उत्तर प्रदेश में आंधी-बारिश ने पिछले 48 घंटों में जमकर तबाही मचाई। UP में आंधी-बारिश से 117 लोगों की मौत हो गई है। बाराबंकी, बहराइच, कानपुर देहात, बस्ती, संभल, हरदोई, उन्नाव समेत कुल 19 जिलों में आंधी-बारिश से 117 लोगों की मौत हुई है।
मृतक के परिजनों को मुआवजा देने की घोषणा
आंधी-बारिश से 117 लोगों की मौत के साथ ही कई जगह से पशुओं की मौत की खबर आई है। इसके अलावा प्रदेश के अलग-अलग इलाकों में संपत्ति को बड़ा नुकसान हुआ है। योगी आदित्यनाथ सरकार ने आंधी-बारिश से जान गंवाने वालों के परिजनों को 4-4 लाख रुपए की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। राहत आयुक्त हरिकेश भास्कर ने बताया कि बिगड़ती मौसम स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। पिछले 24 घंटे कार्यरत एकीकृत नियंत्रण एवं कमान केंद्र पूरी तरह सक्रिय है।
आंधी-बारिश से 130 पालतू जानवरों की मौत
अधिकारियों के अनुसार, मौसम की मार से करीब 130 पालतू पशुओं की मौत हुई है और लगभग 98 मकानों को नुकसान पहुंचा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को तुरंत प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने, पीड़ितों को राहत सामग्री पहुंचाने और मुआवजे के शीघ्र वितरण के निर्देश दिए हैं। CM ने सभी जिला मजिस्ट्रेटों को बचाव-राहत कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने तथा हर तीन घंटे में स्थिति की रिपोर्ट भेजने का आदेश दिया है।
राहत एवं मुआवजा वितरण पर अधिकारियों की नजर
CM योगी ने अधिकारियों को सोशल मीडिया अपडेट और जमीनी स्तर पर निरीक्षण के माध्यम से राहत कार्यों, मुआवजे वितरण और बचाव अभियानों की निगरानी करने का निर्देश दिया है। सीएम ने कहा कि बचाव एवं राहत कार्यों में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उच्च अधिकारी जमीनी परिस्थितियों पर नजर रख रहे हैं।
केंद्रीय मंत्री ने लॉन्च किए दो उन्नत मौसम सिस्टम
यूपी में मौसम ने जमकर कहर बरपाया। इसी बीच केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के तहत दो उन्नत मौसम पूर्वानुमान प्रणालियों का शुभारंभ किया। इनमें मौसम विज्ञान विभाग का पहला कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित मानसून पूर्वानुमान मॉडल और उत्तर प्रदेश के लिए उच्च-रिजॉल्यूशन वर्षा पूर्वानुमान प्रणाली शामिल है।
यह नई प्रणाली 10 दिन पहले तक 1 किलोमीटर स्थानिक रिजॉल्यूशन पर वर्षा की सटीक भविष्यवाणी कर सकेगी। दोनों सिस्टम स्वचालित वर्षामापी, मौसम स्टेशन, डॉप्लर रडार और उपग्रह डेटा को एकीकृत करते हैं तथा AI तकनीक का उपयोग कर चरम मौसम घटनाओं की प्रारंभिक चेतावनी देने में सक्षम होंगे।


