‘स्वास्थ्य विभाग की गाइडलाइन का पालन करें डॉक्टर’:DMCH की व्यवस्था जांचने पहुंचे दरभंगा प्रमंडल के आयुक्त, बोले- मरीजों को अनावश्यक रूप से रेफर करना बंद करें

‘स्वास्थ्य विभाग की गाइडलाइन का पालन करें डॉक्टर’:DMCH की व्यवस्था जांचने पहुंचे दरभंगा प्रमंडल के आयुक्त, बोले- मरीजों को अनावश्यक रूप से रेफर करना बंद करें

दरभंगा प्रमंडल के आयुक्त हिमांशु कुमार राय और जिलाधिकारी कौशल कुमार ने शनिवार को दरभंगा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (डीएमसीएच) की व्यवस्थाओं की जांच पड़ताल की। इस दौरान हिमांशु कुमार राय ने कहा कि डॉक्टरों को धरती का भगवान कहा जाता है, इसलिए समय पर उपस्थित रहकर स्वास्थ्य विभाग की गाइडलाइन का पालन करना अनिवार्य है। उन्होंने मरीजों को बेहतर इलाज देने तथा अनावश्यक रेफर की प्रवृत्ति रोकने पर बल देते हुए पिछले एक वर्ष में रेफर किए गए मरीजों की रिपोर्ट तलब की। इसके अलावा, अधिकारियों को डीएमसीएच में स्वीकृत एवं कार्यरत चिकित्सकों के साथ-साथ कर्मियों की संख्या की रिपोर्ट उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। दरअसल, एक दिन पहले मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के दरभंगा दौरे के दौरान समीक्षा बैठक की थी। एक दिन बाद ही जिला प्रशासन डीएमसीएच की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने में एक्टिव दिखा। हिमांशु कुमार राय और कौशल कुमार ने निरीक्षण के दौरान अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं, चिकित्सीय संसाधनों, साफ-सफाई, दवा व्यवस्था तथा मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं की विस्तृत समीक्षा की। हॉस्पिटल मैनेजमेंट, डॉक्टरों, हेल्थ डिपार्टमेंट के अफसरों के साथ बैठक भी की निरीक्षण के बाद अस्पताल प्रशासन, चिकित्सकों एवं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए। बैठक के दौरान आयुक्त ने डीएमसीएच कैंपस की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए चाहरदीवारी निर्माण, ड्रेनेज सिस्टम को बेहतर बनाने के निर्देश भी दिए गए। उन्होंने अस्पताल में संचालित बेडों की संख्या, इनडोर-आउटडोर एवं इमरजेंसी सेवाओं, पेयजल, भोजन और साफ-सफाई की स्थिति की समीक्षा करते हुए उपलब्ध संसाधनों के बेहतर उपयोग पर जोर दिया। 1742 करोड़ की लागत से डीएमसीएच कैंपस में बन रहा 1700 बेड का नया अस्पताल समीक्षा के दौरान जानकारी दी गई कि डीएमसीएच परिसर में 1700 बेड का नया अस्पताल बनाया जा रहा है, जिस पर लगभग 1742 करोड़ रुपए खर्च होंगे। अधीक्षक ने बताया कि प्रतिदिन करीब 5000 मरीजों का इलाज किया जा रहा है तथा अस्पताल में 900 बेड उपलब्ध हैं। बेडशीट की धुलाई पटना में कराई जाती है। इस पर आयुक्त ने प्रतिदिन साफ बेडशीट लगाने और वार्डों की नियमित सफाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। जिलाधिकारी कौशल कुमार ने भी बेडशीट की साफ-सफाई और नियमित बदलाव को लेकर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि शिकायतें मिल रही हैं कि प्रतिदिन बेडशीट नहीं बदली जाती और पर्याप्त सफाई नहीं रहती। संबंधित अधिकारियों को तत्काल सुधार के निर्देश दिए गए। बैठक में ऑक्सीजन पाइपलाइन, वेंटिलेटर और लिफ्ट व्यवस्था की भी समीक्षा की गई। चिकित्सकों ने बताया कि सर्जिकल भवन में दो ऑक्सीजन पाइपलाइन संचालित हैं तथा वर्तमान में आठ वेंटिलेटर कार्यरत हैं। अस्पताल में कुल सात लिफ्ट हैं, जिनमें छह चालू हैं। डीएमसीएच में 612 की जगह 308 दवाइयां ही उपलब्ध दवा उपलब्धता की