रेस्क्यू बच्चों को बाल गृह से मुक्त कराने में लग सकता है 5-6 दिन

रेस्क्यू बच्चों को बाल गृह से मुक्त कराने में लग सकता है 5-6 दिन

आए थे हरि भजन को ओटन लगे कपास..। यह कहावत झारखंड के उन 21 छोटे-छोटे बच्चों पर चरितार्थ हो रही है, जिन्हें पढने के लिए उनके अभिभावकों ने मोतिहारी भेजा, लेकिन गर्मी की छुट्टी में घर जाने के बदले वे बाल गृह पहुंच गए। बताया जाता है कि रेल पुलिस ने इन बच्चों को बेतिया स्थित बाल गृह में भेजने के बाद बाहर निकलने के लिए कानूनी प्रक्रिया मंे 5-6 दिन का समय लग सकता है। बुधवार को झारखंड सरकार की विशेष टीम के मोतिहारी पहुंचने की उम्मीद है। यह टीम सीडब्लूसी से परमिशन लेकर अपने साथ इन बच्चों को झारखंड के गोडा ले जाएगी। वहां के सीडब्लूसी में उपस्थित करने के बाद पहचान कर बच्चों को उनके परिजनों को सौंपेंगी। इधर, मंगलवार को झारखंड से पहुंचे बच्चों के गार्जियन सीडब्लूसी से लेकर बेतिया कोर्ट व बाल गृह का चक्कर लगाते रहे। बाल गृह जाकर बच्चों को ढांढस बंधाया और उन्हें शीघ्र घर ले चलने की बात कही। इन सभी बच्चों के गार्जियन ने डीएम सौरभ जोरवाल से बताया कि उन्होंने ही अपने बच्चों को पढ़ने के लिए मोतिहारी भेजा था। मानव तस्करी से संबंधित कोई बात नहीं है। इधर, जीआरपी में केस दर्ज करने के बाद आरोपी फोन्सिस िकस्पोटा को जेल भेज दिया है। जीआरपी प्रभारी संतोष कुमार ने कहा कि मामले का अनुसंधान किया जा रहा है, जो भी उचित होगा उसके अनुसार कार्य किया जाएगा। थानाध्यक्ष ने कहा कि आरोपी ने पूछताछ में बताया कि वह तीन साला से चांदमारी मोहल्ला में किराए के मकान में रहकर पहले मोहल्ले में ट्यूशन पढ़ाने का काम करता था। इससे पहले वे डीएवी मंे शिक्षक के रुप में काम करता था। पिछले वर्ष उसकी शादी हो गई तो वह अपने गांव व आसपास में रहने वाले रिश्तेदारों के बच्चों को मोतिहारी लाकर किराए के घर में रखकर कोचिंग पढ़ाता था। उसकी पत्नी खाना बनाकर सभी बच्चों को खिलाती थी और वह इन बच्चों को पढ़ाता था। कई बच्चों को शहर के डीएवी, संत फ्रांसिस स्कूलों में नामांकन भी कराया गया है। सभी बच्चों को बेतिया स्थित बाल गृह में सुरक्षित रखा गया है। झारखंड सरकार की विशेष टीम के बुधवार को आने की संभावना है। टीम को इन बच्चांे को सौंप दिया जाएगा। इसके बाद वे अपने साथ अपने जिले में ले जाकर सीडब्लूसी में उपस्थित करने के बाद पहचान कर गार्जियन को सौंपेंगे। -ओमप्रकाश चंद्र सिंह, सदस्य सीडब्लूसी आए थे हरि भजन को ओटन लगे कपास..। यह कहावत झारखंड के उन 21 छोटे-छोटे बच्चों पर चरितार्थ हो रही है, जिन्हें पढने के लिए उनके अभिभावकों ने मोतिहारी भेजा, लेकिन गर्मी की छुट्टी में घर जाने के बदले वे बाल गृह पहुंच गए। बताया जाता है कि रेल पुलिस ने इन बच्चों को बेतिया स्थित बाल गृह में भेजने के बाद बाहर निकलने के लिए कानूनी प्रक्रिया मंे 5-6 दिन का समय लग सकता है। बुधवार को झारखंड सरकार की विशेष टीम के मोतिहारी पहुंचने की उम्मीद है। यह टीम सीडब्लूसी से परमिशन लेकर अपने साथ इन बच्चों को झारखंड के गोडा ले जाएगी। वहां के सीडब्लूसी में उपस्थित करने के बाद पहचान कर बच्चों को उनके परिजनों को सौंपेंगी। इधर, मंगलवार को झारखंड से पहुंचे बच्चों के गार्जियन सीडब्लूसी से लेकर बेतिया कोर्ट व बाल गृह का चक्कर लगाते रहे। बाल गृह जाकर बच्चों को ढांढस बंधाया और उन्हें शीघ्र घर ले चलने की बात कही। इन सभी बच्चों के गार्जियन ने डीएम सौरभ जोरवाल से बताया कि उन्होंने ही अपने बच्चों को पढ़ने के लिए मोतिहारी भेजा था। मानव तस्करी से संबंधित कोई बात नहीं है। इधर, जीआरपी में केस दर्ज करने के बाद आरोपी फोन्सिस िकस्पोटा को जेल भेज दिया है। जीआरपी प्रभारी संतोष कुमार ने कहा कि मामले का अनुसंधान किया जा रहा है, जो भी उचित होगा उसके अनुसार कार्य किया जाएगा। थानाध्यक्ष ने कहा कि आरोपी ने पूछताछ में बताया कि वह तीन साला से चांदमारी मोहल्ला में किराए के मकान में रहकर पहले मोहल्ले में ट्यूशन पढ़ाने का काम करता था। इससे पहले वे डीएवी मंे शिक्षक के रुप में काम करता था। पिछले वर्ष उसकी शादी हो गई तो वह अपने गांव व आसपास में रहने वाले रिश्तेदारों के बच्चों को मोतिहारी लाकर किराए के घर में रखकर कोचिंग पढ़ाता था। उसकी पत्नी खाना बनाकर सभी बच्चों को खिलाती थी और वह इन बच्चों को पढ़ाता था। कई बच्चों को शहर के डीएवी, संत फ्रांसिस स्कूलों में नामांकन भी कराया गया है। सभी बच्चों को बेतिया स्थित बाल गृह में सुरक्षित रखा गया है। झारखंड सरकार की विशेष टीम के बुधवार को आने की संभावना है। टीम को इन बच्चांे को सौंप दिया जाएगा। इसके बाद वे अपने साथ अपने जिले में ले जाकर सीडब्लूसी में उपस्थित करने के बाद पहचान कर गार्जियन को सौंपेंगे। -ओमप्रकाश चंद्र सिंह, सदस्य सीडब्लूसी  

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