कामकाज में बाधा डालने-अनावश्यक दबाव का आरोप:टीपी वर्मा कॉलेज में महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार का मामला,जांच की मांग

कामकाज में बाधा डालने-अनावश्यक दबाव का आरोप:टीपी वर्मा कॉलेज में महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार का मामला,जांच की मांग

टीपी वर्मा कॉलेज में कार्यरत तीन महिला कर्मचारियों ने कॉलेज के बड़ा बाबू मनोज दूबे पर गंभीर आरोप लगाए हैं। महिला कर्मियों का कहना है कि उन्हें लंबे समय से मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था। उन पर कामकाज में जानबूझकर बाधा डालने, अनावश्यक दबाव बनाने और विरोध करने पर नौकरी व भविष्य खराब करने की धमकी देने का आरोप है। पीड़ित महिलाओं ने बताया कि वे डर और दबाव के कारण अब तक सामने नहीं आ पा रही थीं। परिसर में तनाव और असमंजस का माहौल इस मामले के सामने आने के बाद कॉलेज परिसर में तनाव और असमंजस का माहौल है। छात्र-छात्राओं और अन्य कर्मचारियों के बीच भी इस घटना को लेकर चर्चा तेज हो गई है। यह मामला अब केवल कॉलेज प्रशासन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी इसे गंभीरता से उठाया जा रहा है। इसी क्रम में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के जिला सचिव ओमप्रकाश क्रांति ने एक प्रेस वार्ता कर इस पूरे प्रकरण पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान से जुड़ा मामला उन्होंने प्रशासन और विश्वविद्यालय व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह केवल एक सामान्य शिकायत नहीं, बल्कि कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और अधिकारों से जुड़ा एक अत्यंत संवेदनशील विषय है। क्रांति ने चेतावनी दी कि यदि ऐसी घटनाओं पर समय रहते रोक नहीं लगाई गई, तो इससे पूरी व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा होगा। ओमप्रकाश क्रांति ने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और त्वरित जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि दोषी पाए जाने वाले लोगों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। उन्होंने पीड़ित महिला कर्मियों को सुरक्षा और न्याय दिलाने की भी मांग की। फिलहाल, इस पूरे मामले को लेकर कॉलेज प्रशासन और संबंधित अधिकारियों की भूमिका पर सबकी नजर बनी हुई है। टीपी वर्मा कॉलेज में कार्यरत तीन महिला कर्मचारियों ने कॉलेज के बड़ा बाबू मनोज दूबे पर गंभीर आरोप लगाए हैं। महिला कर्मियों का कहना है कि उन्हें लंबे समय से मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था। उन पर कामकाज में जानबूझकर बाधा डालने, अनावश्यक दबाव बनाने और विरोध करने पर नौकरी व भविष्य खराब करने की धमकी देने का आरोप है। पीड़ित महिलाओं ने बताया कि वे डर और दबाव के कारण अब तक सामने नहीं आ पा रही थीं। परिसर में तनाव और असमंजस का माहौल इस मामले के सामने आने के बाद कॉलेज परिसर में तनाव और असमंजस का माहौल है। छात्र-छात्राओं और अन्य कर्मचारियों के बीच भी इस घटना को लेकर चर्चा तेज हो गई है। यह मामला अब केवल कॉलेज प्रशासन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी इसे गंभीरता से उठाया जा रहा है। इसी क्रम में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के जिला सचिव ओमप्रकाश क्रांति ने एक प्रेस वार्ता कर इस पूरे प्रकरण पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान से जुड़ा मामला उन्होंने प्रशासन और विश्वविद्यालय व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह केवल एक सामान्य शिकायत नहीं, बल्कि कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और अधिकारों से जुड़ा एक अत्यंत संवेदनशील विषय है। क्रांति ने चेतावनी दी कि यदि ऐसी घटनाओं पर समय रहते रोक नहीं लगाई गई, तो इससे पूरी व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा होगा। ओमप्रकाश क्रांति ने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और त्वरित जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि दोषी पाए जाने वाले लोगों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। उन्होंने पीड़ित महिला कर्मियों को सुरक्षा और न्याय दिलाने की भी मांग की। फिलहाल, इस पूरे मामले को लेकर कॉलेज प्रशासन और संबंधित अधिकारियों की भूमिका पर सबकी नजर बनी हुई है।  

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