डीके सिन्हा, डॉ. संजय कुमार, डॉ. राकेश कुमार, डॉ. पीएन झा और डॉ. रवि कुमार रंजन को जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इस घटना के बाद पूरे कॉलेज परिसर में दिनभर इस मुद्दे की चर्चा होती रही। 11 मई की परीक्षा रद्द होने के बाद भड़का गुस्सा विवाद की शुरुआत 11 मई को आयोजित पहली आंतरिक मूल्यांकन परीक्षा के बाद हुई। उस दिन औषधि विभाग के छात्रों की लिखित परीक्षा ली गई थी, जबकि 12 मई को प्रैक्टिकल और वाइवा कराया गया था। परीक्षा खत्म होने के बाद कॉलेज प्रशासन को कथित रूप से कदाचार की शिकायत मिली। मामले को गंभीर मानते हुए प्राचार्य डॉ. नरेंद्र प्रताप ने 16 मई को पूरी परीक्षा रद्द करने का आदेश जारी कर दिया। इसके साथ ही दोबारा परीक्षा कराने के लिए 20 और 21 मई की नई तारीख तय की गई। 20 मई को लिखित परीक्षा और 21 मई को प्रैक्टिकल एवं वाइवा होना था। लेकिन प्रशासन के इसी फैसले ने छात्रों में नाराजगी पैदा कर दी। छात्रों का कहना है कि यदि कुछ छात्रों पर अनियमितता का आरोप था तो केवल उन्हीं पर कार्रवाई होनी चाहिए थी। पूरे बैच की परीक्षा रद्द करना गलत और अन्यायपूर्ण फैसला है। छात्रों का आरोप- मेहनत करने वालों के साथ हुआ अन्याय छात्रों का कहना है कि उन्होंने पूरी ईमानदारी और मेहनत के साथ परीक्षा दी थी। ऐसे में बिना स्पष्ट जांच और दोषियों की पहचान किए पूरे बैच की परीक्षा रद्द कर देना सही नहीं है। कुछ छात्रों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि, प्रशासन के फैसले से उन छात्रों का मनोबल टूट गया है, जिन्होंने निष्पक्ष तरीके से परीक्षा दी थी। मेडिकल शिक्षा पहले ही काफी दबाव वाली होती है और ऐसे फैसलों से मानसिक तनाव और बढ़ जाता है।
छात्रों का यह भी आरोप है कि कॉलेज प्रशासन ने छात्रों की बात सुने बिना एकतरफा निर्णय लिया। इसी विरोध में छात्रों ने सामूहिक रूप से दोबारा आयोजित परीक्षा में शामिल नहीं होने का फैसला किया। प्रशासन सख्त, प्राचार्य ने साफ कहा- अब नई तिथि नहीं कॉलेज प्रशासन अपने फैसले पर पूरी तरह अडिग नजर आ रहा है। प्राचार्य डॉ. नरेंद्र प्रताप ने स्पष्ट कर दिया है कि परीक्षा बहिष्कार छात्रों का निजी निर्णय है और अब इस परीक्षा के लिए फिर से कोई नई तिथि जारी नहीं की जाएगी। प्राचार्य ने यह भी संकेत दिया कि परीक्षा में अनुपस्थित रहने वाले छात्रों को आगे शैक्षणिक स्तर पर कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। अब छात्रों के सामने बढ़ा अकादमिक दबाव एमबीबीएस पाठ्यक्रम में आंतरिक मूल्यांकन परीक्षा का विशेष महत्व होता है। प्रत्येक बैच के छात्रों को तीन आंतरिक मूल्यांकन परीक्षाएं देनी अनिवार्य होती हैं। इन्हीं परीक्षाओं के अंकों के आधार पर छात्रों को सेंटअप परीक्षा में शामिल होने की अनुमति मिलती है। यदि कोई छात्र निर्धारित मूल्यांकन परीक्षा में शामिल नहीं होता है तो आगे विश्वविद्यालय परीक्षा में बैठने में भी दिक्कत हो सकती है। सूत्रों के मुताबिक, दूसरी आंतरिक