देवघर सदर अस्पताल में GNM के 90% पद खाली:जिले में 45 की जरूरत, सिर्फ 11 जीएनएम से चल रही देवघर की स्वास्थ्य सेवाएं

देवघर सदर अस्पताल में GNM के 90% पद खाली:जिले में 45 की जरूरत, सिर्फ 11 जीएनएम से चल रही देवघर की स्वास्थ्य सेवाएं

झारखंड सरकार के बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के दावों के बीच देवघर जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था गंभीर स्टाफ संकट से जूझ रही है। पूरे जिले में मात्र 11 नियमित जीएनएम (जनरल नर्सिंग एंड मिडवाइफरी) के भरोसे स्वास्थ्य सेवाएं संचालित हो रही हैं, जबकि वास्तविक आवश्यकता 40 से 45 जीएनएम की है। स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, देवघर सदर अस्पताल में जीएनएम के 32 पद स्वीकृत हैं। वर्तमान में केवल तीन नियमित जीएनएम ही कार्यरत हैं। वहीं, नौ जीएनएम अनुबंध के आधार पर सेवाएं दे रही हैं। इस भारी कमी के कारण मरीजों की देखभाल, आपातकालीन सेवाएं और अन्य जरूरी चिकित्सा कार्य बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। एएनएम के सहारे चल रही व्यवस्था स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि कई जगहों पर जीएनएम के दायित्व एएनएम (ऑक्सिलियरी नर्स मिडवाइफ) निभा रही हैं। जिले में कुल 311 एएनएम कार्यरत हैं, जो सात सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, 11 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और 181 उप-स्वास्थ्य केंद्रों की जरूरतों के मुकाबले काफी कम हैं। सारवां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के निरीक्षण में भी स्टाफ की भारी कमी उजागर हुई। सीएचसी प्रभारी डॉ. बीके सिन्हा ने बताया कि अस्पताल में नौ नर्सिंग स्टाफ की आवश्यकता है, लेकिन सामान्य दिनों में केवल दो नर्सिंग स्टाफ ही पूरे अस्पताल की जिम्मेदारी संभालते हैं। कई बार सरकारी योजनाओं के संचालन के लिए अन्य केंद्रों से स्टाफ बुलाना पड़ता है, जिससे व्यवस्था और अधिक प्रभावित होती है। मरीजों की बढ़ी परेशानी, बहाली की उम्मीद स्टाफ की कमी का सीधा असर मरीजों पर पड़ रहा है। अस्पताल पहुंचने वाले लोगों को इलाज और अन्य जरूरी सेवाओं के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है, जिससे उनकी परेशानी बढ़ रही है। कई मरीजों ने व्यवस्था पर नाराजगी भी जताई है। इस पूरे मामले में देवघर के सिविल सर्जन डॉ. रमेश कुमार ने नर्सिंग स्टाफ की भारी कमी को स्वीकार किया है। उन्होंने बताया कि रिक्त पदों को भरने के लिए राज्य सरकार को प्रस्ताव भेजा गया है और जल्द ही बहाली की उम्मीद है। फिलहाल, सीमित संसाधनों के सहारे ही जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था चल रही है, जिससे हालात सुधरने का इंतजार बना हुआ है। झारखंड सरकार के बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के दावों के बीच देवघर जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था गंभीर स्टाफ संकट से जूझ रही है। पूरे जिले में मात्र 11 नियमित जीएनएम (जनरल नर्सिंग एंड मिडवाइफरी) के भरोसे स्वास्थ्य सेवाएं संचालित हो रही हैं, जबकि वास्तविक आवश्यकता 40 से 45 जीएनएम की है। स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, देवघर सदर अस्पताल में जीएनएम के 32 पद स्वीकृत हैं। वर्तमान में केवल तीन नियमित जीएनएम ही कार्यरत हैं। वहीं, नौ जीएनएम अनुबंध के आधार पर सेवाएं दे रही हैं। इस भारी कमी के कारण मरीजों की देखभाल, आपातकालीन सेवाएं और अन्य जरूरी चिकित्सा कार्य बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। एएनएम के सहारे चल रही व्यवस्था स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि कई जगहों पर जीएनएम के दायित्व एएनएम (ऑक्सिलियरी नर्स मिडवाइफ) निभा रही हैं। जिले में कुल 311 एएनएम कार्यरत हैं, जो सात सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, 11 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और 181 उप-स्वास्थ्य केंद्रों की जरूरतों के मुकाबले काफी कम हैं। सारवां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के निरीक्षण में भी स्टाफ की भारी कमी उजागर हुई। सीएचसी प्रभारी डॉ. बीके सिन्हा ने बताया कि अस्पताल में नौ नर्सिंग स्टाफ की आवश्यकता है, लेकिन सामान्य दिनों में केवल दो नर्सिंग स्टाफ ही पूरे अस्पताल की जिम्मेदारी संभालते हैं। कई बार सरकारी योजनाओं के संचालन के लिए अन्य केंद्रों से स्टाफ बुलाना पड़ता है, जिससे व्यवस्था और अधिक प्रभावित होती है। मरीजों की बढ़ी परेशानी, बहाली की उम्मीद स्टाफ की कमी का सीधा असर मरीजों पर पड़ रहा है। अस्पताल पहुंचने वाले लोगों को इलाज और अन्य जरूरी सेवाओं के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है, जिससे उनकी परेशानी बढ़ रही है। कई मरीजों ने व्यवस्था पर नाराजगी भी जताई है। इस पूरे मामले में देवघर के सिविल सर्जन डॉ. रमेश कुमार ने नर्सिंग स्टाफ की भारी कमी को स्वीकार किया है। उन्होंने बताया कि रिक्त पदों को भरने के लिए राज्य सरकार को प्रस्ताव भेजा गया है और जल्द ही बहाली की उम्मीद है। फिलहाल, सीमित संसाधनों के सहारे ही जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था चल रही है, जिससे हालात सुधरने का इंतजार बना हुआ है।  

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