लुधियाना के श्री गीता वृद्ध आश्रम में रहने वाले एक बुजुर्ग टीचर की ‘यादें’ ट्रस्ट के वाइस प्रेजिडेंट ने नष्ट कर दी। बुजुर्ग टीचर 6 महीने से न्याय के लिए पुलिस थाने से लेकर अफसरों तक के चक्कर काट रहा है। कहीं से न्याय नहीं मिला तो उसने पंजाब स्टेट ह्यूमन राइट कमिशन को शिकायत दी। ह्यूमन राइट कमिशन ने पुलिस कमिश्नर से बुजुर्ग के आरोपों की जांच करने को कहा। पुलिस कमिश्नर स्वप्न शर्मा ने इसकी जांच एसीपी साउथ को सौंपी। बुजुर्ग टीचर का आरोप है कि एसीपी साउथ ने भी अभी तक इसकी रिपोर्ट ह्यूमन राइट कमिशन को नहीं भेजी। बुजुर्ग टीचर का आरोप है कि ट्रस्ट के वाइस प्रेजिडेंट सौरव सिंगला ने जबरन उनका रूम खाली करवाया और उनका सामान बोरियों में भरकर कहीं और फेंककर नष्ट कर दिया। उसमें उनके माता पिता की अंतिम निशानियां, कुछ किताबें, सीडी व अन्य सामान था। बुजुर्ग टीचर का कहना है कि वो ‘राम राज्य ट्रू डेमोक्रेसी’ किताब लिख रहे थे जो कि लगभग फाइनल हो चुकी थी। पूरी किताब उन्होंने हाथ से लिखी थी। सौरव सिंगला व उसके साथी किताब के उन हस्तलिखित पेजों को भी ले गए। जिसका उन्हें सबसे ज्यादा दुख है। इसके अलावा कागजों के बीच उनके 25 हजार रुपए भी ले गए। उधर, सौरव सिंगला का कहना है कि बुजुर्ग टीचर आश्रम के नियमों के अनुसार नहीं रहते हैं उन्हें कई बार आश्रम छोड़ने को कहा गया है। वो अपने कमरे में किसी को आने नहीं देते। उन्होंने कमरे में वो सामान रखा है जो रखने की इजाजत नहीं है। अब वो मेरे खिलाफ झूठी कंप्लेंट दे रहे हैं। बुजुर्ग टीचर विमल कुमार ने शिकायत में लगाए हैं ये अहम आरोप, जानिए… टीचर बनकर आए थे विमल तो यहीं पर रहने लगे विमल कुमार का कहना है कि वो लखनऊ में पैदा हुए और देश के अलग अलग शहरों में रहे। बाद में पुणे में शिफ्ट हो गए और वहां पर अपने माता पिता के साथ रहने लगे। एक स्कूल शुरू किया और बच्चों को इंग्लिश की कोचिंग दी। कई किताबें लिखी और पब्लिश करवाई। जिनकी रॉयल्टी आज भी उन्हें मिलती है। लुधियाना आए तो श्री गीता मंदिर के वृद्धआश्रम में पहुंचे। वहां पर उन्हें अंग्रेजी टीचर की भी जरूरत थी। उन्होंने बताया कि बच्चों को पढ़ाने लगा तो उन्हें सेपरेट कमरा दिया गया। यहां बैठकर मैंने अपनी किताब राम राज्य ट्रू डेमोक्रेसी लिखनी शुरू की। जिसे ये लोग नष्ट कर चुके हैं। दूसरे वाइस प्रेजिडेंट का दावा, सौरव सिंगला को ट्रस्ट से हटाया ट्रस्ट के दूसरे वाइस प्रेजिडेंट कुलदीप भार्गव का कहना है कि सौरव सिंगला ट्रस्ट के नियमों के अनुसार काम नहीं कर रहे थे। इसलिए ट्रस्ट ने उन्हें हटा दिया है। उनको हटाने के संबंध में बाकायदा पब्लिक नोटिस भी जारी किया गया है। उन्होंने सौरव सिंगला पर फाइनेंशियल गड़बड़ी के आरोप लगाए। उन्होंने बताया कि सौरव सिंगला को निकालने के बाद भी वो वृद्ध आश्रम में आकर हस्तक्षेप कर रहे हैं। इस संबंध में उन्हें नोटिस भी दिया गया है। बुजुर्ग नियमों का पालन नहीं कर रहे थे सौरव सिंगला का कहना है कि विमल कुमार तीन साल से वृद्धाश्रम में हैं। वो अपने कमरे में किसी को आने नहीं देते हैं। एक रूम में दो बुजुर्गों को रखा जाता है लेकिन वो अपने कमरे में किसी को आने नहीं देते हैं। यहां तक कि सफाई करने वालों को भी आने नहीं देते हैं। उनका कहना है कि विमल कुमार ने कमरे में इंडक्शन व अन्य वर्तन रखे हैं। नियम के अनुसार कोई भी बुजुर्ग अपने कमरे में खाना नहीं बना सकता है। जबकि वो इंडक्शन पर खाना बनाते थे। उनके कमरे से देसी घी के डब्बे, प्याज व टमाटर व अन्य सामान मिला। उन्होंने कहा कि उन्हें बार-बार कहा जा रहा था वो फिर भी कमरे में किसी को जाने नहीं देते थे। उन्होंने बताया कि पुलिस एक बार उनकी शिकायत की जांच करके झूठा बता चुकी है। वो बार बार शिकायत कर रहे हैं। उन्हें इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। सौरव सिंगला का कहना है कि उन्होंने कुलदीप भार्गव व उनके दूसरे साथी को भी डेफरामेशन का नोटिस भेजा है कि झूठे कागज बनाकर उन्हें ट्रस्ट से बाहर करने का पब्लिक नोटिस जारी किया है। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट के फैसले लेने के सभी अधिकार स्वामी जी के पास हैं।


