नालंदा के अस्थावां थाना क्षेत्र के सकरावां गांव में मंगलवार को उस समय स्थिति अनियंत्रित हो गई, जब एक 14 वर्षीय किशोर की नींबू तोड़ने के विवाद में पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। हालात इस कदर बेकाबू हो गए कि नालंदा जिला प्रशासन को स्थिति संभालने के लिए करीब 300 पुलिसकर्मियों की भारी फौज उतारनी पड़ी। घटना के बाद पूरा गांव पुलिस छावनी में तब्दील हो गया है। नालंदा के लगभग सभी थानों के अध्यक्षों को मौके पर तैनात किया गया है, वहीं पड़ोसी जिले शेखपुरा और पटना के बाढ़ अनुमंडल से भी अतिरिक्त पुलिस बल को बुलाया गया है। भारी संख्या में पुलिस बल की मौजूदगी के बाद ही उग्र ग्रामीणों को शांत कराया जा सका और स्थिति नियंत्रण में आई। पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए 11 लोगों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज की है और अब तक कुल 12 लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है। घटना से जुड़ी तीन तस्वीरें देखिए घटना की संवेदनशीलता को देख नालंदा एसपी ने खुद संभाला मोर्चा घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए नालंदा एसपी भारत सोनी स्वयं मोर्चा संभाले हुए हैं। उन्होंने बताया कि सकरावां गांव में वर्तमान में भारी पुलिस बल (जाब्ता) और मजिस्ट्रेट की तैनाती कर दी गई है। 300 जवानों की तैनाती का मुख्य उद्देश्य गांव में किसी भी प्रकार की सांप्रदायिक या सामाजिक हिंसा को रोकना और कानून-व्यवस्था बहाल करना था। जब पुलिस की टीम शुरुआत में गांव पहुंची थी, तो उसे उग्र भीड़ के भारी प्रतिरोध का सामना करना पड़ा। ग्रामीणों के गुस्से को देखते हुए पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ी और जब भीड़ ने रोड़ेबाजी शुरू की, तो आत्मरक्षार्थ और व्यवस्था कायम करने के लिए पुलिस को हल्का बल प्रयोग करना पड़ा। इस दौरान कुछ महिलाए भी चोटिल हो गई। जिन्होंने पुलिस पर लाठीचार्ज का आरोप लगाया है। पथराव में आधा दर्जन से अधिक पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं, जिनका उपचार कराया जा रहा है। नींबू उठाने के बाद आरोपी ने पीट-पीटकर नाबालिग को मार डाला विवाद की जड़ बेहद मामूली थी, जिसने एक हंसते-खेलते परिवार को तबाह कर दिया। मृतक शुभम कुमार (14 वर्ष) मंगलवार की दोपहर करीब 11:30 बजे स्कूल से लौटा था। वह अपने एक दोस्त के साथ खलील अंसारी उर्फ गोरे के बागान की ओर गया था। आरोप है कि शुभम ने वहां गिरा हुआ एक नींबू उठा लिया, जिससे नाराज होकर खलील अंसारी और उसके परिजनों ने उस पर जानलेवा हमला कर दिया। मासूम शुभम को लाठी-डंडों से इतना पीटा गया कि उसने अस्पताल ले जाने के दौरान रास्ते में ही दम तोड़ दिया। मौत की खबर फैलते ही सैकड़ों ग्रामीण आरोपियों के घर को घेरने निकल पड़े, जिसके बाद प्रशासन को इतने बड़े पैमाने पर पुलिस बल की तैनाती करनी पड़ी। पीड़ित पिता राजकुमार पासवान, जो पटना में ऑटो चलाकर परिवार पालते हैं, इस घटना से पूरी तरह टूट चुके हैं। उन्होंने बताया कि एक साल पहले ही उनके एक बच्चे की बीमारी से मौत हुई थी, जिसका कर्ज वे आज तक चुका रहे हैं। अब दूसरे बेटे की हत्या ने उनका सब कुछ छीन लिया है। जिला प्रशासन ने पीड़ित परिवार को सांत्वना देते हुए 5 लाख रुपये की तत्काल सहायता राशि प्रदान की है। जिला इंटेलिजेंस की टीमें लगातार सर्वे में जुटी हैं: नालंदा एसपी एसपी भारत सोनी ने बताया कि साक्ष्य जुटाने के लिए एफएसएल (FSL) की टीम को मौके पर बुलाकर बारीकी से निरीक्षण कराया गया है। जिला इंटेलिजेंस की टीमें भी लगातार क्षेत्र में सर्वे कर रही हैं ताकि किसी भी प्रकार की अफवाह को फैलने से रोका जा सके। फिलहाल, भारी पुलिसिया पहरे के बीच शव का पोस्टमार्टम के लिए बाढ़ के उमानाथ अंतिम संस्कार के लिए भेजा गया