Brain Tumor and Testosterone: टेस्टोस्टेरोन हार्मोन पुरुषों में ब्रेनट्यूमर के विकास को रोक सकता है- रिसर्च

Brain Tumor and Testosterone: टेस्टोस्टेरोन हार्मोन पुरुषों में ब्रेनट्यूमर के विकास को रोक सकता है- रिसर्च

Brain Tumor and Testosterone: अब तक डॉक्टर सोचते थे कि शायद पुरुषों के हार्मोन ही ब्रेन ट्यूमर को बढ़ाते हैं, oncology-central के मुताबिक, यह बीमारी मर्दों में कॉमन है। लेकिन हाल ही में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ (एनआईएच) के एक नए अध्ययन ने इस बात को उल्टा साबित कर दिया है। क्लीवलैंड क्लिनिक के वैज्ञानिकों ने बताया है कि टेस्टोस्टेरोन जैसा हार्मोन असल में कैंसर के खिलाफ शरीर का साथ देता है। अगर इसकी कमी हो जाए, तो शरीर का डिफेंस सिस्टम कमजोर पड़ जाता है और ट्यूमर को बढ़ने का मौका मिल जाता है।

क्या कहती है ये नई रिसर्च?

वैज्ञानिकों ने जब 1300 से ज्यादा कैंसर मरीजों का डेटा चेक किया, तो नतीजे चौंकाने वाले थे। जो मरीज अपनी किसी दूसरी बीमारी के लिए टेस्टोस्टेरोन की दवा या सप्लीमेंट ले रहे थे, वे दूसरे मरीजों के मुकाबले ज्यादा समय तक जीवित रहे। उनके बचने की उम्मीद उन लोगों से काफी बेहतर थी जिनके शरीर में इस हार्मोन की कमी थी।

हार्मोन कम होने पर क्या होता है?

जब शरीर में इस हार्मोन की कमी होती है, तो दिमाग के अंदर एक तरह की सूजन और स्ट्रेस बढ़ जाता है। इस स्ट्रेस की वजह से दिमाग के चारों तरफ एक ऐसी दीवार बन जाती है जो शरीर की बीमारी से लड़ने वाली सेल्स को अंदर नहीं आने देती। अब जब रक्षक ही अंदर नहीं पहुंच पाएंगे, तो ट्यूमर को रोकने वाला कोई नहीं बचता और वह बढ़ने लगता है।

कैसे काम करता है ये हार्मोन?

हमारे दिमाग की बनावट ऐसी होती है कि वह हर चीज को अंदर नहीं घुसने देता। टेस्टोस्टेरोन हार्मोन इस बात का ख्याल रखता है कि दिमाग का यह माहौल संतुलित रहे। जब यह हार्मोन सही मात्रा में होता है, तो शरीर की बीमारी से लड़ने वाली कोशिकाएं जरूरत पड़ने पर दिमाग के अंदर जाकर ट्यूमर पर हमला कर सकती हैं। रिसर्च में पाया गया कि जैसे ही शरीर में इस हार्मोन की कमी होती है, दिमाग में एक खास सिस्टम (HPA Axis) बहुत ज्यादा एक्टिव हो जाता है। इसकी वजह से दिमाग में सूजन बढ़ने लगती है और शरीर में तनाव वाले हार्मोन तेजी से रिलीज होते हैं।

डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

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