Pakistan Railway Scam: पाकिस्तान रेलवे के मुनाफे के दावों की पोल खुल गई है। समा टीवी (Samaa TV) के मुताबिक, विभाग रिटायर्ड और मौजूदा कर्मचारियों का करीब 21 अरब रुपये का फंड दबाकर बैठा है। साल 2023 के बाद से पेंशनर्स को ग्रेच्युटी और पीएम सहायता पैकेज का पैसा नहीं मिला है। पिछले साल 93 अरब रुपये की कमाई और सरकार से 64 अरब की खैरात मिलने के बावजूद रेलवे फंड जारी नहीं कर पा रहा है, जिससे हजारों परिवार पाई-पाई को मोहताज हैं।
21 अरब का बड़ा घोटाला
दरअसल, पाकिस्तान रेलवे के वित्तीय सुधारों और मुनाफे के बड़े-बड़े दावों की हवा निकल गई है। रेलवे विभाग के रिटायर्ड और वर्तमान कर्मचारियों का करीब 21 अरब पाकिस्तानी रुपये (PKR) का एरियर और फंड दबाकर बैठा है। एक तरफ सरकार दावा कर रही है कि रेलवे पटरी पर लौट आई है, वहीं दूसरी तरफ बुजुर्ग पेंशनर्स और गरीब रेल कर्मियों के घरों में चूल्हा जलना मुश्किल हो गया है।
रेल मंत्रालय ने खोली पोल
उधर, इस कंगाली के बीच पाकिस्तान का रेल मंत्रालय और वित्त मंत्रालय आमने-सामने आ गए हैं। दोनों मंत्रालयों के बीच फंड जारी करने को लेकर भयंकर खींचतान चल रही है। रेलवे के बड़े अधिकारियों ने अपनी गर्दन बचाने के लिए सारा ठीकरा वित्त मंत्रालय पर फोड़ दिया है और इस पूरी बदहाली का कच्चा चिट्ठा नेशनल असेंबली (संसद) के सामने रख दिया है।
नेशनल असेंबली के दस्तावेजों ने खोला राज
संसद में पेश सरकारी दस्तावेजों ने पाकिस्तान सरकार के दावों की पोल खोल दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2023 के बाद रिटायर हुए किसी भी रेल कर्मचारी को रिटायरमेंट के बाद मिलने वाले लाभ नहीं दिए गए। करीब 5,578 रिटायर्ड कर्मचारियों की लगभग 10 अरब रुपये की ग्रेच्युटी अब तक अटकी हुई है। वहीं प्रधानमंत्री सहायता पैकेज के तहत 4,135 मामलों में 7.52 अरब रुपये का भुगतान लंबित पड़ा है। इसके अलावा कर्मचारियों की बेटियों के शादी अनुदान के 1.18 अरब रुपये और 1.52 अरब रुपये का वेलफेयर फंड भी जारी नहीं किया गया है।
5 महीने से अटका फंड
इसी बीच, यह बात भी सामने आई है कि रेल मंत्रालय ने इस कंगाली से उबरने के लिए दिसंबर 2025 से ही 8.19 अरब रुपये की अतिरिक्त वित्तीय सहायता की मांग की थी। लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि पिछले पांच महीनों से देश की आर्थिक समन्वय समिति (ECC) ने इस गंभीर मुद्दे को अपने एजेंडे में शामिल करना तक जरूरी नहीं समझा।
93 अरब कमाई पर सवाल
दरअसल, पाकिस्तान रेलवे ने पिछले वित्त वर्ष में 93 अरब रुपये का बंपर रेवेन्यू जेनरेट करने का ढिंढोरा पीटा था। लेकिन सच यह है कि इस कमाई के बावजूद उसने अपनी नाक बचाने के लिए सरकार से 64 अरब रुपये की भारी-भरकम खैरात (ग्रांट) ली थी। अब सवाल यह उठ रहा है कि जब सरकार से इतनी बड़ी मदद मिली और खुद का रेवेन्यू भी 93 अरब था, तो वो पैसे आखिर गए कहां? क्यों आज हजारों बुजुर्ग पेंशनर्स और बेसहारा परिवार दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं?


