सूदखोरी का 250 साल पुराना खूनी-जाल, 5 गुना कर्ज वसूली:माफिया हड़प लेते हैं जमीन-जायदाद और गाड़ियां, इतना टॉर्चर कि कई पीड़ित कर चुके सुसाइड

सूदखोरी का 250 साल पुराना खूनी-जाल, 5 गुना कर्ज वसूली:माफिया हड़प लेते हैं जमीन-जायदाद और गाड़ियां, इतना टॉर्चर कि कई पीड़ित कर चुके सुसाइड

कर्जा देने वालों ने मुझसे तीन-चार गुना रुपए ले लिए। अब मुझसे कोई भी कुछ नहीं मांगता है। इसके बावजूद वो मेरा पीछा नहीं छोड़ रहे हैं। मेरे परिवार को बचा लीजिए। ब्याज माफिया से प्रताड़ित भीलवाड़ा के 51 साल के नर्सिंग सुपरिटेंडेंट सूर्य प्रकाश दाधीच ने 6 मई 2026 को जहर खाकर जान दे दी। मौत से पहले उन्होंने एक वीडियो अपने साले को भेजा, जिसमें अपना दर्द बयां किया। ये इकलौता मामला नहीं है। राजस्थान में ब्याज माफिया का जानलेवा सिंडिकेट बन गया है। एक माफिया की मानें तो सूदखोरी का ये खूनी जाल 250 साल पुराना है। एक बार कोई इनके चंगुल में फंस जाए तो जिंदगी भर की कमाई देने के बावजूद कर्ज चुकता नहीं है। ब्याज माफिया 3 से 4 गुना ही नहीं कई मामलों में तो इससे भी ज्यादा वसूली कर रहे हैं। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… करीब एक सप्ताह पहले झालावाड़ पुलिस ने ब्याज माफिया के खिलाफ 2 बड़ी कार्रवाई की। डग कस्बे के ब्याज माफिया सुनील गोयल के कब्जे से 70 ट्रैक्टर, 61 मोटरसाइकिल, 7 कार, 3 पिकअप, 1 ट्रक, 2 टेम्पो, 107 थ्रेसर, 29 ट्रॉली, 89 पंजा और 63 सीड ड्रिल सहित सैकड़ों मशीनें बरामद कीं। इसके अलावा 147 साइंड ब्लैंक चेक, 47 खाली स्टाम्प, 39 मकानों के पट्टे, 9 गाड़ियों की आरसी और जमीन की रजिस्ट्रियां भी जब्त कीं। आरोपी कर्ज के बदले गांव वालों से खाली चेक और स्टाम्प पर साइन करवा लेता। उनकी गाड़ियां गिरवी रख लेता। दूसरी कार्रवाई में पुलिस ने अकलेरा कस्बे के ब्याज माफिया सुगनचंद मीणा को गिरफ्तार किया था। जांच में सामने आया कि उसने 3 साल में कर्जदारों से ब्याज के 5 करोड़ 85 लाख रुपए वसूले थे। उसके पास 521 खाली चेक, 178 स्टाम्प पेपर, 38 खाली साइंड स्टाम्प, 14 रजिस्टर, 143 डायरी, जमीन व मकानों से जुड़े दस्तावेज और हजारों पर्चियां बरामद हुईं। राजस्थान में संभवत: पहली बार ब्याज माफिया के खिलाफ इतनी बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया गया। ब्याज माफिया के चंगुल में फंसे लोगों का दर्द झालावाड़ के अकलेरा कस्बे के घनश्याम शर्मा स्टाम्प वेंडिंग का काम करते हैं। बड़ा बेटा शशांक शादीशुदा है और जयपुर में सरकारी नौकरी में है। छोटा बेटा जय पढ़ रहा है। घनश्याम ने बताया कि 5-6 साल पहले उन्होंने अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए खुरी निवासी सुगनचंद मीणा से 5 लाख रुपए उधार लिए थे। सुगनचंद ने उससे स्टाम्प पेपर पर साइन कराए। इसके अलावा एक खाली स्टाम्प, खाली चेक और घर के दस्तावेज भी लिए। 