मूल्यांकन परीक्षा अगस्त में प्रस्तावित है। ऐसे में पहली परीक्षा छोड़ने वाले छात्रों पर अब अतिरिक्त दबाव बढ़ गया है। यदि आगे की परीक्षाओं में प्रदर्शन प्रभावित हुआ तो कई छात्रों का शैक्षणिक सत्र संकट में पड़ सकता है। गतिरोध की स्थिति में पहुंचा मामला परीक्षा बहिष्कार के बाद अब मामला पूरी तरह गतिरोध की स्थिति में पहुंच गया है। एक तरफ छात्र सामूहिक सजा का विरोध कर रहे हैं तो दूसरी ओर कॉलेज प्रशासन परीक्षा की शुचिता और अनुशासन का हवाला देकर पीछे हटने को तैयार नहीं। फिलहाल, दोनों पक्षों के बीच किसी समझौते या बातचीत की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। लेकिन जिस तरह यह विवाद बढ़ा है, उससे आने वाले दिनों में PMCH का शैक्षणिक माहौल और गर्म होने की आशंका जताई जा रही हैं। बिहार के सबसे बड़े सरकारी मेडिकल संस्थानों में शामिल PMCH में बुधवार को आंतरिक मूल्यांकन परीक्षा को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया। 2022 बैच के करीब 200 एमबीबीएस छात्रों ने कॉलेज प्रशासन के फैसले के विरोध में सामूहिक रूप से परीक्षा का बहिष्कार कर दिया। छात्रों के इस कदम से कॉलेज प्रशासन भी हैरान रह गया। औषधि विभाग की आंतरिक मूल्यांकन परीक्षा दोपहर 1 बजे से 2 बजे तक आयोजित की जानी थी। निर्धारित समय पर परीक्षा शुरू हुई, लेकिन एक भी छात्र परीक्षा हॉल नहीं पहुंचा। पूरा एग्जाम हॉल खाली रहा, जबकि ड्यूटी पर तैनात शिक्षक छात्रों का इंतजार करते रहे। पूरे बैच को दी गई सामूहिक सजा- छात्र छात्रों का आरोप है कि कुछ सहपाठियों पर लगे कथित कदाचार के आरोप की सजा पूरे बैच को दी गई है। इसी के विरोध में छात्रों ने परीक्षा का बहिष्कार किया। वहीं, कॉलेज प्रशासन का कहना है कि परीक्षा की निष्पक्षता और शुचिता बनाए रखना संस्थान की प्राथमिक जिम्मेदारी है। कदाचारमुक्त परीक्षा सुनिश्चित करने के लिए विशेष तैयारी की गई थी। कई चिकित्सक शिक्षकों की ड्यूटी लगाई गई थी और निगरानी के लिए उड़नदस्ता टीम भी तैनात की गई थी। परीक्षा कक्ष की निगरानी के लिए डॉ. राजन कुमार, डॉ. डीके सिन्हा, डॉ. संजय कुमार, डॉ. राकेश कुमार, डॉ. पीएन झा और डॉ. रवि कुमार रंजन को जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इस घटना के बाद पूरे कॉलेज परिसर में दिनभर इस मुद्दे की चर्चा होती रही। 11 मई की परीक्षा रद्द होने के बाद भड़का गुस्सा विवाद की शुरुआत 11 मई को आयोजित पहली आंतरिक मूल्यांकन परीक्षा के बाद हुई। उस दिन औषधि विभाग के छात्रों की लिखित परीक्षा ली गई थी, जबकि 12 मई को प्रैक्टिकल और वाइवा कराया गया था। परीक्षा खत्म होने के बाद कॉलेज प्रशासन को कथित रूप से कदाचार की शिकायत मिली। मामले को गंभीर मानते हुए प्राचार्य डॉ. नरेंद्र प्रताप ने 16 मई को पूरी परीक्षा रद्द करने का आदेश जारी कर दिया। इसके साथ ही दोबारा परीक्षा कराने के लिए 20 और 21 मई की नई तारीख तय की गई। 