NEET छात्रा रेप और संदिग्ध मौत मामले में पांच महीने बीत जाने के बाद भी जांच किसी ठोस नतीजे तक नहीं पहुंच पाई है। इस बीच शंभू गर्ल्स हॉस्टल मामले में पटना की विशेष POCSO कोर्ट ने आरोपी मनीष कुमार रंजन को फिलहाल कोई राहत देने से इनकार कर दिया है। आरोपी ने कोर्ट से बंद पड़े हॉस्टल और घर को खोलने की मांग की थी, लेकिन अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए फैसला टाल दिया। आरोपी ने घर खोलने की लगाई गुहार मनीष रंजन ने कोर्ट में कहा कि हॉस्टल की पहली से चौथी मंजिल किराये पर चलती थी, जबकि पांचवीं मंजिल उनका निजी आवास था। उनका आरोप है कि गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने पूरे भवन में ताला लगा दिया और उनके परिवार को बाहर निकाल दिया। इसी वजह से उन्होंने कोर्ट से परिवार को घर में रहने की अनुमति देने की मांग की थी। पीड़ित पक्ष और पुलिस ने किया विरोध पीड़ित पक्ष और पुलिस ने आरोपी की मांग का विरोध करते हुए कोर्ट में कहा कि पूरी बिल्डिंग इस मामले का अहम “क्राइम सीन” है। अगर आरोपी या उनके परिवार को वहां जाने की इजाजत दी गई तो सबूतों से छेड़छाड़ हो सकती है और जांच प्रभावित हो सकती है। बिहार पुलिस और CBI के बीच जिम्मेदारी को लेकर उलझन मामले की जांच पहले बिहार पुलिस कर रही थी, जिसे बाद में CBI को सौंप दिया गया। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पूछा कि आखिर बिल्डिंग को किस कानूनी आदेश के तहत अब तक बंद रखा गया है, लेकिन बिहार पुलिस और CBI दोनों स्पष्ट जवाब नहीं दे सके। दोनों एजेंसियां एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालती नजर आईं। दस्तावेज नहीं दिखा पाए आरोपी कोर्ट ने आरोपी से पांचवीं मंजिल पर मालिकाना हक से जुड़े कागजात मांगे थे। हालांकि आरोपी पक्ष कोई पुख्ता दस्तावेज पेश नहीं कर पाया। इसके बाद अदालत ने कहा कि बिना स्पष्ट दस्तावेज और कानूनी स्थिति सामने आए कोई राहत नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने मामले को बताया बेहद गंभीर स्पेशल POCSO जज राजीव रंजन रमण ने कहा कि मामला यौन उत्पीड़न और संदिग्ध मौत जैसे गंभीर आरोपों से जुड़ा है। ऐसे मामलों में जांच और सबूतों की सुरक्षा सबसे जरूरी है। इसलिए जल्दबाजी में कोई आदेश नहीं दिया जा सकता। 3 मई की सुनवाई में CBI पर फूटा था कोर्ट का गुस्सा इससे पहले 3 मई को हुई सुनवाई के दौरान विशेष POCSO कोर्ट ने CBI की धीमी जांच प्रक्रिया पर कड़ी नाराजगी जताई थी। अदालत ने साफ कहा था कि बच्चों से जुड़े अपराधों की जांच में देरी किसी भी हाल में स्वीकार नहीं की जाएगी। पीड़ित परिवार को मिला अंतरिम मुआवजा कोर्ट ने पीड़िता के परिवार को 2.5 लाख रुपये का अंतरिम मुआवजा देने का आदेश भी दिया था। सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि केस CBI को ट्रांसफर हुए 110 दिन से ज्यादा हो चुके हैं, लेकिन अब तक जांच में कोई बड़ी प्रगति नहीं हुई। इसे अदालत ने बेहद गंभीर माना और एजेंसी की कार्यशैली पर सवाल उठाए थे। NEET