हॉस्पिटल से डिस्चार्ज हुए सभी मरीज:तरबूज- मैगी खाने से बिगड़ी थी तबियत, CMO बोले- जल्द रिपोर्ट जारी करेगी जांच टीम

हॉस्पिटल से डिस्चार्ज हुए सभी मरीज:तरबूज- मैगी खाने से बिगड़ी थी तबियत, CMO बोले- जल्द रिपोर्ट जारी करेगी जांच टीम

गोरखपुर में तरबूज के बाद मैगी खाने से एक ही परिवार के 11 लोगों की हालत बिगड़ गई। जिन्हें इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। शुक्रवार को सबकी हालत सामान्य होने पर डिस्चार्ज कर घर भेज दिया गया। सिर्फ एक बुजुर्ग जो ज्यादा सीरियस थे, अभी एडमिट हैं। CMO डॉ. राजेश झा ने बताया कि बुजुर्ग ही हालत भी अब कंट्रोल में है। डॉक्टरों की विशेष निगरानी में इलाज किया जा रहा। जैसे ही तबियत सामान्य होगी उन्हें भी घर भेज दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि प्रभारी चिकित्सा अधिकारी (MOIC) सहित अन्य डॉक्टरों की टीम को जांच के लिए गांव भेजा गया। रिपोर्ट जल्द ही जारी किया जाएगा। डॉक्टर ने बताई वजह
वहीं डॉक्टर बीके सुमन ने बताया कि ऐसा नहीं है मैगी और तरबूज एक साथ खाने से कुछ हुआ है। दोनों का कनेक्शन नहीं हो सकता है। हो सकता है मैगी खराब हो या तरबूज ही दूषित हो। या फिर साफ- सफाई से मैगी बनाया न गया हो। हलांकि असली वजह रिपोर्ट आने के बाद ही पता चलेगी। फिलहाल यह मामला फूड पॉइजनिंग का ही लग रहा। क्यों होती फूड पॉइजनिंग
उन्होंने बताया कि फूड पॉइजिंग अक्सर बासी या दूषित खाना खाने से हो जाता है। जिसमें मरीज को उल्टी, दस्त, पेट दर्द और अन्य दिक्कतें होती हैं। इसके बचाव के लिए तरबूज को काटने से पहले अच्छी तरह धोएं। कटे हुए तरबूज को 2 घंटे से ज्यादा बाहर न रखें। हमेशा ताजा फल काटें, पहले से कटे हुए तरबूज खरीदने से बचें। वहीं मैगी के मामले में भी एक्सपायरी डेट चेक करें। कोई लोकल मैगी न खा लें। बनाते समय साफ- सफाई का खास ख्याल रखें। उसमें डालने वाली सब्जियों को भी ताजा ही डालें। अब जानिए पूरा मामला… बेलीपार थाना क्षेत्र के मलाव गांव के रहने वाले अमरनाथ पाण्डेय की बेटी अन्नू ने बताया कि बुधवार शाम को एक फेरी वाल तरबूज बेचने आया था। उससे हम लोगों ने तरबूज खरीद लिया। शाम करीब 8 बजे परिवार के सभी लोगों ने तरबूज खाया। इसके करीब एक घंटे बाद बच्चों की जिद पर घर में मैगी बनी। मैगी को मेरे पिता अमर नाथ पाण्डेय (65), ताऊ बैजनाथ पाण्डेय (68), मेरी मां शैल कुमारी (63), भाई अंशु पाण्डेय (26), बहन पूर्णिमा पाण्डेय (25) ने खाई। इसके अलावा परिवार के ही बलराम पाण्डेय के बेटे वेदांत (3) और हन्नू (2), लक्ष्मीकांत पाण्डेय की बेटी नेहा, रिश्तेदार जगदीश दुबे (80), सौरभ त्रिपाठी (25) ने भी मैगी और तरबूज खाई थी। रात करीब 1 बजे एक-एक कर सभी की तबीयत बिगड़ने लगी। तबीयत बिगड़ी तो गांव के ही झोलाझाप से दवाई ली परिजन के अनुसार, बुधवार देर रात करीब 1 बजे बच्चों ने उल्टियां शुरू कर दी। दस्त आने लगा। कुछ ही देर में घर के बड़े सदस्यों की भी तबीयत खराब होने लगी। उनको भी पेट दर्द, उल्टी-दस्त होने लगा। सबको सांस लेने में भी दिक्कत होने लगी। परेशानी बढ़ी तो परिजन ने गांव के ही एक झोलाझाप डॉक्टर से कुछ दवाइयां ली। लेकिन दवाई का कोई असर नहीं दिखा। परेशानी बढ़ती गई। सुबह होते होते तबीयत अधिक बिगड़ने लगी तो पड़ोसियों ने सबको स्थानीय सीएचसी भेजवाया। वहां डॉक्टर ने प्राथमिक इलाज के बाद दोपहर बाद जिला अस्पताल रेफर कर दिया। जिला अस्पताल में डॉक्टर ने सभी 11 मरीजों को इमरजेंसी वार्ड में भर्ती किया। डॉक्टर आरपी गौतम ने इलाज शुरू किया। डॉ.गौतम ने बताया- एक ही परिवार के 11 लोगों को भर्ती कराया गया है। सभी खतरे से बाहर हैं। उनकी निगरानी की जा रही है। हालत सामान्य होने पर डिस्चार्ज कर दिया जाएगा। CMO ने जाना मरीजों का हाल जिला अस्पताल में एक ही परिवार के 11 लोगों के भर्ती किए जाने के बाद CMO डॉ. राजेश झा भी पहुंचे। उन्होंने परिजन से बात कर स्थिति को समझा। फिर डॉक्टर्स से जानकारी ली। सीएमओ ने बताया कि मरीजों की हालत ठीक है।

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