‘जमीन विवाद के बाद सीवान जाने में डरता हूं’:ओसामा पर FIR कराने वाले डॉक्टर बोले-शहाबुद्दीन परिवार की जिस चीज पर नजर पड़ती, अधिकार जमा लेते हैं

‘जमीन विवाद के बाद सीवान जाने में डरता हूं’:ओसामा पर FIR कराने वाले डॉक्टर बोले-शहाबुद्दीन परिवार की जिस चीज पर नजर पड़ती, अधिकार जमा लेते हैं

मेरी डेढ़ करोड़ की जमीन, समझिए फंस गई है। मैंने जिस पर्पस से ली थी, शायद वो अब काम नहीं हो पाएगा। सीवान में आज भी बहुत कुछ वैसा ही है। शहाबुद्दीन परिवार की नजर जिस चीज पर पड़ जाती है, उस पर वो अपना अधिकार जमा लेते हैं। 15 अप्रैल को हुई मारपीट की घटना के बाद मुझे यही महसूस होता है। मैं गोरखपुर में रहता हूं, गोपालगंज आता-जाता रहता हूं, मगर सीवान जाने में अब थोड़ा सोच-समझकर जाना पड़ता है। डर लगता है। पूर्व सांसद और बाहुबली शहाबुद्दीन के विधायक बेटे ओसामा शहाब पर मारपीट और जमीन विवाद की FIR कराने वाले डॉक्टर विनय तिवारी ने दैनिक भास्कर से बातचीत में ये बातें कही हैं। मंगलवार को इस केस में ओसामा शहाब को हाईकोर्ट ने गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने पुलिस से केस डायरी की मांग की है और अगली सुनवाई की तारीख 14 जून तय की है। डॉक्टर विनय तिवारी ने क्या-क्या आरोप लगाए हैं? पूरी घटना क्या थी? विवाद की शुरुआत कहां से हुई? हाईकोर्ट के फैसले के बाद केस की दिशा अब किस ओर जाएगी? सवाल-जवाब के जरिए पढ़िए पूरी रिपोर्ट.. पहले समझिए पूरा मामला क्या है पुलिस की FIR के मुताबिक, पूरा मामला सीवान जिले के महादेव थाने में एक जमीन विवाद से जुड़ा है, जिसकी शुरुआत अप्रैल 2026 में जब डॉक्टर विनय तिवारी ने जमीन खरीदने के बाद उस पर काम शुरू किया। उनका आरोप है कि शुरुआत में ओसामा शहाब और उनके लोगों ने इस जमीन पर आपत्ति जताई और इसे अपना बताते हुए काम रोकने की कोशिश की। इसके बाद उन्हें फोन कर और मौके पर आकर धमकाया गया, हालांकि उन्होंने अपने कागजात भी उनलोगों को दिखाए, लेकिन कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला। इस बीच जब इस साल फिर से काम शुरू किया गया तो आरोप है कि 15 अप्रैल 2026 को ओसामा शहाब और उनके समर्थकों ने मौके पर पहुंचकर CCTV तोड़ दिए, काम कर रहे लोगों के साथ मारपीट की और जान से मारने की धमकी दी। इसके बाद डॉक्टर विनय तिवारी ने महादेवा थाना में FIR दर्ज कराई, जिसमें जमीन कब्जा, मारपीट और धमकी के आरोप लगाए गए हैं। इसी केस में आगे चलकर कोर्ट में अग्रिम जमानत खारिज हुई, गिरफ्तारी वारंट जारी हुआ और अब पटना हाईकोर्ट ने फिलहाल गिरफ्तारी पर रोक लगाई है, जबकि पुलिस की छापेमारी के बावजूद आरोपी अभी तक नहीं मिल पाए हैं। गिरफ्तारी पर रोक लगने के बाद विनय तिवारी की दैनिक भास्कर से बातचीत
सवाल: सुनवाई टली, गिरफ्तारी पर भी रोक लग गई। इस पर आपका क्या कहना है?