छात्रा रेप और संदिग्ध मौत मामले में पांच महीने बीत जाने के बाद भी जांच किसी ठोस नतीजे तक नहीं पहुंच पाई है। इस बीच शंभू गर्ल्स हॉस्टल मामले में पटना की विशेष POCSO कोर्ट ने आरोपी मनीष कुमार रंजन को फिलहाल कोई राहत देने से इनकार कर दिया है। आरोपी ने कोर्ट से बंद पड़े हॉस्टल और घर को खोलने की मांग की थी, लेकिन अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए फैसला टाल दिया। आरोपी ने घर खोलने की लगाई गुहार मनीष रंजन ने कोर्ट में कहा कि हॉस्टल की पहली से चौथी मंजिल किराये पर चलती थी, जबकि पांचवीं मंजिल उनका निजी आवास था। उनका आरोप है कि गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने पूरे भवन में ताला लगा दिया और उनके परिवार को बाहर निकाल दिया। इसी वजह से उन्होंने कोर्ट से परिवार को घर में रहने की अनुमति देने की मांग की थी। पीड़ित पक्ष और पुलिस ने किया विरोध पीड़ित पक्ष और पुलिस ने आरोपी की मांग का विरोध करते हुए कोर्ट में कहा कि पूरी बिल्डिंग इस मामले का अहम “क्राइम सीन” है। अगर आरोपी या उनके परिवार को वहां जाने की इजाजत दी गई तो सबूतों से छेड़छाड़ हो सकती है और जांच प्रभावित हो सकती है। बिहार पुलिस और CBI के बीच जिम्मेदारी को लेकर उलझन मामले की जांच पहले बिहार पुलिस कर रही थी, जिसे बाद में CBI को सौंप दिया गया। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पूछा कि आखिर बिल्डिंग को किस कानूनी आदेश के तहत अब तक बंद रखा गया है, लेकिन बिहार पुलिस और CBI दोनों स्पष्ट जवाब नहीं दे सके। दोनों एजेंसियां एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालती नजर आईं। दस्तावेज नहीं दिखा पाए आरोपी कोर्ट ने आरोपी से पांचवीं मंजिल पर मालिकाना हक से जुड़े कागजात मांगे थे। हालांकि आरोपी पक्ष कोई पुख्ता दस्तावेज पेश नहीं कर पाया। इसके बाद अदालत ने कहा कि बिना स्पष्ट दस्तावेज और कानूनी स्थिति सामने आए कोई राहत नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने मामले को बताया बेहद गंभीर स्पेशल POCSO जज राजीव रंजन रमण ने कहा कि मामला यौन उत्पीड़न और संदिग्ध मौत जैसे गंभीर आरोपों से जुड़ा है। ऐसे मामलों में जांच और सबूतों की सुरक्षा सबसे जरूरी है। इसलिए जल्दबाजी में कोई आदेश नहीं दिया जा सकता। 3 मई की सुनवाई में CBI पर फूटा था कोर्ट का गुस्सा इससे पहले 3 मई को हुई सुनवाई के दौरान विशेष POCSO कोर्ट ने CBI की धीमी जांच प्रक्रिया पर कड़ी नाराजगी जताई थी। अदालत ने साफ कहा था कि बच्चों से जुड़े अपराधों की जांच में देरी किसी भी हाल में स्वीकार नहीं की जाएगी। पीड़ित परिवार को मिला अंतरिम मुआवजा कोर्ट ने पीड़िता के परिवार को 2.5 लाख रुपये का अंतरिम मुआवजा देने का आदेश भी दिया था। सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि केस CBI को ट्रांसफर हुए 110 दिन से ज्यादा हो चुके हैं, लेकिन अब तक जांच में कोई बड़ी प्रगति नहीं हुई। इसे अदालत ने बेहद गंभीर माना और एजेंसी की कार्यशैली पर सवाल उठाए थे।