समीक्षा के दौरान बताया गया कि कुल 612 प्रकार की दवाओं में से 308 प्रकार की दवाएं उपलब्ध हैं। इस पर आयुक्त ने सभी आवश्यक एवं जीवन रक्षक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने का निर्देश देते हुए कहा कि मरीजों को बाहर से दवा खरीदने की नौबत नहीं आनी चाहिए, अन्यथा संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई की जाएगी। दवा वितरण व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए मेडिकल स्टोर की जांच हेतु कमेटी गठित करने तथा अधीक्षक को नियमित निरीक्षण का निर्देश दिया गया। समीक्षा के दौरान चिकित्सकों ने एनेस्थीसिया एवं रेडियोलॉजी विभाग में डॉक्टरों की कमी की जानकारी दी। साथ ही नए चिकित्सीय उपकरणों की आवश्यकता संबंधी प्रस्ताव भी प्रस्तुत किया गया। आयुक्त ने अस्पताल परिसर एवं वार्डों में पर्याप्त साइनेज लगाने का निर्देश देते हुए कहा कि मरीजों एवं उनके परिजनों को विभिन्न विभागों तक पहुंचने में परेशानी नहीं होनी चाहिए। चिकित्सकों ने इमरजेंसी विभाग में सीटी स्कैन मशीन की आवश्यकता बताई। साथ ही जानकारी दी गई कि ट्रॉमा सेंटर में फिलहाल आठ बेड उपलब्ध हैं। आयुक्त ने कहा कि मरीजों को किसी प्रकार की असुविधा नहीं होनी चाहिए तथा शिकायतों का त्वरित समाधान सुनिश्चित किया जाए। एक दिन पहले भी डीएमसीएच सुपर स्पेशलिटी अस्पताल पहुंचे थे आयुक्त आयुक्त ने एक दिन पहले यानी शुक्रवार को भी आयुक्त हिमांशु कुमार राय ने डीएमसीएच सुपर स्पेशलिटी अस्पताल का औचक निरीक्षण किया था। वहां भी उन्होंने दवा उपलब्धता, चिकित्सकीय संसाधनों, एंबुलेंस सेवा, ब्लड बैंक और साफ-सफाई की समीक्षा करते हुए मरीजों को सभी आधारभूत सुविधाएं समय पर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे। निरीक्षण के दौरान अस्पताल परिसर में कई लिफ्ट बंद पाए जाने पर उन्होंने नाराजगी जताई थी तथा उन्हें शीघ्र चालू कराने का निर्देश दिया था। दरभंगा प्रमंडल के आयुक्त हिमांशु कुमार राय और जिलाधिकारी कौशल कुमार ने शनिवार को दरभंगा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (डीएमसीएच) की व्यवस्थाओं की जांच पड़ताल की। इस दौरान हिमांशु कुमार राय ने कहा कि डॉक्टरों को धरती का भगवान कहा जाता है, इसलिए समय पर उपस्थित रहकर स्वास्थ्य विभाग की गाइडलाइन का पालन करना अनिवार्य है। उन्होंने मरीजों को बेहतर इलाज देने तथा अनावश्यक रेफर की प्रवृत्ति रोकने पर बल देते हुए पिछले एक वर्ष में रेफर किए गए मरीजों की रिपोर्ट तलब की। इसके अलावा, अधिकारियों को डीएमसीएच में स्वीकृत एवं कार्यरत चिकित्सकों के साथ-साथ कर्मियों की संख्या की रिपोर्ट उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। दरअसल, एक दिन पहले मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के दरभंगा दौरे के दौरान समीक्षा बैठक की थी। एक दिन बाद ही जिला प्रशासन डीएमसीएच की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने में एक्टिव दिखा। हिमांशु कुमार राय और कौशल कुमार ने निरीक्षण के दौरान अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं, चिकित्सीय संसाधनों, साफ-सफाई, दवा व्यवस्था तथा मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं की विस्तृत समीक्षा की। हॉस्पिटल मैनेजमेंट, डॉक्टरों, हेल्थ डिपार्टमेंट के अफसरों के साथ बैठक भी की निरीक्षण के बाद अस्पताल प्रशासन, चिकित्सकों एवं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए। बैठक के दौरान आयुक्त ने डीएमसीएच कैंपस की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए चाहरदीवारी निर्माण, ड्रेनेज सिस्टम को बेहतर बनाने के निर्देश भी दिए गए। उन्होंने अस्पताल में संचालित बेडों की संख्या, इनडोर-आउटडोर एवं इमरजेंसी सेवाओं, पेयजल, भोजन और साफ-सफाई की स्थिति की समीक्षा करते हुए उपलब्ध संसाधनों के बेहतर उपयोग पर जोर दिया। 