हरियाणा सरकार ने राज्य की बैंकिंग नीति और अनधिकृत फंड ट्रांसफर (UFT) पर गठित एक उच्च स्तरीय समिति (HLC) की सिफारिशों को लागू करते हुए सरकारी धन के रखरखाव और निवेश को लेकर कड़े निर्देश जारी किए हैं। वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव की ओर से जारी इस आदेश के तहत कई बड़े बैंकों के दर्जे में बदलाव किया गया है और निवेश नियमों को बेहद सख्त बना दिया गया है।
इस फैसले का सीधा असर राज्य के सभी प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों, प्रबंध निदेशकों, बोर्ड-निगमों के प्रमुखों, मंडल आयुक्तों, उपायुक्तों और विश्वविद्यालयों के कुलसचिवों पर पड़ेगा, जिन्हें इन नियमों का कड़ाई से पालन करने को कहा गया है। 1. तीन बैंकों की एम्पैनलमेंट रद्द सरकार ने तीन प्रमुख बैंकों को सरकारी बिजनेस और जमा निवेश (DI) के लिए दी गई एम्पैनलमेंट को तत्काल प्रभाव से वापस ले लिया है। फेडरल बैंक (FB), आईडीबीआई बैंक (IDBI Bank), डीसीबी बैंक (DCB Bank), इन बैंकों को पहले दी गई एम्पैनलमेंट और जमा निवेश सीमा बढ़ाने के सभी पुराने फैसलों को रद्द कर दिया गया है। इसके अलावा, हाल ही में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक, एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक को भी डी-एम्पैनल (सूची से बाहर) करने के पिछले आदेशों का कड़ाई से पालन करने के निर्देश दोहराए गए हैं। 2. निवेश सीमा (IL) पर कैपिंग अब सरकारी विभागों के लिए नए निवेश नियमों के तहत कुछ बैंकों में अधिकतम जमा राशि तय कर दी गई है। बंधन बैंक (BB), कोई भी सरकारी विभाग इस बैंक में 50 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश नहीं रख सकेगा। स्मॉल फाइनेंस बैंक: इक्विटास, जना, उज्जीवन और उत्कर्ष स्मॉल फाइनेंस बैंक में से किसी भी एक बैंक में कोई भी विभाग अधिकतम 25 करोड़ रुपये तक ही जमा रख सकता है।
वर्तमान में कुल 24 बैंक (12 पब्लिक सेक्टर, 6 प्राइवेट सेक्टर, 4 स्मॉल फाइनेंस बैंक, 1 क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक और 1 सहकारी बैंक) हरियाणा सरकार के साथ एम्पैनल हैं, जिनकी सूची जारी की गई है। 3. FD रिन्यूअल पर पूरी तरह रोक सरकारी फंड की सुरक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने एक बेहद चौंकाने वाला और महत्वपूर्ण फैसला लिया है। अब कोई भी विभाग अपनी सावधि जमा (FD) के मैच्योर (पूरा) होने पर उसी बैंक में उसका रिन्यूअल नहीं करा सकेगा। फंड मैच्योर होने पर उसे किसी अन्य एम्पैनल बैंक में ही ट्रांसफर करना होगा। आदेश में साफ कहा गया है कि भले ही दूसरा एम्पैनल बैंक मामूली रूप से कम ब्याज दर (MLIR) की पेशकश क्यों न कर रहा हो, लेकिन पैसा उसी बैंक में दोबारा नहीं रखा जाएगा। 4. निवेश के लिए अन्य कड़े दिशा-निर्देश
बचत और चालू खातों पर रोक: सभी विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि सरकारी फंड्स को सिर्फ फिक्सड डिपॉजिट (FD) या फ्लेक्सी डिपॉजिट में ही रखा जाए। नियामक आवश्यकताओं या वित्त विभाग की लिखित अनुमति के बिना पैसा सेविंग्स या करंट अकाउंट में नहीं छोड़ा जा सकता। एफडी में निवेश करने से पहले सभी एम्पैनल बैंकों से कोटेशन आमंत्रित किए जाएंगे। इसके लिए न्यूनतम 3 कार्य दिवसों का नोटिस पीरियड देना अनिवार्य होगा। वरिष्ठतम लेखा अधिकारी प्राप्त कोटेशन का एक तुलनात्मक विवरण तैयार करेंगे और अपनी सिफारिशें देंगे, जिसे कार्यालय प्रमुख (HOD) द्वारा मंजूर किया जाएगा। 5. ट्रेजरी से फंड निकालने को लेकर हिदायत
अक्सर देखा जाता है कि विभाग ट्रेजरी से पैसा निकालकर बैंकों में ‘पार्क’ (जमा) कर देते हैं। इस पर रोक लगाते हुए सरकार ने कहा है कि विभाग ट्रेजरी से पैसा बिल्कुल आखिरी समय में ही निकालें जब वास्तव में भुगतान या खर्च किया जाना हो। समय से पहले पैसा निकालकर बैंकों में रखने की आदत से पूरी तरह बचने की सलाह दी गई है।


