हंतावायरस के चपेट में आए दो भारतीय, नीदरलैंड में क्वारंटीन, जानिए कैसे फैलता है वायरस

हंतावायरस के चपेट में आए दो भारतीय, नीदरलैंड में क्वारंटीन, जानिए कैसे फैलता है वायरस

MV Hondius Hantavirus: दक्षिणी महासागर से लौट रहे लग्जरी क्रूज MV Hondius पर हंतावायरस संक्रमण के कुछ मामले मिलने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य एजेंसियां अलर्ट हो गई हैं। जहाज पर मौजूद दो भारतीय नागरिकों को एहतियात के तौर पर नीदरलैंड भेजा गया है। अच्छी बात ये है कि दोनों पूरी तरह स्वस्थ हैं और उनमें संक्रमण के कोई लक्षण नहीं मिले हैं।

1 अप्रैल को अर्जेंटीना से रवाना

यह एक्सपीडिशन क्रूज 1 अप्रैल 2026 को अर्जेंटीना के उशुवाया से रवाना हुआ था। करीब डेढ़ महीने की यात्रा के बाद जहाज कैनरी द्वीप पहुंचा, जहां स्वास्थ्य जांच के दौरान हंतावायरस संक्रमण के मामले सामने आए।

जहाज पर 150 यात्री मौजूद

जहाज पर करीब 150 यात्री और क्रू सदस्य मौजूद थे, जिनमें दो भारतीय क्रू सदस्य भी शामिल थे। स्पेन पहुंचने के बाद सभी यात्रियों को WHO और स्पेनिश प्रशासन के तय नियमों के तहत सुरक्षित तरीके से जहाज से उतारा गया।

दोनों यात्रियों को भेजा गया नीदरलैंड

स्पेन में भारतीय दूतावास ने बताया कि दोनों भारतीय नागरिकों को अतिरिक्त सावधानी के तौर पर नीदरलैंड भेजा गया है, जहां उन्हें मेडिकल निगरानी और ऑब्जर्वेशन में रखा गया है। फिलहाल दोनों सुरक्षित हैं और चिंता की कोई बात नहीं है। भारतीय राजदूत जयंत एन. खोबरागड़े लगातार स्पेनिश अधिकारियों और दोनों भारतीयों के संपर्क में हैं और उनकी सुरक्षा पर नजर रखी जा रही है।

जांच में जुटा WHO

WHO और स्पेन की स्वास्थ्य एजेंसियां मिलकर पूरे मामले की जांच कर रही हैं। संक्रमित लोगों की पहचान, उनके संपर्क में आए लोगों की जांच और यात्रियों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने का काम जारी है। इस दौरान PPE किट, डिसइन्फेक्शन और बाकी सुरक्षा उपायों का सख्ती से पालन किया जा रहा है।

अब तक इस वायरस से 3 लोगों की मौत

रिपोर्ट्स के मुताबिक अब तक इस संक्रमण से 3 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 5 यात्री संक्रमित पाए गए हैं। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि अभी संक्रमण सीमित है और बड़े स्तर पर फैलने के संकेत नहीं मिले हैं।

क्या है हंतावायरस?

हंतावायरस एक खतरनाक वायरल संक्रमण है, जो आमतौर पर चूहों और दूसरे कृन्तकों के संपर्क में आने से फैलता है। यह वायरस उनके मल, मूत्र और लार में पाया जाता है। बंद या कम हवादार जगहों में इसके कण हवा के जरिए इंसानों तक पहुंच सकते हैं। इसके लक्षण कई बार 1 से 8 हफ्तों बाद दिखाई देते हैं। शुरुआत में बुखार, सिरदर्द, बदन दर्द, थकान और सांस लेने में दिक्कत जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

अलर्ट पर स्वास्थ्य एजेंसियां

स्वास्थ्य एजेंसियों ने यात्रियों और क्रू सदस्यों से सावधानी बरतने को कहा है। अगर किसी को फ्लू जैसे लक्षण महसूस हों तो तुरंत जांच कराने और डॉक्टर की सलाह मानने की अपील की गई है। फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन सतर्क रहना जरूरी है।

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