1742 करोड़ की लागत से डीएमसीएच कैंपस में बन रहा 1700 बेड का नया अस्पताल समीक्षा के दौरान जानकारी दी गई कि डीएमसीएच परिसर में 1700 बेड का नया अस्पताल बनाया जा रहा है, जिस पर लगभग 1742 करोड़ रुपए खर्च होंगे। अधीक्षक ने बताया कि प्रतिदिन करीब 5000 मरीजों का इलाज किया जा रहा है तथा अस्पताल में 900 बेड उपलब्ध हैं। बेडशीट की धुलाई पटना में कराई जाती है। इस पर आयुक्त ने प्रतिदिन साफ बेडशीट लगाने और वार्डों की नियमित सफाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। जिलाधिकारी कौशल कुमार ने भी बेडशीट की साफ-सफाई और नियमित बदलाव को लेकर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि शिकायतें मिल रही हैं कि प्रतिदिन बेडशीट नहीं बदली जाती और पर्याप्त सफाई नहीं रहती। संबंधित अधिकारियों को तत्काल सुधार के निर्देश दिए गए। बैठक में ऑक्सीजन पाइपलाइन, वेंटिलेटर और लिफ्ट व्यवस्था की भी समीक्षा की गई। चिकित्सकों ने बताया कि सर्जिकल भवन में दो ऑक्सीजन पाइपलाइन संचालित हैं तथा वर्तमान में आठ वेंटिलेटर कार्यरत हैं। अस्पताल में कुल सात लिफ्ट हैं, जिनमें छह चालू हैं। डीएमसीएच में 612 की जगह 308 दवाइयां ही उपलब्ध दवा उपलब्धता की समीक्षा के दौरान बताया गया कि कुल 612 प्रकार की दवाओं में से 308 प्रकार की दवाएं उपलब्ध हैं। इस पर आयुक्त ने सभी आवश्यक एवं जीवन रक्षक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने का निर्देश देते हुए कहा कि मरीजों को बाहर से दवा खरीदने की नौबत नहीं आनी चाहिए, अन्यथा संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई की जाएगी। दवा वितरण व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए मेडिकल स्टोर की जांच हेतु कमेटी गठित करने तथा अधीक्षक को नियमित निरीक्षण का निर्देश दिया गया। समीक्षा के दौरान चिकित्सकों ने एनेस्थीसिया एवं रेडियोलॉजी विभाग में डॉक्टरों की कमी की जानकारी दी। साथ ही नए चिकित्सीय उपकरणों की आवश्यकता संबंधी प्रस्ताव भी प्रस्तुत किया गया। आयुक्त ने अस्पताल परिसर एवं वार्डों में पर्याप्त साइनेज लगाने का निर्देश देते हुए कहा कि मरीजों एवं उनके परिजनों को विभिन्न विभागों तक पहुंचने में परेशानी नहीं होनी चाहिए। चिकित्सकों ने इमरजेंसी विभाग में सीटी स्कैन मशीन की आवश्यकता बताई। साथ ही जानकारी दी गई कि ट्रॉमा सेंटर में फिलहाल आठ बेड उपलब्ध हैं। आयुक्त ने कहा कि मरीजों को किसी प्रकार की असुविधा नहीं होनी चाहिए तथा शिकायतों का त्वरित समाधान सुनिश्चित किया जाए। एक दिन पहले भी डीएमसीएच सुपर स्पेशलिटी अस्पताल पहुंचे थे आयुक्त आयुक्त ने एक दिन पहले यानी शुक्रवार को भी आयुक्त हिमांशु कुमार राय ने डीएमसीएच सुपर स्पेशलिटी अस्पताल का औचक निरीक्षण किया था। वहां भी उन्होंने दवा उपलब्धता, चिकित्सकीय संसाधनों, एंबुलेंस सेवा, ब्लड बैंक और साफ-सफाई की समीक्षा करते हुए मरीजों को सभी आधारभूत सुविधाएं समय पर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे। निरीक्षण के दौरान अस्पताल परिसर में कई लिफ्ट बंद पाए जाने पर उन्होंने नाराजगी जताई थी तथा उन्हें शीघ्र चालू कराने का निर्देश दिया था।  

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