5 लाख रुपए उन्हें वापस लौटाने के लिए मासिक किस्त तय कर दी। इसकी बाकायदा डायरी भी बनाई। एक डायरी अपने पास रखी और एक उन्हें दे दी। घनश्याम ने बताया कि मैं किस्तें चुकाता जा रहा हूं, लेकिन वो हर साल पूरा होते ही पहले वाली डायरी को बंद कर देता और नई डायरी बना देता। इसमें ब्याज को ही मूल धन बना देता। मैं विरोध जताता तो धमकाता। 5 लाख के बदले 12 लाख चुकाने के बावजूद उनका कर्जा क्लियर नहीं हो रहा था। उल्टा वो मुझे 12 लाख रुपए और चुकाने के लिए कह रहा था। मैंने विरोध किया तो बोला- चुपचाप 12 लाख रुपए दे दो। हमारे पास रिकवरी के कई तरीके हैं। या तो आप 12 लाख रुपए दे दो और नहीं तो ये घर इज्जत से खाली कर दो। इसके बाद आए दिन उसके आदमी भी मुझे धमकाने लग गए। इस वजह से मैं भयंकर तनाव में आ गया। दिमाग में सुसाइड तक के ख्याल आने लगे। एक दिन पत्नी-बच्चों को कहीं से कर्ज के बारे में पता चल गया। उन्हीं की सलाह पर मैं पुलिस स्टेशन पहुंचा और सुगनचंद मीणा के खिलाफ रिपोर्ट दी। घनश्याम शर्मा की पत्नी अनिता ने बताया- अगर हमें पता होता तो हम इन्हें कभी भी इस तरह से कर्जा नहीं लेने देते। पेनल्टी पर भी ब्याज वसूलता था सुगनचंद घनश्याम शर्मा की रिपोर्ट पर कार्रवाई करते हुए अकलेरा पुलिस ने 30 अप्रैल को सुगनचंद मीणा को गिरफ्तार कर लिया। सुगनचंद नई बस्ती अकलेरा में मकान बनाकर रह रहा था। खुरी गांव में भी उसका मकान था। वो काफी साल से अकलेरा मार्केट व आसपास के गांव के लोगों को उधार रुपए देने का काम कर रहा था। ये रकम भारी ब्याज जोड़कर साप्ताहिक और मासिक किस्तों में वसूलता था। ब्याज पर भी ब्याज वसूलता था। जो समय पर किस्त नहीं चुका पाता, उसपर ब्याज की दोगुनी पेनल्टी लगाई जाती। बाद में इसी पेनल्टी पर भी ब्याज वसूलता था। सुगनचंद मीणा ने 5-7 गुर्गो की टीम बना रखी थी, जो वसूली के लिए जाती थी। मीणा उधार लेने वालों से खाली चेक, स्टाम्प और संपत्ति के दस्तावेज गिरवी रखवाता था। ये सब वो अवैध तरीके से कर रहा था। इसके लिए उसने फाइनेंस या मनी लेंडिंग से जुड़ा कोई लाइसेंस भी नहीं ले रखा था। 1 के बदले 3 लाख वसूले, 3 लाख और मांग रहा डग के क्यासरा गांव में भास्कर टीम को कलावती देवी मिलीं। उनकी तबीयत खराब थी। बेटे दीपक ने बताया- मम्मी ने डग के रहने वाले सुनील गोयल से एक लाख रुपए उधार लिए थे। इस दौरान उसने मम्मी के कुछ खाली साइंड चेक, स्टाम्प और मकान का पट्टा गिरवी रखवाए थे। अब कुछ टाइम पहले उसने मम्मी के चेक बाउंस करवा कर मुकदमा करवा दिया है। धमकी देता है कि जेल करवाएगा और मकान पर भी कब्जा कर लेगा। इसी टेंशन में