जवाबः मैं एक डॉक्टर हूं, मुझे अपने डॉक्टरी पेशे की पूरी जानकारी है, लेकिन केस की धाराओं और कानूनी नियमों की बारीक जानकारी मेरे पास नहीं है। इस केस में मेरी तरफ से सरकारी वकील ही पैरवी कर रहे हैं, इसलिए कोर्ट में क्या बहस हुई, किन आधारों पर क्या दलीलें दी गईं और किस वजह से गिरफ्तारी पर रोक लगी, यह पूरी जानकारी वही बेहतर तरीके से बता पाएंगे।मुझे इस बात का भरोसा है कि वर्तमान में राज्य सरकार और पुलिस की कार्यवाही सही दिशा में है, इसलिए उम्मीद है कि अंत में न्याय मेरे ही पक्ष होगा। सवाल: जमीन विवाद की शुरुआत आखिर कब और कैसे हुई? जवाबः जब साल 2024 के नवंबर महीने में मैंने साढ़े तीन कट्ठे की यह जमीन खरीदी थी, तो शुरुआती समय में कोई बड़ा विवाद नहीं था, लेकिन पिछले साल जब मैंने उस जमीन पर काम शुरू किया, तब ओसामा शहाब के लोगों ने आपत्ति जताई और कहा कि यह जमीन उनकी है। इस पर मैंने खुद ओसामा शहाब से संपर्क किया, जहां उन्होंने फोन पर भी जमीन को लेकर दावा किया। इसके बाद मैंने अपने सभी वैध कागजात उन्हें उपलब्ध करा दिए और उनसे कहा गया कि जांच कराई जाएगी, लेकिन लंबे समय तक कोई जवाब नहीं मिला। इसी बीच जब इस साल दोबारा काम शुरू किया गया, तो फिर से विरोध और धमकियों का सिलसिला शुरू हो गया। सवाल: आपने FIR दर्ज कराने का फैसला किन परिस्थितियों में लिया? उस दिन क्या हुआ था? जवाबः जब मैंने काम शुरू किया तो उनके लोगों की तरफ से फोन पर और मौके पर आकर काम रोकने की कोशिश की गई, लेकिन मेरे पास सभी कागजात सही थे, इसलिए मैंने काम नहीं रोका। इसके बाद अप्रैल में अचानक उनके लोग जमीन पर आए और वहां लगे सीसीटीवी कैमरे तोड़ दिए, काम कर रहे मजदूरों के साथ मारपीट की और फोन पर जान से मारने की धमकी भी दी। सवाल: FIR दर्ज होने के बाद क्या किसी तरह का दबाव, समझौता या धमकी मिली? जवाबः FIR दर्ज कराने के बाद मुझे किसी भी तरह का कोई दबाव, धमकी या समझौते का प्रयास नहीं हुआ है। सवाल: पुलिस जांच और अब तक की कार्रवाई से आप कितने संतुष्ट हैं? जवाबः अभी मेरा समय अच्छा चल रहा है, इसलिए राज्य सरकार और पुलिस की तरफ से जो भी कार्रवाई हो रही है, उससे मैं पूरी तरह संतुष्ट हूं। मुझे लगता है कि पुलिस सही तरीके से काम कर रही है और जांच भी ठीक दिशा में जा रही है। सवाल: हाईकोर्ट से गिरफ्तारी पर रोक मिलने के बाद अब आप इस मामले में आगे क्या चाहते हैं? जवाबः मुझे न्यायपालिका और बिहार पुलिस दोनों पर पूरा भरोसा है। मुझे विश्वास है कि मुझे न्याय मिलेगा। मैंने शुरुआत में ही डीआईजी से यह कहा था कि पहले मेरी जमीन के कागजात की जांच कर ली जाए, अगर कागजात गलत होते तो यह मामला सिविल में चला जाता और इस केस का