बेगूसराय-पटना के बीच गंगा पर डबल ट्रैक रेलवे ब्रिज तैयार:42 बोगियों में गिट्टी लोडकर दौड़ाई गई मालगाड़ी, जुलाई से ट्रेनों की आवाजाही शुरू हो सकती है

बेगूसराय-पटना के बीच गंगा पर डबल ट्रैक रेलवे ब्रिज तैयार:42 बोगियों में गिट्टी लोडकर दौड़ाई गई मालगाड़ी, जुलाई से ट्रेनों की आवाजाही शुरू हो सकती है

गंगा नदी पर बेगूसराय और पटना के बीच बहुप्रतीक्षित नया डबल ट्रैक रेल पुल पूरी तरह तैयार हो गया है। राजेंद्र सेतु के समानांतर गंगा नदी पर बने हाथीदह-सिमरिया डबल ट्रैक रेल पुल का लोड टेस्ट (भार विक्षेपण परीक्षण) सफलतापूर्वक हो गया है। टेस्टिंग के दौरान राजेंद्र पुल स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 3 से 42 बिसियन स्टोन ब्लास्ट (गिट्टी) लदी मालगाड़ी को नए पुल पर दौड़ाया गया। इस ट्रेन का कुल वजन लगभग 3681.20 टन था। पुल के पूर्वी रेल ट्रैक (डाउन लाइन) पर ट्रेन को पहले 5 से 10 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चलाकर डायनेमिक टेस्ट किया गया। वापसी में ट्रेन की रफ्तार बढ़ाकर 30 किलोमीटर प्रति घंटा की गई। इस दौरान IRCON और Afcons के इंजीनियरों ने पुल के पिलरों और गर्डर्स पर पड़ने वाले दबाव का सूक्ष्मता से निरीक्षण किया। एक जून से रेल ब्लॉक लेकर नॉन इंटरलॉकिंग का शुरू होगा काम अगली कड़ी में अब 1 जून से रेल ब्लॉक लेकर एनआई (Non-Interlocking) का काम शुरू होगा। इसमें सिग्नल, केबल और पॉइंट के सभी पहलुओं की तैयारी को पूरा कर जांच की जाएगी। तकनीकी कार्यों के बाद कमिश्नर ऑफ रेलवे सेफ्टी (CRS) की ओर से निरीक्षण किया जाएगा, जो ट्रेनों की अंतिम गति सीमा तय करेंगे। एनआई कार्य एवं सीआरएस का निरीक्षण सहित सब कुछ तय योजना के अनुसार रहा तो जुलाई में इस पुल को आम जनता और रेल यातायात के लिए समर्पित कर दिया जाएगा। संभावना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस महत्वपूर्ण रेल पुल का लोकार्पण करेंगे। पीएम मोदी ने 2018 में परियोजना की रखी थी आधारशिला इस महत्वाकांक्षी परियोजना की आधारशिला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2018 में रखी थी। करीब 1700 करोड़ रुपए की लागत से बने इस पुल की लंबाई 1.86 किलोमीटर है और यह 18 पिलरों पर टिका है। पुल का निर्माण एफकॉन एजेंसी ने किया है। लोड टेस्ट के दौरान रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ चालक मुकेश कुमार एवं गार्ड रविंद्र कुमार थे। रेलवे अधिकारियों ने बताया कि लोड टेस्ट सफल रहा, शेष तकनीकी कार्य जल्द कर लिए जाएंगे। आजादी के बाद भारत में गंगा नदी पर सबसे पहला पुल सिमरिया और मोकामा के बीच बना था। 1959 में प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने इस रेल-सह-सड़क पुल का उद्घाटन किया था। छह दशकों तक राजेंद्र सेतु ने बिहार की जीवनरेखा के रूप में कार्य किया। लेकिन समय बीतने के साथ, पुल पुराना हो गया और भारी मालगाड़ियों का बोझ सहने की उसकी क्षमता कम होने लगी। आखिर नए रेल ब्रिज की जरूरत क्यों पड़ी? वर्तमान में राजेंद्र सेतु (पुराना पुल) की जर्जर स्थिति और सिंगल ट्रैक होने के कारण ट्रेनों को सिमरिया या हाथीदह की ओर घंटों सिग्नल का इंतजार करना पड़ता है। इन्हीं चुनौतियों को देखते हुए केंद्र सरकार और रेल मंत्रालय ने राजेंद्र सेतु के समानांतर एक नए रेल पुल के निर्माण को मंजूरी दी। नया डबल ट्रैक पुल चालू होने के बाद यह समस्या जड़ से खत्म हो जाएगी। यह नया पुल अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग कर बनाया गया है, जो अगले 100 वर्षों की जरूरतों को ध्यान में रख कर बनाया गया है। जो भारी मालगाड़ियों और हाई-स्पीड वंदे भारत जैसी ट्रेनों के अनुकूल है। पुल पर 160 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से ट्रेन को दौड़ने की क्षमता वाले उक्त पुल की खासियत है कि ट्रेन के पुल में प्रवेश करने के दौरान भी इसकी स्पीड में कोई कमी नहीं आएगी। आमतौर पर देखा जाता है कि अधिकतर पुल में ट्रेन को प्रवेश करने के साथ ही उसकी स्पीड कम हो जाती है। लेकिन इस पुल में अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग किया गया है, जिससे पुल में ट्रेन के प्रवेश करने पर स्पीड