इज़रायल (Israel) और लेबनान (Lebanon) में सिर्फ नाममात्र का ही सीज़फायर चल रहा है। 16 अप्रैल को पहली बार दोनों देशों में 10 दिन के सीज़फायर पर सहमति बनी थी, लेकिन इसका कोई फायदा नहीं हुआ और इज़रायल ने इस दौरान भी हमले नहीं रोके। इसकी डेडलाइन खत्म होने के बाद सीज़फायर को 3 हफ्ते के लिए बढ़ा दिया गया था, लेकिन इज़रायल के हमले जारी रहे। 15 मई को एक बार फिर दोनों देशों के बीच 45 दिन के सीज़फायर की सहमति बनी, लेकिन इसके बावजूद इज़रायली हमले रुकने का नाम नहीं ले रहे। इज़रायली हमलों की वजह से लेबनान में हाहाकार मचा हुआ है।
मरने वालों का आंकड़ा 3,000 पार
इज़रायल ने 28 फरवरी को ईरान (Iran) पर हमला किया था और उसके बाद 2 मार्च को लेबनान पर हमले तेज़ कर दिए। 2 मार्च से अब तक इज़रायली हमलों की वजह से लेबनान में मरने वालों का आंकड़ा 3,000 पार कर गया है। जानकारी के अनुसार सोमवार तक मृतकों की संख्या 3,020 पहुंच गई।
घायलों की संख्या भी बढ़ रही
इज़रायली हमलों की वजह से घायलों की संख्या भी बढ़ रही है। 2 मार्च से अब तक इज़रायली हमलों में 9,200 से ज़्यादा लोग घायल हो चुके हैं और इस आंकड़े में हर दिन इजाफा हो रहा है।
सैन्य कार्रवाई रोकने का नहीं है कोई विचार?
अमेरिका (United States of America) के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के प्रयासों की वजह से भले ही इज़रायल और लेबनान में सीज़फायर हो गया है, लेकिन इसका असर बिल्कुल भी नहीं दिख रहा है। लेबनान की जनता भी इस सच से वाकिफ है। वहीं इज़रायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू (Benjamin Netanyahu) साफ कर चुके हैं कि अपने निर्धारित लक्ष्यों की प्राप्ति से पहले वह लेबनान में सैन्य कार्रवाई नहीं रोकेंगे।
हिज़बुल्लाह भी कर रहा है जवाबी हमले
इज़रायल को जवाब देने के लिए हिज़बुल्लाह (Hezbollah) भी पूरी तरह से एक्टिव है और क्षेत्र में इज़रायली सैनिकों पर हमला करने के साथ ही नॉर्थ इज़रायल में समय-समय पर ड्रोन अटैक्स कर रहा है। हिज़बुल्लाह ने बयान जारी कर कहा कि उसके लड़ाकों ने रविवार को एक इज़रायली सैन्य वाहन पर आत्मघाती ड्रोन से हमला किया और बयादा शहर में इज़रायली सैनिकों की एक टुकड़ी पर हमला किया। हालांकि इज़रायली सेना के लगातार हमलों के आगे हिज़बुल्लाह को कुछ खास कामयाबी नहीं मिल रही।


