बसपा प्रमुख मायावती से पर्दे के पीछे गठबंधन की कोशिश कांग्रेस को भारी पड़ गई। 19 मई (मंगलवार) को कांग्रेस अनुसूचित जाति (SC) विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेंद्र पाल गौतम, सांसद तनुज पुनिया समेत अन्य नेताओं को मायावती ने गेट से लौटा दिया। बसपा प्रमुख के आवास से अचानक खाली हाथ लौटना यूपी की सियासत में तूफान खड़ा कर गया। खुद कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने अपने नेताओं को खरी-खोटी सुनाई। कहा, “राजनीति में मेल-मुलाकात का मैं पक्षधर हूं, लेकिन इस तरह बिना अपॉइंटमेंट के मिलने पहुंचना गलत था।” क्या कांग्रेस सपा को छोड़कर यूपी में बसपा से गठबंधन की संभावना तलाश रही? सपा प्रमुख अखिलेश यादव के ‘जीत की गारंटी वाली सीट’ देने के फॉर्मूले पर इमरान मसूद ने बंगाल का उदाहरण क्यों दिया? पढ़िए पूरी रिपोर्ट… कांग्रेस नेता मोबाइल नंबर लिखवाकर लौट गए लखनऊ में कांग्रेस मुख्यालय पर 19 मई को कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग की बैठक हुई थी। इसके बाद विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेंद्र पाल गौतम, बाराबंकी से कांग्रेस सांसद तनुज पुनिया समेत अन्य नेता अचानक मायावती के घर पहुंच गए। गेट पर सिक्योरिटी गार्ड से बसपा के राष्ट्रीय महासचिव मेवालाल गौतम को फोन लगवाया। मायावती से मिलने का समय मांगा। सूत्रों की मानें, तो करीब 10 मिनट तक कांग्रेस नेता गेट पर इंतजार करते रहे। फिर अंदर से मैसेज आया कि बहन जी बिजी हैं, अभी मीटिंग नहीं हो पाएगी। इसके बाद कांग्रेस नेता नाम और मोबाइल नंबर गेट पर लिखवाकर लौट गए। लेकिन, कांग्रेस नेताओं की इस मुलाकात की कोशिश की तस्वीरें वायरल हो गईं। इसके बाद यूपी की सियासत में खलबली मची गई। इस मुलाकात के सियासी मायने निकाले जाने लगे। खबर फैली कि कांग्रेस यूपी विधानसभा चुनाव में सपा को छोड़कर बसपा के साथ गठबंधन की संभावनाएं तलाश रही है। 19 मई को राहुल गांधी भी रायबरेली में थे। ऐसे में सीधे दावा किया गया कि ये नेता उनका कोई संदेश लेकर मायावती से मिलना चाहते थे। दोनों नेताओं का बैकग्राउंड भी बसपा से जुड़ा है मायावती से मुलाकात करने पहुंचे कांग्रेस नेताओं में शामिल राजेंद्र प्रसाद गौतम पुराने बसपाई रहे हैं। बसपा छोड़कर वे आम आदमी पार्टी और फिर कांग्रेस में पहुंचे हैं। बाराबंकी सांसद तनुज पुनिया कांग्रेस के सीनियर नेता और सांसद रहे पीएल पुनिया के बेटे हैं। पीएल पुनिया मायावती के सीएम काल में मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव रहे थे। तब यूपी के नौकरशाहों में उनकी तूती बोलती थी। यही वजह है कि राजनीतिक विश्लेषक इसे सामान्य मुलाकात नहीं मान रहे। वे इसे गठबंधन की सीक्रेट डिप्लोमेसी का हिस्सा मान रहे हैं। मायावती के इनकार ने जरूर कांग्रेस की रणनीति पर सवालिया निशान लगा दिया है। सियासी गलियारों में चर्चा है कि बसपा प्रमुख राहुल गांधी या प्रियंका गांधी के लेवल से कम के किसी नेता के जरिए गठबंधन की बात नहीं मानेंगी। अचानक बिना बुलाए इस तरह कांग्रेस नेताओं ने पहुंचकर मुलाकात का जो प्रयास किया, वो शायद मायावती को पसंद नहीं आया। कांग्रेस यूपी में बसपा से गठबंधन की संभावनाएं क्यों तलाश रही? सीनियर पत्रकार सैय्यद कासिम कहते हैं- कांग्रेस को लगता है कि सपा के साथ गठबंधन में उसे मनचाही सीटें नहीं मिलेंगी। खुद सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने 