दल खालसा का अमृतसर में मार्च का ऐलान:1984 के घल्लूघारे की 42वीं बरसी पर ‘यादगारी मार्च’ निकलेगा

दल खालसा ने जून 1984 के सैन्य हमले की 42वीं बरसी के उपलक्ष्य में 5 जून को अमृतसर में ‘घल्लूघारा यादगारी मार्च’ निकालने की घोषणा की है। पार्टी के वरिष्ठ नेता परमजीत सिंह मंड और राजनीतिक मामलों के सचिव कंवरपाल सिंह बिट्टू ने साझा प्रेस वार्ता के दौरान इस कार्यक्रम की रूपरेखा पेश की। नेताओं ने बताया कि यह मार्च 5 जून को शाम 5 बजे बुरज अकाली फूला सिंह से शुरू होकर श्री अकाल तख्त साहिब तक निकाला जाएगा, जिसका उद्देश्य 1984 की घटनाओं और शहीदों की याद को ताजा रखना है। 1984 के जख्मों और कौमी लक्ष्य पर दिया जोर वरिष्ठ नेता परमजीत सिंह मंड ने कहा कि जून 1984 के घाव सिख कौम के मानस पटल पर आज भी ताज़ा हैं और भारतीय सेना के उस हमले को कभी भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने संत ज्ञानी जरनैल सिंह भिंडरांवाले, भाई अमरीक सिंह और जनरल सुबेग सिंह सहित सभी बलिदानियों को श्रद्धांजलि अर्पित की। मंड ने दावा किया कि 1984 की घटना के बाद ही खालिस्तान का संघर्ष एक कौमी लक्ष्य बना। उन्होंने विदेशों में सक्रिय सिख एक्टिविस्टों को निशाना बनाए जाने पर भी चिंता जताई और 1984 के गुमनाम शहीदों के लिए साझा स्मारक बनाने की मांग की। बेअदबी कानून पर पंजाब सरकार को घेरा पार्टी के सचिव कंवरपाल सिंह बिट्टू ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के सम्मान के नाम पर पंजाब सरकार द्वारा बनाए गए नए कानून की तीखी आलोचना की। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि सिख कौम को अपनी धार्मिक मर्यादाओं की रक्षा के लिए सरकारी कानूनों की आवश्यकता नहीं है, बल्कि सरकार को केवल बेअदबी के असली दोषियों को सख्त सजा दिलाने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। बिट्टू ने आरोप लगाया कि इस नए कानून से पंथ और सरकार के बीच अनावश्यक टकराव की स्थिति उत्पन्न हो गई है। मुख्यमंत्री की भाषा और सरकारी दखल पर आपत्ति दल खालसा ने मुख्यमंत्री भगवंत मान की कार्यशैली और भाषा को अहंकारपूर्ण करार दिया। बिट्टू ने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार सिखों के धार्मिक मामलों में सीधा हस्तक्षेप कर रही है और ‘फूट डालो और राज करो’ की नीति पर चल रही है। उन्होंने कहा कि सरकार कुछ चुनिंदा सिख चेहरों का इस्तेमाल कर कौम के भीतर विभाजन पैदा करने की कोशिश कर रही है। पार्टी ने अकाल तख्त साहिब की सर्वोच्चता की रक्षा के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और सरकार को धार्मिक मर्यादाओं से दूर रहने की चेतावनी दी। 31 मई की बैठक के बाद तय होगी अगली रणनीति संगठन ने जानकारी दी कि वर्तमान परिस्थितियों और सरकार के रुख को देखते हुए 31 मई को एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में चर्चा के बाद ही भविष्य की अगली रणनीति और संघर्ष के अगले चरणों को जनता के साथ साझा किया जाएगा। दल खालसा के नेताओं ने संदेश दिया कि वे सिखों की धार्मिक स्वायत्तता और अकाल तख्त साहिब के सम्मान के लिए कोई भी समझौता नहीं करेंगे और उनका संघर्ष लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण तरीके से जारी रहेगा।

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