नियमों की अनदेखी:60%टाउनशिप-कॉलोनी में STP नहीं, बिल्डर ही नहीं निगम, हाउसिंग बोर्ड के भी ऐसे हालात

नियमों की अनदेखी:60%टाउनशिप-कॉलोनी में STP नहीं, बिल्डर ही नहीं निगम, हाउसिंग बोर्ड के भी ऐसे हालात

श्रीमती उमादेवी के पुत्र अनिल पटेरिया की रिपोर्ट आवासीय कॉलोनी और टाउनशिप बसाने का क्रेज बढ़ा है, लेकिन शहर में बस रहीं या बस चुकी इन कॉलोनी और टॉउनशिप में 70% बिल्डरों ने सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) नहीं लगाया। नतीजा कागजों पर ‘ग्रीन सिटी’ बस रही हैं, जबकि एसटीपी लगाने की अनिवार्यता को नजरअंदाज किया जा रहा है। यह पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 और जल (प्रदूषण निवारण तथा नियंत्रण) अधिनियम, 1974 के तहत निर्धारित है। बिल्डर टाउनशिप और 50 से ज्यादा भूखंड वाली बसाने वाली कॉलोनी में एसटीपी नहीं लगा रहे हैं। वहीं सरकार की एजेंसी नगर निगम, मप्र हाउसिंग बोर्ड और जीडीए भी टाउनशिप और 50 से ज्यादा भूखंड वाली कॉलोनी में एसटीपी नहीं लगा रही है। इनसे निकलने वाले सीवर की गंदगी को सीवर लाइन या फिर पुरानी लाइनों में जोड़कर बहाया जा जा रहा है।
नगरीय क्षेत्र के ग्रामीण वार्डों या आसपास बस रहीं टाउनशिप-आवासीय कॉलोनी में कई स्थानों पर सोखता टैंक बनाकर छोड़ दिए गए है। यही कारण है कि बड़ी आवासीय कॉलोनी-टाउनशिप का ​सीवर नगर निगम की कम क्षमता वाली सीवर लाइनों को जाम कर रहा है। आए दिन लाइनें बंद हो रही है। बारिश में जलभराव के हालात बनते है। नियमों की अनदेखी से शहर में समस्या दिनों-दिन बढ़ रही हैं। सरकारी एजेंसी इन्होंने ही नहीं रखा प्रावधान
निगम: पीएम आवास योजना में 3900 फ्लैट मानपुर, महलगांव और फूटी कॉलोनी में हैं। निगम ने यहां सीवर लाइन में डिस्चार्ज को जोड़ा है। हाउसिंग बोर्ड: थाटीपुर पुनर्घनत्वीकरण योजना में चंबल कॉलोनी, कादम्बरी नगर, सूर्य नगर, गिरनार परिसर बसाए हैं। यहां पर भी एसटीपी नहीं लगाया। बिल्डर: 20 टाउनशिप है। इनमें 60% ने लगाया एसटीपी नहीं लगाया। करीब 200 कॉलोनियों में कुछेक में एसटीपी हैं।
भास्कर एक्सपर्ट – आरके शुक्ला, सेवानिवृत्त कार्यपालन यंत्री पीएचई
ट्रीटेड पानी के इस्तेमाल से बचेगा पेयजल कम होगा सीवर पर दबाव, चौक नहीं होंगी पानी की समस्या दिनों-दिन बढ़ती जा रही है। इसलिए सीवर के पानी का रीयूज होना जरूरी है। गार्डन सहित अन्य ऐसे स्थानों पर रीयूज पानी का उपयोग किया जा सकता है। इससे पीने का पानी काफी बचेगा। इसे ध्यान में रखकर एसटीपी लगाना जरूरी है। यदि ये लगें और चालू रहें तो नगर निगम की सीवर लाइन पर लोड नहीं बढ़ेगा। बारिश में भी काफी राहत मिलेगी। जो भी शहर के अंदर सीवर सिस्टम लगे हैं। वे सिर्फ सीवर के हिसाब से डिजाइन है। बारिश में यदि सीवर लाइन में से पानी होकर पहुंचेगा तो जहां लाइनें चौक होंगी। वहीं सीवर सिस्टम पर भी असर पड़ेगा। नई योजनाओं में एसटीपी लगा रहे है
टाउनशिप और आवासीय कॉलोनी में एसटीपी लगाने का प्रावधान साल 2015 से है। थाटीपुर में पुर्नघनत्वीयकरण योजना में एसटीपी लगा रहे हैं। सीवर लाइन डाली जा रही है। सीवर के पानी का रीयूज किया जाएगा। आगे भी जो आवासीय काूलोनी, बहुमंजिला इमारतें बनेंगी। उसमें एसटीपी लगाएंगे।
-राजेंद्र तिवारी, प्रभारी कार्यपालन यंत्री हाउसिंग बोर्ड
एसटीपी लगाना अनिवार्य, सख्ती से कराएंगे पालन
एसटीपी लगाने के साथ जिन कॉलोनाइजरों को स्वीकृति दी थी। उन्होंने लगाए हैं या नहीं। इसका परीक्षण कराएंगे। साथ ही जिन्होंने नहीं लगाए हैं उन पर कार्रवाई की जाएगी। प्रधानमंत्री आवास योजना में मानपुर में नई साइट तैयार करना है। वहां के लिए प्रस्तावित करेंगे। एसटीपी लगाने से निगम की सीवर लाइनों में लोड कम होगा।
-संघ प्रिय, आयुक्त ननि एसटीपी लगाने का नियम 20 हजार या उससे ज्यादा क्षेत्रफल पर निर्मित टाउनशिप में एसटीपी लगाना अनिवार्य है।
हर आवासीय प्रोजेक्ट में एसटीपी लगाना अनिवार्य है। जो-निगम की लाइन से नहीं जुड़ा हो। 50 से अधिक इकाइयों वाले परिसरों के लिए यह जरूरी है।
सिया (स्टेट इनवायरमेंट इंपेक्ट एस्सेमेंट अर्थारिटी) से एनओसी और रैरा से स्वीकृति जरूरी है।
टाउनशिप या मल्टीस्टोरी बिल्डिंग प्रोजेक्ट के लिए पर्यावरण क्लीयरेंस लेना अनिवार्य है।
एसटीपी: ये होता फायदा एसटीपी लगाने से आवासों में रोज उपयोग होने वाले पानी का रीसाइकल कर इसे गार्डन, फाउंटेन में लिया जा सकता है।
निगम भी इसे टैंकरों में भरकर भरकर पार्क, डिवाइडर आदि पर लगे पेड़ों में पानी डाल सकता है।
रोज कितना पानी रीसाइक​ल: एक एसटीपी से रोज 3.50 लाख लीटर पानी रीसाइकल होता है। ये 16 घंटे की रनिंग में आउटपुट मिलता है। यदि 24 घंटे चलता है। तब 4.50 लाख लीटर रीसाइकल पानी मिलता।

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