सिटी रिपोर्टर| समस्तीपुर जिले की पुलिस का एक नया कारनामा सामने आया है। पुलिस का यह कारनामा हैरान करने वाला है। पुलिस ने नाबालिग बच्ची से दुष्कर्म कर हत्या के एक मामले में मृत बच्ची की मां को पुलिस ने कोर्ट में मृत बता दिया। इस कारण आरोपी को कोर्ट से बेल मिल गई थी। यह मामला तब खुला जब महिला हाई कोर्ट पहुंची और उसने बताया कि वह जीवित है। जीवित महिला को समस्तीपुर पुलिस के द्वारा मृत बताने का मामला संज्ञान में आने पर हाईकोर्ट में एसपी अरविंद प्रताप सिंह और ताजपुर थानाध्यक्ष राकेश कुमार शर्मा को फटकार लगाई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने दोनों अधिकारियों को शपथपत्र दाखिल करने का आदेश दिया है और पूछा है कि न्यायालय को गलत जानकारी देकर गुमराह करने के लिए उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई क्यों नहीं शुरू की जाए। मिली जानकारी के अनुसार, 13 मार्च 2026 को हाईकोर्ट ने एसपी की रिपोर्ट के आधार पर यह मान लिया था कि अपीलकर्ता महिला की मृत्यु हो चुकी है। इसी आधार पर दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 394 के तहत अपील को समाप्त कर दिया गया था, क्योंकि किसी परिजन ने अपील आगे बढ़ाने की अनुमति नहीं मांगी थी। लेकिन बाद में सकली देवी ने अदालत में आवेदन देकर कहा कि वह पूरी तरह जीवित हैं और स्वस्थ हैं। उन्होंने आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक पासबुक तथा पंचायत द्वारा जारी जीवित प्रमाण पत्र भी अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया। आवेदन में यह भी आरोप लगाया गया कि ताजपुर थानाध्यक्ष ने बिना किसी दस्तावेजी जांच और स्थल सत्यापन के लापरवाहीपूर्वक गलत रिपोर्ट भेज दी। सुनवाई के दौरान समस्तीपुर के एसपी अरविंद प्रताप सिंह और ताजपुर थाना प्रभारी राकेश कुमार शर्मा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत में उपस्थित हुए। पहले जो रिपोर्ट भेजी गई थी वह गलत साबित हुई और अब नई रिपोर्ट में महिला जीवित हैं। सिटी रिपोर्टर| समस्तीपुर जिले की पुलिस का एक नया कारनामा सामने आया है। पुलिस का यह कारनामा हैरान करने वाला है। पुलिस ने नाबालिग बच्ची से दुष्कर्म कर हत्या के एक मामले में मृत बच्ची की मां को पुलिस ने कोर्ट में मृत बता दिया। इस कारण आरोपी को कोर्ट से बेल मिल गई थी। यह मामला तब खुला जब महिला हाई कोर्ट पहुंची और उसने बताया कि वह जीवित है। जीवित महिला को समस्तीपुर पुलिस के द्वारा मृत बताने का मामला संज्ञान में आने पर हाईकोर्ट में एसपी अरविंद प्रताप सिंह और ताजपुर थानाध्यक्ष राकेश कुमार शर्मा को फटकार लगाई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने दोनों अधिकारियों को शपथपत्र दाखिल करने का आदेश दिया है और पूछा है कि न्यायालय को गलत जानकारी देकर गुमराह करने के लिए उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई क्यों नहीं शुरू की जाए। मिली जानकारी के अनुसार, 13 मार्च 2026 को हाईकोर्ट ने एसपी की रिपोर्ट के आधार पर यह मान लिया था कि अपीलकर्ता महिला की मृत्यु हो चुकी है। इसी आधार पर दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 394 के तहत अपील को समाप्त कर दिया गया था, क्योंकि किसी परिजन ने अपील आगे बढ़ाने की अनुमति नहीं मांगी थी। लेकिन बाद में सकली देवी ने अदालत में आवेदन देकर कहा कि वह पूरी तरह जीवित हैं और स्वस्थ हैं। उन्होंने आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक पासबुक तथा पंचायत द्वारा जारी जीवित प्रमाण पत्र भी अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया। आवेदन में यह भी आरोप लगाया गया कि ताजपुर थानाध्यक्ष ने बिना किसी दस्तावेजी जांच और स्थल सत्यापन के लापरवाहीपूर्वक गलत रिपोर्ट भेज दी। सुनवाई के दौरान समस्तीपुर के एसपी अरविंद प्रताप सिंह और ताजपुर थाना प्रभारी राकेश कुमार शर्मा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत में उपस्थित हुए। पहले जो रिपोर्ट भेजी गई थी वह गलत साबित हुई और अब नई रिपोर्ट में महिला जीवित हैं।