कम नहीं होगी। वेल फाउंडेशन तकनीक का उपयोग कर इसके पिलरों को गहराई तक धंसाया गया है, जिससे भीषण भूकंप और बाढ़ को झेल सके। गंगा नदी पर बेगूसराय और पटना के बीच बहुप्रतीक्षित नया डबल ट्रैक रेल पुल पूरी तरह तैयार हो गया है। राजेंद्र सेतु के समानांतर गंगा नदी पर बने हाथीदह-सिमरिया डबल ट्रैक रेल पुल का लोड टेस्ट (भार विक्षेपण परीक्षण) सफलतापूर्वक हो गया है। टेस्टिंग के दौरान राजेंद्र पुल स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 3 से 42 बिसियन स्टोन ब्लास्ट (गिट्टी) लदी मालगाड़ी को नए पुल पर दौड़ाया गया। इस ट्रेन का कुल वजन लगभग 3681.20 टन था। पुल के पूर्वी रेल ट्रैक (डाउन लाइन) पर ट्रेन को पहले 5 से 10 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चलाकर डायनेमिक टेस्ट किया गया। वापसी में ट्रेन की रफ्तार बढ़ाकर 30 किलोमीटर प्रति घंटा की गई। इस दौरान IRCON और Afcons के इंजीनियरों ने पुल के पिलरों और गर्डर्स पर पड़ने वाले दबाव का सूक्ष्मता से निरीक्षण किया। एक जून से रेल ब्लॉक लेकर नॉन इंटरलॉकिंग का शुरू होगा काम अगली कड़ी में अब 1 जून से रेल ब्लॉक लेकर एनआई (Non-Interlocking) का काम शुरू होगा। इसमें सिग्नल, केबल और पॉइंट के सभी पहलुओं की तैयारी को पूरा कर जांच की जाएगी। तकनीकी कार्यों के बाद कमिश्नर ऑफ रेलवे सेफ्टी (CRS) की ओर से निरीक्षण किया जाएगा, जो ट्रेनों की अंतिम गति सीमा तय करेंगे। एनआई कार्य एवं सीआरएस का निरीक्षण सहित सब कुछ तय योजना के अनुसार रहा तो जुलाई में इस पुल को आम जनता और रेल यातायात के लिए समर्पित कर दिया जाएगा। संभावना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस महत्वपूर्ण रेल पुल का लोकार्पण करेंगे। पीएम मोदी ने 2018 में परियोजना की रखी थी आधारशिला इस महत्वाकांक्षी परियोजना की आधारशिला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2018 में रखी थी। करीब 1700 करोड़ रुपए की लागत से बने इस पुल की लंबाई 1.86 किलोमीटर है और यह 18 पिलरों पर टिका है। पुल का निर्माण एफकॉन एजेंसी ने किया है। लोड टेस्ट के दौरान रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ चालक मुकेश कुमार एवं गार्ड रविंद्र कुमार थे। रेलवे अधिकारियों ने बताया कि लोड टेस्ट सफल रहा, शेष तकनीकी कार्य जल्द कर लिए जाएंगे। आजादी के बाद भारत में गंगा नदी पर सबसे पहला पुल सिमरिया और मोकामा के बीच बना था। 1959 में प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने इस रेल-सह-सड़क पुल का उद्घाटन किया था। छह दशकों तक राजेंद्र सेतु ने बिहार की जीवनरेखा के रूप में कार्य किया। लेकिन समय बीतने के साथ, पुल पुराना हो गया और भारी मालगाड़ियों का बोझ सहने की उसकी क्षमता कम होने लगी। आखिर नए रेल ब्रिज की जरूरत क्यों पड़ी? वर्तमान में राजेंद्र सेतु (पुराना पुल) की जर्जर स्थिति और सिंगल ट्रैक होने के कारण ट्रेनों को सिमरिया या हाथीदह की ओर घंटों सिग्नल का इंतजार करना पड़ता है। इन्हीं चुनौतियों को देखते हुए केंद्र सरकार और रेल मंत्रालय ने राजेंद्र सेतु के समानांतर एक नए रेल पुल के निर्माण को मंजूरी दी। नया डबल ट्रैक पुल चालू होने के बाद यह समस्या जड़ से खत्म हो जाएगी। यह नया पुल अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग कर बनाया गया है, जो अगले 100 वर्षों की जरूरतों को ध्यान में रख कर बनाया गया है। जो भारी मालगाड़ियों और हाई-स्पीड वंदे भारत जैसी ट्रेनों के अनुकूल है। पुल पर 160 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से ट्रेन को दौड़ने की क्षमता वाले उक्त पुल की खासियत है कि ट्रेन के पुल में प्रवेश करने के दौरान भी इसकी स्पीड में कोई कमी नहीं आएगी। आमतौर पर देखा जाता है कि अधिकतर पुल में ट्रेन को प्रवेश करने के साथ ही उसकी स्पीड कम हो जाती है। लेकिन इस पुल में अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग किया गया है, जिससे पुल में ट्रेन के प्रवेश करने पर स्पीड कम नहीं होगी। वेल फाउंडेशन तकनीक का उपयोग कर इसके पिलरों को गहराई तक धंसाया गया है, जिससे भीषण भूकंप और बाढ़ को झेल सके।  

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