पाली। पूरी दुनिया रविवार को ‘मदर्स डे’ मना रही थी। सोशल मीडिया से लेकर गलियों तक मां की ममता और त्याग के गुणगान हो रहे थे। लेकिन, उपखंड क्षेत्र के रेलड़ा (काणेचा उदावतान) गांव में नियति ने ममता का ऐसा क्रूर मजाक किया कि सुनने वालों की रूह कांप गई। जिस दिन बच्चों को अपनी मां को चूमकर उसे लंबी उम्र की दुआ देनी थी, उसी दिन एक खौफनाक अग्निकांड ने मां और उसकी दो नन्हीं कलियों को हमेशा के लिए एक दूजे से अलग कर दिया।
चाय की एक प्याली और फिर सब राख हो गया
दोपहर का वक्त था। मनीषा (28) अपने परिवार के लिए चाय बनाने रसोई में गई थी। 8 साल की नव्या और 5 साल की पल्लवी शायद अपनी मां के इर्द-गिर्द ही खेल रही थीं। मनीषा ने जैसे ही लाइटर जलाया, गैस रिसाव के कारण कमरे में मौत बनकर नाच रही आग ने विकराल रूप ले लिया। पल भर में पूरा कमरा आग का गोला बन गया। मां ने अपनी बेटियों को बचाने की कोशिश तो की होगी, लेकिन आग की लपटों के सामने ममता बेबस हो गई। चीखें उठीं, धुआं उठा और देखते ही देखते सब कुछ खामोश हो गया।
एक पल में उजड़ गया दीपसिंह का संसार
हादसे ने दीपसिंह रावत की हंसती-खेलती दुनिया को उजाड़ कर रख दिया। वह रिक्शा चलाकर पाई-पाई जोड़ता था ताकि अपनी पत्नी और बेटियों को बेहतर भविष्य दे सके। मनीषा भी मेहनती थी; वह ब्यूटी पार्लर और कपड़ों की छोटी दुकान चलाकर पति का हाथ बंटाती थी। जिस घर में सुबह बच्चों की किलकारियां गूंजी थीं, वहां शाम होते-होते सिर्फ राख के ढेर और सिसकियां बची थीं। बड़ी बेटी नव्या अभी स्कूल जाने लगी थी और पल्लवी आंगनवाड़ी की दहलीज चढ़ रही थी, लेकिन कुदरत को कुछ और ही मंजूर था।
पूरे गांव की आंखें नम
हादसे के बाद गांव में चूल्हे नहीं जले। ग्रामीण भागे-भागे आए, ब्यावर से दमकल पहुंची, लेकिन तब तक अग्नि तांडव सब कुछ छीन चुका था। सेंदड़ा थानाधिकारी हरिराम और उपखंड अधिकारी सुमित्रा विश्नोई सहित प्रशासनिक अमला मौके पर पहुंचा। शवों को ब्यावर के अमृतकौर अस्पताल की मोर्चरी भिजवाया। पुलिस और रसद विभाग सिलेंडर रिसाव के तकनीकी कारणों की जांच कर रहे हैं, लेकिन दीपसिंह के लिए यह जांच और रिपोर्ट अब बेमानी है, क्योंकि उसकी जिंदगी की तीनों सबसे प्यारी ‘ममता की मूरतें’ अब यादों की राख बन चुकी हैं। मदर्स डे पर यह हादसा केवल एक परिवार की क्षति नहीं, बल्कि समाज के सीने पर गहरा जख्म है। पीहर धोलिया (सेंदड़ा) से जब मनीषा के परिजन पहुंचे, तो उनके करुण क्रंदन से पत्थर का दिल भी पसीज गया।


