मदर्स डे पर एक ऐसी प्रेरक कहानी, जहां मां के समर्पण और अटूट विश्वास ने बेटे को साधारण से असाधारण बना दिया। लेकसिटी के उभरते तैराक युग चेलानी आज इंटरनेशनल स्तर पर पहचान बना चुके हैं। इस सफलता के केंद्र में हैं उनकी मां हेमा चेलानी। हेमा ने बेटे के सपनों को उड़ान देने के लिए अपने जीवन की प्राथमिकताएं बदल दीं। बेहतर प्रशिक्षण के लिए वे हर साल आठ माह बेंगलुरू में बेटे के साथ रहती हैं। वहां वे सिर्फ साथ नहीं होतीं, बल्कि उसकी ट्रेनिंग, खान-पान और प्रतियोगिताओं की रणनीति तक हर पहलू पर नजर रखती हैं। चार साल में बदली तकदीर तैराकी को जिम्मेदारी नहीं, अपना सपना बनाया जहां ज्यादातर खिलाड़ी अपनी मेहनत से आगे बढ़ते हैं, वहीं युग की सफलता में उनकी मां का समर्पण एक मजबूत स्तंभ साबित हुआ। घर-परिवार से दूर रहकर हर दिन बेटे के साथ संघर्ष करना आसान नहीं था, लेकिन हेमा चेलानी ने इसे जिम्मेदारी नहीं, अपना सपना बनाया। युग की सफलता के पीछे उनकी मां की यह निरंतर उपस्थिति और मानसिक मजबूती भी अहम रही, जिसने उन्हें हर कठिन दौर में संभाले रखा। आज उनकी यही तपस्या रंग लाई है। युग चेलानी राजस्थान की तैराकी में एक स्थापित नाम बन चुके हैं और अब उनकी नजरें देश के लिए बड़े मंचों पर और बड़ी उपलब्धियों पर टिकी हैं। चार साल में बदली तकदीर, लगी पदकों की झड़ी युग चेलानी ने 2018 में कोच डॉ. महेश पालीवाल के मार्गदर्शन में बंगलुरू की प्रतिष्ठित स्विमिंग एकेडमी से प्रशिक्षण शुरू किया। शुरुआती दौर में चुनौतियां भी आईं, लेकिन लगातार अभ्यास और मजबूत इच्छाशक्ति ने उन्हें आगे बढ़ाया। महज चार साल में अनुशासन और कड़ी मेहनत ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर का स्टार बना दिया।