20 मई को लिखित परीक्षा और 21 मई को प्रैक्टिकल एवं वाइवा होना था। लेकिन प्रशासन के इसी फैसले ने छात्रों में नाराजगी पैदा कर दी। छात्रों का कहना है कि यदि कुछ छात्रों पर अनियमितता का आरोप था तो केवल उन्हीं पर कार्रवाई होनी चाहिए थी। पूरे बैच की परीक्षा रद्द करना गलत और अन्यायपूर्ण फैसला है। छात्रों का आरोप- मेहनत करने वालों के साथ हुआ अन्याय छात्रों का कहना है कि उन्होंने पूरी ईमानदारी और मेहनत के साथ परीक्षा दी थी। ऐसे में बिना स्पष्ट जांच और दोषियों की पहचान किए पूरे बैच की परीक्षा रद्द कर देना सही नहीं है। कुछ छात्रों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि, प्रशासन के फैसले से उन छात्रों का मनोबल टूट गया है, जिन्होंने निष्पक्ष तरीके से परीक्षा दी थी। मेडिकल शिक्षा पहले ही काफी दबाव वाली होती है और ऐसे फैसलों से मानसिक तनाव और बढ़ जाता है।
छात्रों का यह भी आरोप है कि कॉलेज प्रशासन ने छात्रों की बात सुने बिना एकतरफा निर्णय लिया। इसी विरोध में छात्रों ने सामूहिक रूप से दोबारा आयोजित परीक्षा में शामिल नहीं होने का फैसला किया। प्रशासन सख्त, प्राचार्य ने साफ कहा- अब नई तिथि नहीं कॉलेज प्रशासन अपने फैसले पर पूरी तरह अडिग नजर आ रहा है। प्राचार्य डॉ. नरेंद्र प्रताप ने स्पष्ट कर दिया है कि परीक्षा बहिष्कार छात्रों का निजी निर्णय है और अब इस परीक्षा के लिए फिर से कोई नई तिथि जारी नहीं की जाएगी। प्राचार्य ने यह भी संकेत दिया कि परीक्षा में अनुपस्थित रहने वाले छात्रों को आगे शैक्षणिक स्तर पर कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। अब छात्रों के सामने बढ़ा अकादमिक दबाव एमबीबीएस पाठ्यक्रम में आंतरिक मूल्यांकन परीक्षा का विशेष महत्व होता है। प्रत्येक बैच के छात्रों को तीन आंतरिक मूल्यांकन परीक्षाएं देनी अनिवार्य होती हैं। इन्हीं परीक्षाओं के अंकों के आधार पर छात्रों को सेंटअप परीक्षा में शामिल होने की अनुमति मिलती है। यदि कोई छात्र निर्धारित मूल्यांकन परीक्षा में शामिल नहीं होता है तो आगे विश्वविद्यालय परीक्षा में बैठने में भी दिक्कत हो सकती है। सूत्रों के मुताबिक, दूसरी आंतरिक मूल्यांकन परीक्षा अगस्त में प्रस्तावित है। ऐसे में पहली परीक्षा छोड़ने वाले छात्रों पर अब अतिरिक्त दबाव बढ़ गया है। यदि आगे की परीक्षाओं में प्रदर्शन प्रभावित हुआ तो कई छात्रों का शैक्षणिक सत्र संकट में पड़ सकता है। गतिरोध की स्थिति में पहुंचा मामला परीक्षा बहिष्कार के बाद अब मामला पूरी तरह गतिरोध की स्थिति में पहुंच गया है। एक तरफ छात्र सामूहिक सजा का विरोध कर रहे हैं तो दूसरी ओर कॉलेज प्रशासन परीक्षा की शुचिता और अनुशासन का हवाला देकर पीछे हटने को तैयार नहीं। फिलहाल, दोनों पक्षों के बीच किसी समझौते या बातचीत की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। लेकिन जिस तरह यह विवाद बढ़ा है, उससे आने वाले दिनों में PMCH का शैक्षणिक माहौल और गर्म होने की आशंका जताई जा रही हैं।  

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *