मोतिहारी शिक्षा विभाग एक बार फिर सवालों के घेरे में है। इस बार मामला सरकारी स्कूलों में बच्चों के लिए खरीदी गई खेल सामग्री की गुणवत्ता और खरीद में अनियमितता से जुड़ा है। इसका खुलासा माध्यमिक जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (DPO) नित्यम कुमार गौरव द्वारा किए गए निरीक्षण में हुआ। यह जांच जिलाधिकारी सौरभ जोरवाल के निर्देश पर की गई थी। अरेराज, चिरैया, रामगढ़वा, तुरकौलिया और हरसिद्धि सहित एक दर्जन से अधिक स्कूलों को पायलट प्रोजेक्ट के तहत जांचा गया। निरीक्षण के दौरान लगभग सभी स्कूलों में खेल सामग्री की गुणवत्ता खराब पाई गई और कई जगहों पर सामग्री की संख्या भी निर्धारित मानकों से कम मिली। चेतावनी के बावजूद 31 मार्च तक आवंटित राशि निकाल ली थी डीपीओ नित्यम कुमार गौरव ने बताया कि अभिभावकों से लगातार शिकायतें मिल रही थीं, जिसके बाद उन्होंने स्कूलों का औचक निरीक्षण किया। जांच में यह भी सामने आया कि कई स्कूलों ने पूर्व में चेतावनी के बावजूद 31 मार्च तक आवंटित राशि निकाल ली थी, लेकिन उसके अनुरूप खेल सामग्री की खरीद नहीं की गई। विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए बिहार सरकार ने बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए हाई स्कूलों को 25 हजार रुपये, मिडिल स्कूलों को 10 हजार रुपये और प्राथमिक विद्यालयों को 5 हजार रुपये की राशि खेल सामग्री खरीदने के लिए उपलब्ध कराई थी। इस राशि के उपयोग में सामने आई अनियमितता ने विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस पूरे मामले के सामने आने के बाद शिक्षा विभाग की किरकिरी हो रही है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस पर क्या कार्रवाई करता है और दोषी अधिकारियों व कर्मियों के खिलाफ क्या कदम उठाए जाते हैं। मोतिहारी शिक्षा विभाग एक बार फिर सवालों के घेरे में है। इस बार मामला सरकारी स्कूलों में बच्चों के लिए खरीदी गई खेल सामग्री की गुणवत्ता और खरीद में अनियमितता से जुड़ा है। इसका खुलासा माध्यमिक जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (DPO) नित्यम कुमार गौरव द्वारा किए गए निरीक्षण में हुआ। यह जांच जिलाधिकारी सौरभ जोरवाल के निर्देश पर की गई थी। अरेराज, चिरैया, रामगढ़वा, तुरकौलिया और हरसिद्धि सहित एक दर्जन से अधिक स्कूलों को पायलट प्रोजेक्ट के तहत जांचा गया। निरीक्षण के दौरान लगभग सभी स्कूलों में खेल सामग्री की गुणवत्ता खराब पाई गई और कई जगहों पर सामग्री की संख्या भी निर्धारित मानकों से कम मिली। चेतावनी के बावजूद 31 मार्च तक आवंटित राशि निकाल ली थी डीपीओ नित्यम कुमार गौरव ने बताया कि अभिभावकों से लगातार शिकायतें मिल रही थीं, जिसके बाद उन्होंने स्कूलों का औचक निरीक्षण किया। जांच में यह भी सामने आया कि कई स्कूलों ने पूर्व में चेतावनी के बावजूद 31 मार्च तक आवंटित राशि निकाल ली थी, लेकिन उसके अनुरूप खेल सामग्री की खरीद नहीं की गई। विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए बिहार सरकार ने बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए हाई स्कूलों को 25 हजार रुपये, मिडिल स्कूलों को 10 हजार रुपये और प्राथमिक विद्यालयों को 5 हजार रुपये की राशि खेल सामग्री खरीदने के लिए उपलब्ध कराई थी। इस राशि के उपयोग में सामने आई अनियमितता ने विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस पूरे मामले के सामने आने के बाद शिक्षा विभाग की किरकिरी हो रही है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस पर क्या कार्रवाई करता है और दोषी अधिकारियों व कर्मियों के खिलाफ क्या कदम उठाए जाते हैं।