19 मई को एक कार्यक्रम में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर बयान दिया था। कहा था कि वह लोकसभा चुनाव के फॉर्मूले पर ही गठबंधन साथी को सीटें देंगे। इसमें सीट नहीं, जीत की गारंटी ही फॉर्मूला होगा। जबकि कांग्रेस यूपी में खुद को मजबूत करना चाहती है। कांग्रेस कम से कम हर जिले में एक सीट के साथ 125 विधानसभा सीटें चाहती है। सपा यूपी में खुद 350 के लगभग सीटों पर लड़ना चाहती है। उसे लगता है कि इससे कम सीटों पर वह लड़ी, तो भाजपा को हराना मुश्किल हो जाएगा। सपा बिहार, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, असम का उदाहरण भी गिनाती है। इमरान मसूद ने बंगाल रिजल्ट की याद दिलाई 20 मई को कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने अखिलेश के बयान पर रिएक्शन दिया। कहा- मैं तो कहूंगा कि सीट नहीं तो जीत नहीं। जब सीट ही नहीं होगी तो जीत कहां से होगी? ये सबको सोचना चाहिए। खासकर बंगाल के रिजल्ट से ऐसे लोगों को सबक लेना चाहिए। बंगाल के अंदर अगर रणनीतिक तौर पर लड़ा गया होता तो चुनाव इंडिया गठबंधन ही जीतता। इलेक्शन कमीशन ने जो किया, वो अलग बात है। इस तरह की गलती यूपी में दोहराने से बचना होगा। हालांकि, उन्होंने इस दौरान सपा का नाम नहीं लिया। बसपा के रुख के बाद कांग्रेस को डैमेज कंट्रोल करना पड़ा मायावती के घर से खाली हाथ लौटने के बाद कांग्रेस डैमेज कंट्रोल मोड में आ गई। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने 20 मई को सफाई देते हुए कहा, “यह उन नेताओं का पर्सनल कार्यक्रम था। पार्टी की ओर से कोई ऑफिशियल आदेश नहीं दिया गया था।” अजय राय के इस बयान ने कन्फ्यूजन को और बढ़ा दिया। एक तरफ कांग्रेस बसपा से गठबंधन चाहती है, दूसरी तरफ पार्टी इसे ‘व्यक्तिगत’ बताकर पीछे हटने की कोशिश कर रही है। खुद राजेंद्र पाल गौतम ने कहा कि मायावती दलित समाज की पूर्व मुख्यमंत्री हैं। इसलिए उनका हालचाल जानने के लिए वह मुलाकात करने गए थे। तनुज पुनिया ने भी इसे “जनरल विजिट” बताया। कहा कि बहन जी हमारे समाज की सीनियर नेता हैं। उनकी उम्र 70 साल की हो चुकी है। हम उनकी तबीयत पूछने गए थे। तमिलनाडु मामले के बाद सपा प्रमुख अलर्ट हुए तमिलनाडु मामले के बाद सपा अलर्ट है। जिस तरीके से कांग्रेस 22 साल पुराना गठबंधन तोड़ते हुए रिजल्ट के तुरंत बाद TVK से जा मिली, उससे अखिलेश भी सहमत नहीं हैं। अब जैसे कांग्रेस के नेताओं ने मायावती से मिलने की कोशिश की, उससे वे और चौकन्ने हो गए होंगे। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने 20 मई को X पर एक सधा हुआ पोस्ट किया। उन्होंने कांग्रेस को यूपी में उसके कमजोर संगठन की याद भी दिला दी। मैसेज दिया कि 2024 लोकसभा चुनाव में सपा के मजबूत संगठन का फायदा कांग्रेस को मिला था, तब वह 6 सीटें जीत सकी थी। ————————— ये खबर भी पढ़ें… अखिलेश बोले-90 दिन में 69 हजार शिक्षक भर्ती पूरी करेंगे, सरकार आई तो जातीय जनगणना कराएंगे सपा मुखिया अखिलेश यादव ने बुधवार को लखनऊ में पार्टी कार्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने 69 हजार शिक्षक भर्ती में आरक्षण को लेकर मचे बवाल पर कहा कि सत्ता में आने के 90 दिन के अंदर ही भर्ती प्रक्रिया पूरी करेंगे। कैंडिडेट्स की मदद करेंगे। उन्हें न्याय दिलाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार में आते ही जातीय जनगणना करके दिखा देंगे। पूरी खबर पढें…


