Ruskin Bond Birthday: 92 साल की उम्र में भी लिखने का जुनून, जानें लेखक Ruskin Bond की Inspiring कहानी

Ruskin Bond Birthday: 92 साल की उम्र में भी लिखने का जुनून, जानें लेखक Ruskin Bond की Inspiring कहानी
प्रसिद्ध लेखक और पद्म भूषण पुरस्कार से सम्मानित रस्किन बॉन्ड आज यानी की 19 मई को अपना 92वां जन्मदिन मना रहे हैं। बाल साहित्यकार रस्किन बॉन्ड अपनी रचनाओं के लिए पद्मश्री और पद्मभूषण से नवाजे जा चुके हैं। आज भी वह मसूरी में बेहद साधारण तरीके से जीवन जीना पसंद करते हैं। वह चाहते हैं कि जब तक उनकी सांस चले तब तक वह बच्चों के लिए कहानियां लिखते रहें। तो आइए जानते हैं उनके जन्मदिन के मौके पर लेखक रस्किन बॉन्ड के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में…

जन्म और परिवार

हिमाचल प्रदेश के कसौली में 19 मई 1934 को रस्किन बॉन्ड का जन्म हुआ था। उनके पिता का नाम अब्रे बॉन्ड था, जोकि ब्रिटिश रॉयल एयरफोर्स में थे। जब वह 4 साल के थे, तो उनके माता-पिता अलग हो गए थे। जिसके बाद रस्किन की मां ने एक भारतीय से शादी कर ली थी। फिर रस्किन अपनी दादी के साथ देहरादून में रहने लगे थे। उन्होंने शिमला के बिशप कॉटन स्कूल से पढ़ाई पूरी की और फिर लंदन चले गए।

लेखन की शुरूआत

रस्किन बॉन्ड ने अपने लेखन की शुरूआत लंदन में ही कर दी थी। महज 17 साल की उम्र में उन्होंने अपना पहला उपन्यास ‘रूम ऑन द रूफ’ लिखा था। इस उपन्यास के लिए उनको प्रतिष्ठित जॉन लेवेनिन राइस अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था। लेकिन लंदन में उनका मन नहीं लगा तो वह भारत लौट आए और यहीं बस गए।

बच्चों के दादाजी

अब तक रस्किन बॉन्ड 500 से ज्यादा उपन्यास, कहानियां, संस्मरण और कविताएं लिख चुके हैं। उनकी अधिकतर रचनाएं बच्चों पर ही आधारित हैं। बच्चों के लिए लिखी गई रस्किन की कहानियों में ‘अंधेरे में एक चेहरा’, ‘एक नन्हा दोस्त’, ‘बुद्धिमान काजी’, ‘झुकी हुई कमरवाला भिखारी’, ‘चालीस भाइयों की पहाड़ी’, ‘पतंगवाला’ और ‘अल्लाह की बुद्धिमानी’ आदि काफी लोकप्रिय हैं। अपनी इन्हीं कहानियों के कारण रस्किन बॉन्ड बच्चों के बीच कहानी सुनाने वाले दादाजी के नाम से फेमस हैं।

सम्मान

साल 1957 में वह इंग्लैंड में जॉन लेवन राइस मेमोरियल पुरस्कार से नवाजे गए। फिर साल 1992 में लघु कहानियों के संकलन ‘आर ट्रीज स्टिल ग्रो इन देहरा’ के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला है। साल 1999 में उनको बाल साहित्य में योगदान के लिए पद्मश्री और साल 2014 में पद्मविभूषण से नवाजा गया। साल 2012 में रस्किन बॉन्ड को लाइफ टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड एवं गढ़वाल विश्वविद्यालय द्वारा रस्किन को पीएचडी की उपाधि दी गई।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *