अररिया जिला मुख्यालय के त्रिसुलिया घाट पर परमान नदी के किनारे स्थित शवदाह गृह को ‘बाबा खरगेश्वर नाथ सह मां खरगेश्वरी मोक्ष धाम’ के नाम से विकसित किया गया है। इस आधुनिक मुक्तिधाम का लोकार्पण सोमवार देर रात करीब 10 बजे अररिया के सांसद प्रदीप कुमार सिंह, भाजपा जिलाध्यक्ष आदित्य नारायण झा, मुख्य पार्षद विजय मिश्रा, उपमुख्य पार्षद गौतम साह और अन्य जनप्रतिनिधियों ने संयुक्त रूप से फीता काटकर किया। 4.3 करोड़ रुपए की लागत से बनाया यह मुक्तिधाम बिहार सरकार की महत्वाकांक्षी योजना सात निश्चय-2 के तहत 4.3 करोड़ रुपए की लागत से बनाया गया है। इसमें इलेक्ट्रॉनिक और पारंपरिक लकड़ी से अंतिम संस्कार दोनों की व्यवस्था की गई है। अररिया जिला वासियों, खासकर हिंदू समुदाय के लिए, इसे एक ऐतिहासिक उपलब्धि माना जा रहा है। अब जिले के लोगों को अंतिम संस्कार के लिए दूसरे जिलों या शहरों की ओर रुख नहीं करना पड़ेगा। कीचड़ भरे रास्तों के कारण यात्रा होती है कठिन इस अवसर पर अररिया सांसद प्रदीप कुमार सिंह ने बताया कि यह अररिया जिला वासियों की बहुत पुरानी और लंबित मांग थी। जिला मुख्यालय होने के बावजूद यहां मुक्तिधाम नहीं था। खासकर बरसात के मौसम में शव लेकर पहुंचने पर काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। नदी का जलस्तर बढ़ने और कीचड़ भरे रास्तों के कारण अंतिम यात्रा और भी कठिन हो जाती थी। उन्होंने नगर परिषद के मुख्य पार्षद विजय मिश्रा और उपमुख्य पार्षद गौतम साह के प्रयासों की सराहना की। सरकारी दफ्तरों के नहीं काटने होंगे चक्कर सांसद ने आगे कहा कि इस मुक्तिधाम में ऐसी व्यवस्था की गई है कि यहां आने वाले हर शव का अंतिम संस्कार पूर्ण होने के बाद डेथ सर्टिफिकेट भी उसी स्थान पर जारी कर दिया जाएगा। इससे आम लोगों को विभिन्न सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। यह सुविधा विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों और कमजोर वर्ग के लोगों के लिए राहत भरी साबित होगी। नए शवदाह गृह में कई आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। इनमें शव रखने के लिए पर्याप्त स्थान, वेटिंग रूम, शौचालय, बिजली-पानी की सुव्यवस्था और पर्यावरण अनुकूल क्रीमेशन सिस्टम शामिल है। इलेक्ट्रॉनिक क्रीमेशन यूनिट से समय की बचत होगी और लकड़ी के उपयोग में भी कमी आएगी, जो पर्यावरण की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। नगर परिषद के मुख्य पार्षद विजय मिश्रा ने बताया कि इस परियोजना को पूरा करने में काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के समन्वय से काम समय पर पूरा हो गया।
मुक्तिधाम बनेगा धार्मिक केंद्र उपमुख्य पार्षद गौतम साह ने कहा कि यह मुक्तिधाम सिर्फ एक इमारत नहीं, बल्कि पूरे जिले के लिए भावनात्मक और धार्मिक केंद्र बनेगा। जहां एक न एक दिन सभी को आना है, वहां सुविधाजनक और सम्मानजनक व्यवस्था होनी चाहिए। अररिया जिले में बढ़ती जनसंख्या और शहरीकरण को देखते हुए इस मुक्तिधाम की मांग लंबे समय से की जा रही थी। स्थानीय स्तर पर ही बेहतर सुविधा उपलब्ध हो जाने से न केवल समय और धन की बचत होगी, बल्कि अंतिम संस्कार की प्रक्रिया भी शांतिपूर्ण और गरिमापूर्ण तरीके से पूरी हो सकेगी। इस लोकार्पण समारोह में स्थानीय पार्षद, सामाजिक संगठनों के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में आम नागरिक भी मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान सभी ने इस मुक्तिधाम को जिले की सकारात्मक दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। अब अररिया जिला न केवल विकास की नई मिसाल पेश कर रहा है, बल्कि अपने नागरिकों को अंतिम समय में भी सम्मानजनक विदाई देने की व्यवस्था सुनिश्चित कर रहा है। बाबा खरगेश्वर नाथ सह मां खरगेश्वरी मोक्ष धाम वाकई जिले के हिंदू समुदाय की आस्था और भावनाओं का केंद्र बन गया है। अररिया जिला मुख्यालय के त्रिसुलिया घाट पर परमान नदी के किनारे स्थित शवदाह गृह को ‘बाबा खरगेश्वर नाथ सह मां खरगेश्वरी मोक्ष धाम’ के नाम से विकसित किया गया है। इस आधुनिक मुक्तिधाम का लोकार्पण सोमवार देर रात करीब 10 बजे अररिया के सांसद प्रदीप कुमार सिंह, भाजपा जिलाध्यक्ष आदित्य नारायण झा, मुख्य पार्षद विजय मिश्रा, उपमुख्य पार्षद गौतम साह और अन्य जनप्रतिनिधियों ने संयुक्त रूप से फीता काटकर किया। 4.3 करोड़ रुपए की लागत से बनाया यह मुक्तिधाम बिहार सरकार की महत्वाकांक्षी योजना सात निश्चय-2 के तहत 4.3 करोड़ रुपए की लागत से बनाया गया है। इसमें इलेक्ट्रॉनिक और पारंपरिक लकड़ी से अंतिम संस्कार दोनों की व्यवस्था की गई है। अररिया जिला वासियों, खासकर हिंदू समुदाय के लिए, इसे एक ऐतिहासिक उपलब्धि माना जा रहा है। अब जिले के लोगों को अंतिम संस्कार के लिए दूसरे जिलों या शहरों की ओर रुख नहीं करना पड़ेगा। कीचड़ भरे रास्तों के कारण यात्रा होती है कठिन इस अवसर पर अररिया सांसद प्रदीप कुमार सिंह ने बताया कि यह अररिया जिला वासियों की बहुत पुरानी और लंबित मांग थी। जिला मुख्यालय होने के बावजूद यहां मुक्तिधाम नहीं था। खासकर बरसात के मौसम में शव लेकर पहुंचने पर काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। नदी का जलस्तर बढ़ने और कीचड़ भरे रास्तों के कारण अंतिम यात्रा और भी कठिन हो जाती थी। उन्होंने नगर परिषद के मुख्य पार्षद विजय मिश्रा और उपमुख्य पार्षद गौतम साह के प्रयासों की सराहना की। सरकारी दफ्तरों के नहीं काटने होंगे चक्कर सांसद ने आगे कहा कि इस मुक्तिधाम में ऐसी व्यवस्था की गई है कि यहां आने वाले हर शव का अंतिम संस्कार पूर्ण होने के बाद डेथ सर्टिफिकेट भी उसी स्थान पर जारी कर दिया जाएगा। इससे आम लोगों को विभिन्न सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। यह सुविधा विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों और कमजोर वर्ग के लोगों के लिए राहत भरी साबित होगी। नए शवदाह गृह में कई आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। इनमें शव रखने के लिए पर्याप्त स्थान, वेटिंग रूम, शौचालय, बिजली-पानी की सुव्यवस्था और पर्यावरण अनुकूल क्रीमेशन सिस्टम शामिल है। इलेक्ट्रॉनिक क्रीमेशन यूनिट से समय की बचत होगी और लकड़ी के उपयोग में भी कमी आएगी, जो पर्यावरण की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। नगर परिषद के मुख्य पार्षद विजय मिश्रा ने बताया कि इस परियोजना को पूरा करने में काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के समन्वय से काम समय पर पूरा हो गया।
मुक्तिधाम बनेगा धार्मिक केंद्र उपमुख्य पार्षद गौतम साह ने कहा कि यह मुक्तिधाम सिर्फ एक इमारत नहीं, बल्कि पूरे जिले के लिए भावनात्मक और धार्मिक केंद्र बनेगा। जहां एक न एक दिन सभी को आना है, वहां सुविधाजनक और सम्मानजनक व्यवस्था होनी चाहिए। अररिया जिले में बढ़ती जनसंख्या और शहरीकरण को देखते हुए इस मुक्तिधाम की मांग लंबे समय से की जा रही थी। स्थानीय स्तर पर ही बेहतर सुविधा उपलब्ध हो जाने से न केवल समय और धन की बचत होगी, बल्कि अंतिम संस्कार की प्रक्रिया भी शांतिपूर्ण और गरिमापूर्ण तरीके से पूरी हो सकेगी। इस लोकार्पण समारोह में स्थानीय पार्षद, सामाजिक संगठनों के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में आम नागरिक भी मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान सभी ने इस मुक्तिधाम को जिले की सकारात्मक दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। अब अररिया जिला न केवल विकास की नई मिसाल पेश कर रहा है, बल्कि अपने नागरिकों को अंतिम समय में भी सम्मानजनक विदाई देने की व्यवस्था सुनिश्चित कर रहा है। बाबा खरगेश्वर नाथ सह मां खरगेश्वरी मोक्ष धाम वाकई जिले के हिंदू समुदाय की आस्था और भावनाओं का केंद्र बन गया है।