पिछले 5 महीने से मम्मी बीमार पड़ी हैं। कोर्ट के भी चक्कर लगा रहे हैं। कलावती देवी ने बताया- सुनील गोयल ने एक लाख रुपए देते समय एडवांस में ही दो महीने का ब्याज और एक मंदिर के नाम से 10 हजार रुपए काट कर 90 हजार रुपए ही दिए थे। एक लाख रुपए के बदले में मैंने उसे अब तक ब्याज सहित 3 लाख रुपए चुका दिए हैं। इसके बावजूद वो 3 लाख रुपए और मांग रहा है। यहां मेरे घर के आंगन में उसे मैंने 50 हजार रुपए और दिए थे, जिसे वो साफ नकार रहा है। उसकी दुकान पर जाते हैं तो हमें धमकाते हैं और भगा देते हैं। मकान का पट्टा और चेक देने से मना कर दिया। मैंने उसे जितने भी रुपए जमा करवाए, उसका एक भी प्रूफ उसने हमें नहीं दिया। जेल जाने और घर कब्जाए जाने के टेंशन से बीपी रहने लगा है। 5 महीनों में वकीलों और इलाज पर ही ढाई से तीन लाख रुपए खर्च हो गए हैं। दोस्त को चुनाव लड़वाने के लिए उधार लिए थे 1 लाख डग के ही गोकुल सिंह उर्फ नैन सिंह ने बताया- मेरे गांव में पिछली बार सरपंच के चुनावों में सीट रिजर्व थी। मेरा एक दोस्त चुनाव लड़ना चाहता था, लेकिन पैसे नहीं थे। ऐसे में मैंने सुनील गोयल से एक लाख रुपए उधार लिए। इसके बदले में उसने मेरा पानी का टैंकर अपने बाड़े में खड़ा करवा लिया। टैंकर से जुड़े डॉक्युमेंट्स भी रख लिए। उसने मुझसे ब्लैंक स्टाम्प पेपर और ब्लैंक चेक पर भी साइन करवाए। उसने मुझे एक लाख के बजाय 91 हजार रुपए ही दिए। उसने बताया कि बाड़े में टैंकर खड़ा करने का किराया और मंदिर के नाम दान राशि मिलाकर 9 हजार रुपए होते हैं, वो काट लिए हैं। मैंने तीन किस्तों में 30-30 हजार रुपए करके 90 हजार रुपए चुका दिए थे। तभी मुझे पता चला कि सुनील सेठ रोजाना मेरे टैंकर को किराए पर चला कर उससे रुपए भी कमा रहा है। मैंने विरोध किया तो उसने कहा- उसके यहां यही सिस्टम है। इसके कुछ टाइम बाद ही उसने मेरे चेक बाउंस करवा लिए और कोर्ट में मुकदमा कर दिया। इधर जिस मित्र को सरपंच चुनाव लड़ने के लिए मैंने सुनील से उधार रुपए लेकर दिए थे, उसकी भी अचानक मौत हो गई। सुनील सेठ ने ब्याज पर ब्याज जोड़ इतना कर्जा चढ़ा दिया है कि उसे मैं चुका नहीं सकता हूं। वहीं टैंकर लेकर मेरा रोजगार भी छीन लिया। ऐसा फंसा हूं कि अब न तो मर सकता हूं और न ही जिंदा रहने की कोई उम्मीद बची है। इधर हाल में पता चला है कि उसने मेरे पानी के टैंकर को भी कहीं गायब करवा दिया है।
