घरों के मीटर होंगे ऑनलाइन:नई तकनीक से लैस मीटर खरीदने की योजना पर काम शुरू

प्रवीण पर्व | जालंधर बिजली चोरी रोकने के लिए पावरकॉम अब नई टेक्नोलॉजी वाली स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं के परिसर में लगाएगा। विभाग ने जालंधर सहित तमाम शहरों में स्मार्ट मीटर लगाने की योजना पर काम शुरू कर दिया है। इस योजना का नाम है – एडवांस्ड मीटरिंग इंफ्रास्ट्रक्चर प्लान। सालाना बजट में 10 करोड़ रुपए का फंड इसके लिए रखा गया था। मीटरों की खरीदारी का प्रोसेस वीरवार को स्टार्ट कर दिया गया है। ये मीटर आप्टिकल पोर्ट से युक्त होंगे। इस टेक्नोलॉजी से मीटर में बगैर कोई तार लगाए डाटा ट्रांसफर किया जा सकता है। मीटर को भविष्य में ऑनलाइन करके सीधे कंट्रोल रूम से ही बिलिंग डाटा ले लिया जाएगा। जालंधर में नए बिजली कनेक्शनों व पुराने कनेक्शनों में मीटर खराब होने पर नए खरीदे नई टेक्नोलॉजी वाले मीटर लगाए जाएंगे। इन्हें फाइबर के ट्रांसपेरेंट बॉक्स में फिट किया जाएगा। ट्रांसपेरेंट बॉक्स के आरपार आसानी से मीटरों की सीलें दिखाई देती हैं। कोई बिजली चोरी के लिए छेड़छाड़ होने पर आसानी से पता चल जाता है। ऐसा पहली बार है कि जिस कंपनी के मीटर फिट होंगे। वही 5 साल सिस्टम की देखरेख करेगी। पीएसपीसीएल ने इस काम के लिए अनुभवी कंपनियों से प्रस्ताव मांगे हैं। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य बिजली चोरी पर लगाम लगाना और बिजली वितरण की व्यवस्था को और बेहतर बनाना है, ताकि लोगों को अच्छी सुविधा मिल सके। एडवांस मीटरिंग इंफ्रा स्थापित होने के बाद बिजली विभाग के कर्मचारी को मीटर की रीडिंग लेने के लिए घर-घर नहीं जाना पड़ता है। फिलहाल जालंधर में इंडस्ट्रीयल, व्यापारिक व घरों में आन डिमांड लगाए गए स्मार्ट मीटर ऑनलाइन हैं। स्मार्ट मीटर के माध्यम से बिजली की खपत का डेटा सीधे विभाग के सर्वर पर पहुँच जाएगा। इससे उपभोक्ताओं को गलत बिल आने की समस्या से भी छुटकारा मिलेगा। सटीक रीडिंग : ये मीटर बिजली की एक-एक यूनिट का सही हिसाब रखेंगे, जिससे बिलिंग में पारदर्शिता आएगी। छेड़छाड़ पर तुरंत अलर्ट : यदि कोई मीटर के साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ या कुंडी लगाने की कोशिश करेगा, तो विभाग के मुख्यालय में तुरंत सूचना पहुंच जाएगी। मजबूत नेटवर्क : विभाग पूरे पंजाब में एक विशेष संचार तंत्र (नेटवर्क) तैयार कर रहा है, जिससे ये मीटर हर समय कंट्रोल रूम से जुड़े रहेंगे। 5 साल की गारंटी : जो कंपनी इन मीटरों को लगाएगी, वही अगले 5 साल तक इनकी मरम्मत और देखरेख के लिए जिम्मेदार होगी। इनमें आर्टिकल पोर्ट लगी होगी। इसके जरिए बिजली विभाग के कर्मचारी एक विशेष उपकरण को मीटर के पास ले जाकर बिना तारों को छुए सारा डेटा ले सकते हैं। इस उपकरण को सीएमआरआई कहते हैं। इसमें मीटर की रीडिंग और पिछले कई महीनों का डेटा सीधे डिजिटल रूप में मिलता है, जिससे हाथ से रीडिंग नोट करने में होने वाली गलतियां खत्म हो जाती हैं। यह पोर्ट केवल रीडिंग ही नहीं, बल्कि यह भी बताता है कि उपभोक्ता ने पिछले दिनों में कितना लोड इस्तेमाल किया और क्या मीटर के साथ कभी कोई छेड़छाड़ की गई है। अगर मीटर में कोई तकनीकी खराबी आती है, तो इंजीनियर इस पोर्ट के जरिए मीटर की आंतरिक जांच कर सकते हैं कि समस्या सॉफ्टवेयर में है या हार्डवेयर में। यह पोर्ट एडवांस्ड मीटरिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का हिस्सा है, जो भविष्य में मीटर को पूरी तरह से रिमोट कंट्रोल (दफ्तर से ही चालू या बंद करना) बनाने में मदद करता है।

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