कोई मतलब नहीं रह जाता। इधर, इस पूरे मामले पर विधायक ओसामा से भी बातचीत की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने कोर्ट में मामला कहकर बातचीत से इनकार कर दिया है। मेरी डेढ़ करोड़ की जमीन, समझिए फंस गई है। मैंने जिस पर्पस से ली थी, शायद वो अब काम नहीं हो पाएगा। सीवान में आज भी बहुत कुछ वैसा ही है। शहाबुद्दीन परिवार की नजर जिस चीज पर पड़ जाती है, उस पर वो अपना अधिकार जमा लेते हैं। 15 अप्रैल को हुई मारपीट की घटना के बाद मुझे यही महसूस होता है। मैं गोरखपुर में रहता हूं, गोपालगंज आता-जाता रहता हूं, मगर सीवान जाने में अब थोड़ा सोच-समझकर जाना पड़ता है। डर लगता है। पूर्व सांसद और बाहुबली शहाबुद्दीन के विधायक बेटे ओसामा शहाब पर मारपीट और जमीन विवाद की FIR कराने वाले डॉक्टर विनय तिवारी ने दैनिक भास्कर से बातचीत में ये बातें कही हैं। मंगलवार को इस केस में ओसामा शहाब को हाईकोर्ट ने गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने पुलिस से केस डायरी की मांग की है और अगली सुनवाई की तारीख 14 जून तय की है। डॉक्टर विनय तिवारी ने क्या-क्या आरोप लगाए हैं? पूरी घटना क्या थी? विवाद की शुरुआत कहां से हुई? हाईकोर्ट के फैसले के बाद केस की दिशा अब किस ओर जाएगी? सवाल-जवाब के जरिए पढ़िए पूरी रिपोर्ट.. पहले समझिए पूरा मामला क्या है पुलिस की FIR के मुताबिक, पूरा मामला सीवान जिले के महादेव थाने में एक जमीन विवाद से जुड़ा है, जिसकी शुरुआत अप्रैल 2026 में जब डॉक्टर विनय तिवारी ने जमीन खरीदने के बाद उस पर काम शुरू किया। उनका आरोप है कि शुरुआत में ओसामा शहाब और उनके लोगों ने इस जमीन पर आपत्ति जताई और इसे अपना बताते हुए काम रोकने की कोशिश की। इसके बाद उन्हें फोन कर और मौके पर आकर धमकाया गया, हालांकि उन्होंने अपने कागजात भी उनलोगों को दिखाए, लेकिन कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला। इस बीच जब इस साल फिर से काम शुरू किया गया तो आरोप है कि 15 अप्रैल 2026 को ओसामा शहाब और उनके समर्थकों ने मौके पर पहुंचकर CCTV तोड़ दिए, काम कर रहे लोगों के साथ मारपीट की और जान से मारने की धमकी दी। इसके बाद डॉक्टर विनय तिवारी ने महादेवा थाना में FIR दर्ज कराई, जिसमें जमीन कब्जा, मारपीट और धमकी के आरोप लगाए गए हैं। इसी केस में आगे चलकर कोर्ट में अग्रिम जमानत खारिज हुई, गिरफ्तारी वारंट जारी हुआ और अब पटना हाईकोर्ट ने फिलहाल गिरफ्तारी पर रोक लगाई है, जबकि पुलिस की छापेमारी के बावजूद आरोपी अभी तक नहीं मिल पाए हैं। गिरफ्तारी पर रोक लगने के बाद विनय तिवारी की दैनिक भास्कर से बातचीत
सवाल: सुनवाई टली, गिरफ्तारी पर भी रोक लग गई। इस पर आपका क्या कहना है?