माफिया बोला- ये हमारा 250 साल पुराना पुश्तैनी काम डग पुलिस थाने के आसूचना अधिकारी कॉन्स्टेबल विनोद के पास लंबे टाइम से सुनील गोयल के खिलाफ ब्याज पर ब्याज वसूली की शिकायतें आ रही थीं। ये भी पता चला कि वो कर्जदारों के वाहन और दस्तावेज आदि अपने फार्म हाउस, गोदाम और बाड़े में रखता था। बाड़े, गोदाम और फार्म हाउस के लिए बाकायदा 6 गार्ड लगा रखे थे। ये शिफ्ट वाइज वहां चौकीदारी करते हैं। कॉन्स्टेबल विनोद ने ये सारी जानकारी अपने उच्च अधिकारियों को दी। इसके बाद 29 अप्रैल 2026 को सुनील गोयल के सभी ठिकानों पर एक साथ पुलिस ने रेड की। वहां से गिरवी रखे वाहन, साइंड चेक, स्टाम्प, मकानों के पट्‌टे आदि बरामद हुए। सुनील गोयल के खिलाफ केस रजिस्टर्ड कर लिया गया। सुनील गोयल ने पुलिस को बताया कि उसकी कई पीढ़ियां पिछले 250 साल से कर्ज देने का काम कर रही है। ये उसका पुश्तैनी काम है। उसने डग कस्बे में एक दुकान भी कर रखी है, जहां दिन भर यही काम होता है। हालांकि इसके लिए उसके पास कोई भी फाइनेंस या बैंकिंग संबंधी लाइसेंस नहीं है। पड़ताल में सामने आया कि वो फाइनेंस कंपनियों द्वारा पहले से हाई परचेज वाहनों को भी फाइनेंस कर अपने बाड़े में खड़ा करता था। इसके बदले मोटा किराया और ब्याज वसूलता था। उसने अकेले झालावाड़ ही नहीं बल्कि एमपी और राजस्थान के कई जिलों में लोगों को रुपए ब्याज पर दिए हुए थे। दो उदाहरण से समझिए ब्याज माफिया का खेल पहला : हर दिन की किस्त दूसरा : एक मुश्त ब्याज का सिस्टम राजस्थान में ब्याज माफिया से परेशान होकर इन्होंने दी जान (ब्याज माफिया से परेशान होकर जान देने वाले ये सिर्फ चंद नाम हैं। लिस्ट बहुत लंबी है।) क्या कहता है नियम? एडवोकेट अनिल सोनी ने बताया कि राजस्थान मनी लेंडर्स एक्ट, 1963 के तहत बिना लाइसेंस के कोई भी व्यक्ति या गिरोह सूदखोरी का धंधा नहीं चला सकता। एक्ट की धारा 5 कहती है कि लाइसेंस के बिना मनी लेंडिंग बिजनेस अवैध है। लाइसेंस न होने पर कोर्ट दावे को ही खारिज कर देता है। ऋण वसूली नहीं हो सकती। सूदखोर पर पहली बार में जुर्माना 500 रुपए तक है। बार-बार करने पर ज्यादा जुर्माना भी लग सकता है। सरकारी नोटिफिकेशन के मुताबिक सिक्योर्ड लोन पर 9 फीसदी और अनसिक्योर्ड पर 12 फीसदी प्रति वर्ष साधारण ब्याज है। इससे ज्यादा ब्याज लेना अवैध है। ब्याज पर पैसा लेते समय क्या सावधानी बरतें एडवोकेट अनिल सोनी ने बताया कि कर्ज हमेशा बैंक, NBFC और RBI रजिस्टर्ड संस्था से ही लें। ब्याज पर रकम लेते समय सबसे पहले फाइनेंसर का लाइसेंस जरूर चेक करें। उसके ऑफिस या दुकान पर उसका नाम व लाइसेंस नंबर डिस्प्ले होना चाहिए। अगर ये हैं तो उसके लाइसेंस नंबर और वैलिडिटी की पुष्टि करें। ब्लैंक चेक, स्टांप या दस्तावेज कभी न दें, असल में ये ही सबसे बड़ा जाल है। ब्याज पर रकम लेने से पहले लिखित एग्रीमेंट लें। चेक करें कि ब्याज दर, मूल राशि, किस्त, कुल राशि सब साफ-साफ लिखा हो। रसीद हर किस्त पर लें। ये भी ध्यान रखें कि ब्याज दर 12 फीसदी सालाना से ज्यादा न हो।

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