तमिलनाडु में शराब की दुकानों पर CM Vijay का बड़ा फैसला, Gen Z वोटर्स और महिलाओं की सुरक्षा का रखा ध्यान

तमिलनाडु में शराब की दुकानों पर CM Vijay का बड़ा फैसला, Gen Z वोटर्स और महिलाओं की सुरक्षा का रखा ध्यान

TASMAC Shops Closed List: तमिलनाडु में शराब को लेकर एक बार फिर बहस सुर्खियों में आ गई है। सीएम सी जोसेफ विजय की सरकार ने राज्यभर में स्कूल, कॉलेज, मंदिर और बस स्टैंड के पास चल रही 717 TASMAC दुकानों को बंद करने का फैसला लिया है। बता दें, सरकार के इस कदम को कुछ लोग सामाजिक सुधार की दिशा में बड़ा फैसला मान रहे हैं, जबकि कई लोग इसे राज्य में फैल चुकी ड्रिंकिंग कल्चर पर सीधा हमला बता रहे हैं।

शराब की बिक्री और वितरण को कंट्रोल करती है

TASMAC यानी तमिलनाडु स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन राज्य सरकार के अधीन काम करने वाली संस्था है, जो तमिलनाडु में शराब की बिक्री और वितरण को कंट्रोल करती है। इसे पूरे राज्य में इसकी हजारों दुकानें मौजूद हैं। खबरों के मुताबिक, बंद की जाने वाली 717 दुकानों में 276 धार्मिक स्थलों के पास, 186 शैक्षणिक संस्थानों के आसपास और 255 बस टर्मिनल के नजदीक मौजूद थीं।

इतना ही नहीं, इस पर सरकार का कहना है कि इस फैसले का उद्देश्य युवाओं और आम लोगों पर शराब के नकारात्मक प्रभाव को कम करना है। इसी के साथ विजय सरकार ने राज्य में शराब पीने की न्यूनतम कानूनी उम्र भी बढ़ाकर 21 साल कर दी है, लेकिन अब TASMAC दुकानों को ग्राहकों की उम्र की जांच के लिए पहचान पत्र देखना जरूरी होगा और नाबालिगों को शराब बेचने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।

शराब केवल एक सामाजिक आदत नहीं है

तमिलनाडु में शराब केवल एक सामाजिक आदत नहीं बल्कि लंबे समय से राजनीतिक और सांस्कृतिक चर्चा का हिस्सा भी रही है। बता दें, फिल्मों, राजनीतिक सभाओं और आम जीवन में शराब की मौजूदगी हमेशा चर्चा में रहती है और कई सामाजिक संगठनों का मानना है कि TASMAC दुकानों की संख्या और उनकी लोकेशन समाज पर गलत असर डालती है।

शराब को फिल्म ‘माचो’ और स्टाइलिश दिखाकर बढ़ावा दिया है

तमिल सिनेमा ने दशकों से शराब को फिल्म ‘माचो’ और स्टाइलिश दिखाकर बढ़ावा दिया है। चाहे वो 1985 में ‘पडिक्कादवन’ में रजनीकांत का टास्माक दुकान में घुसकर विलेन को पीटना हो, या अजीत कुमार का प्रसिद्ध गाना “मछी ओपन द बॉटल” हो। बता दें, खुद विजय ने 2021 की फिल्म ‘मास्टर’ में एक शराबी प्रोफेसर का किरदार निभाया था। फिल्मों में शराब पीना एक ‘बैड बॉय’ इमेज तो देता है, लेकिन स्वैग के साथ, लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल अलग है।

महिलाओं में ये आंकड़ा महज 0.4% है

‘नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे’ (NFHS-5) के आंकड़े बताते हैं कि तमिलनाडु में लगभग 32.8% पुरुष शराब पीते हैं, जो राष्ट्रीय औसत (22.4%) से कहीं ज्यादा है। वहीं, महिलाओं में ये आंकड़ा महज 0.4% है। दरअसल, साल 2016 के एक सर्वे में के मुताबिक, 92% जनता टास्माक बंद करने के पक्ष में थी और एक दशक बाद भी ये भावना वैसी ही है।

मद्रास हाईकोर्ट की वरिष्ठ वकील रम्या बालकृष्णन कहती हैं, “बेंगलुरु के ब्रुअरीज या मुंबई के पब्स की तरह यहां सभ्य तरीके से शराब नहीं पी जाती। यहां सड़कों पर सस्ती शराब पीकर हुड़दंग मचाया जाता है और रात में महिलाएं टास्माक दुकानों के पास से गुजरने में डरती हैं।”

महिलाओं और युवा ‘जेन जी’ (Gen Z) वोटर्स

सीएम विजय का ये फैसला उनकी सबसे बड़ी ताकत यानी महिलाओं और युवा ‘जेन जी’ (Gen Z) वोटर्स के बीच जबरदस्त तरीके से गूंज रहा है। टीवीके कार्यकर्ताओं का कहना है कि लोग सुबह-सुबह स्कूल के गेट के सामने शराबियों को देखकर तंग आ चुके थे। सीएम विजय ने राजस्व के नुकसान से ऊपर उठकर जनता की सुरक्षा और एक नशामुक्त राज्य के अपने वादे को प्राथमिकता दी है, जिसे जनता का भरपूर समर्थन मिल रहा है।

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