जवाबः मैं एक डॉक्टर हूं, मुझे अपने डॉक्टरी पेशे की पूरी जानकारी है, लेकिन केस की धाराओं और कानूनी नियमों की बारीक जानकारी मेरे पास नहीं है। इस केस में मेरी तरफ से सरकारी वकील ही पैरवी कर रहे हैं, इसलिए कोर्ट में क्या बहस हुई, किन आधारों पर क्या दलीलें दी गईं और किस वजह से गिरफ्तारी पर रोक लगी, यह पूरी जानकारी वही बेहतर तरीके से बता पाएंगे।मुझे इस बात का भरोसा है कि वर्तमान में राज्य सरकार और पुलिस की कार्यवाही सही दिशा में है, इसलिए उम्मीद है कि अंत में न्याय मेरे ही पक्ष होगा। सवाल: जमीन विवाद की शुरुआत आखिर कब और कैसे हुई? जवाबः जब साल 2024 के नवंबर महीने में मैंने साढ़े तीन कट्ठे की यह जमीन खरीदी थी, तो शुरुआती समय में कोई बड़ा विवाद नहीं था, लेकिन पिछले साल जब मैंने उस जमीन पर काम शुरू किया, तब ओसामा शहाब के लोगों ने आपत्ति जताई और कहा कि यह जमीन उनकी है। इस पर मैंने खुद ओसामा शहाब से संपर्क किया, जहां उन्होंने फोन पर भी जमीन को लेकर दावा किया। इसके बाद मैंने अपने सभी वैध कागजात उन्हें उपलब्ध करा दिए और उनसे कहा गया कि जांच कराई जाएगी, लेकिन लंबे समय तक कोई जवाब नहीं मिला। इसी बीच जब इस साल दोबारा काम शुरू किया गया, तो फिर से विरोध और धमकियों का सिलसिला शुरू हो गया। सवाल: आपने FIR दर्ज कराने का फैसला किन परिस्थितियों में लिया? उस दिन क्या हुआ था? जवाबः जब मैंने काम शुरू किया तो उनके लोगों की तरफ से फोन पर और मौके पर आकर काम रोकने की कोशिश की गई, लेकिन मेरे पास सभी कागजात सही थे, इसलिए मैंने काम नहीं रोका। इसके बाद अप्रैल में अचानक उनके लोग जमीन पर आए और वहां लगे सीसीटीवी कैमरे तोड़ दिए, काम कर रहे मजदूरों के साथ मारपीट की और फोन पर जान से मारने की धमकी भी दी। सवाल: FIR दर्ज होने के बाद क्या किसी तरह का दबाव, समझौता या धमकी मिली? जवाबः FIR दर्ज कराने के बाद मुझे किसी भी तरह का कोई दबाव, धमकी या समझौते का प्रयास नहीं हुआ है। सवाल: पुलिस जांच और अब तक की कार्रवाई से आप कितने संतुष्ट हैं? जवाबः अभी मेरा समय अच्छा चल रहा है, इसलिए राज्य सरकार और पुलिस की तरफ से जो भी कार्रवाई हो रही है, उससे मैं पूरी तरह संतुष्ट हूं। मुझे लगता है कि पुलिस सही तरीके से काम कर रही है और जांच भी ठीक दिशा में जा रही है। सवाल: हाईकोर्ट से गिरफ्तारी पर रोक मिलने के बाद अब आप इस मामले में आगे क्या चाहते हैं? जवाबः मुझे न्यायपालिका और बिहार पुलिस दोनों पर पूरा भरोसा है। मुझे विश्वास है कि मुझे न्याय मिलेगा। मैंने शुरुआत में ही डीआईजी से यह कहा था कि पहले मेरी जमीन के कागजात की जांच कर ली जाए, अगर कागजात गलत होते तो यह मामला सिविल में चला जाता और इस केस का कोई मतलब नहीं रह जाता। इधर, इस पूरे मामले पर विधायक ओसामा से भी बातचीत की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने कोर्ट में मामला कहकर बातचीत से इनकार कर दिया है।  

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