है। नालंदा के अस्थावां थाना क्षेत्र के सकरावां गांव में मंगलवार को उस समय स्थिति अनियंत्रित हो गई, जब एक 14 वर्षीय किशोर की नींबू तोड़ने के विवाद में पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। हालात इस कदर बेकाबू हो गए कि नालंदा जिला प्रशासन को स्थिति संभालने के लिए करीब 300 पुलिसकर्मियों की भारी फौज उतारनी पड़ी। घटना के बाद पूरा गांव पुलिस छावनी में तब्दील हो गया है। नालंदा के लगभग सभी थानों के अध्यक्षों को मौके पर तैनात किया गया है, वहीं पड़ोसी जिले शेखपुरा और पटना के बाढ़ अनुमंडल से भी अतिरिक्त पुलिस बल को बुलाया गया है। भारी संख्या में पुलिस बल की मौजूदगी के बाद ही उग्र ग्रामीणों को शांत कराया जा सका और स्थिति नियंत्रण में आई। पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए 11 लोगों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज की है और अब तक कुल 12 लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है। घटना से जुड़ी तीन तस्वीरें देखिए घटना की संवेदनशीलता को देख नालंदा एसपी ने खुद संभाला मोर्चा घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए नालंदा एसपी भारत सोनी स्वयं मोर्चा संभाले हुए हैं। उन्होंने बताया कि सकरावां गांव में वर्तमान में भारी पुलिस बल (जाब्ता) और मजिस्ट्रेट की तैनाती कर दी गई है। 300 जवानों की तैनाती का मुख्य उद्देश्य गांव में किसी भी प्रकार की सांप्रदायिक या सामाजिक हिंसा को रोकना और कानून-व्यवस्था बहाल करना था। जब पुलिस की टीम शुरुआत में गांव पहुंची थी, तो उसे उग्र भीड़ के भारी प्रतिरोध का सामना करना पड़ा। ग्रामीणों के गुस्से को देखते हुए पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ी और जब भीड़ ने रोड़ेबाजी शुरू की, तो आत्मरक्षार्थ और व्यवस्था कायम करने के लिए पुलिस को हल्का बल प्रयोग करना पड़ा। इस दौरान कुछ महिलाए भी चोटिल हो गई। जिन्होंने पुलिस पर लाठीचार्ज का आरोप लगाया है। पथराव में आधा दर्जन से अधिक पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं, जिनका उपचार कराया जा रहा है। नींबू उठाने के बाद आरोपी ने पीट-पीटकर नाबालिग को मार डाला विवाद की जड़ बेहद मामूली थी, जिसने एक हंसते-खेलते परिवार को तबाह कर दिया। मृतक शुभम कुमार (14 वर्ष) मंगलवार की दोपहर करीब 11:30 बजे स्कूल से लौटा था। वह अपने एक दोस्त के साथ खलील अंसारी उर्फ गोरे के बागान की ओर गया था। आरोप है कि शुभम ने वहां गिरा हुआ एक नींबू उठा लिया, जिससे नाराज होकर खलील अंसारी और उसके परिजनों ने उस पर जानलेवा हमला कर दिया। मासूम शुभम को लाठी-डंडों से इतना पीटा गया कि उसने अस्पताल ले जाने के दौरान रास्ते में ही दम तोड़ दिया। मौत की खबर फैलते ही सैकड़ों ग्रामीण आरोपियों के घर को घेरने निकल पड़े, जिसके बाद प्रशासन को इतने बड़े पैमाने पर पुलिस बल की तैनाती करनी पड़ी। पीड़ित पिता राजकुमार पासवान, जो पटना में ऑटो चलाकर परिवार पालते हैं, इस घटना से पूरी तरह टूट चुके हैं। उन्होंने बताया कि एक साल पहले ही उनके एक बच्चे की बीमारी से मौत हुई थी, जिसका कर्ज वे आज तक चुका रहे हैं। अब दूसरे बेटे की हत्या ने उनका सब कुछ छीन लिया है। जिला प्रशासन ने पीड़ित परिवार को सांत्वना देते हुए 5 लाख रुपये की तत्काल सहायता राशि प्रदान की है। जिला इंटेलिजेंस की टीमें लगातार सर्वे में जुटी हैं: नालंदा एसपी एसपी भारत सोनी ने बताया कि साक्ष्य जुटाने के लिए एफएसएल (FSL) की टीम को मौके पर बुलाकर बारीकी से निरीक्षण कराया गया है। जिला इंटेलिजेंस की टीमें भी लगातार क्षेत्र में सर्वे कर रही हैं ताकि किसी भी प्रकार की अफवाह को फैलने से रोका जा सके। फिलहाल, भारी पुलिसिया पहरे के बीच शव का पोस्टमार्टम के लिए बाढ़ के उमानाथ अंतिम संस्कार के लिए भेजा गया है।


