राज्य में स्व-गणना की रफ्तार धीमी, 8 दिन में सिर्फ 49,491 ने दी जानकारी

राज्य में स्व-गणना की रफ्तार धीमी, 8 दिन में सिर्फ 49,491 ने दी जानकारी

मध्य जून तक पहले चरण का काम पूरा करने का लक्ष्य, 78 हजार कर्मी लगाए झारखंड में स्व-गणना की रफ्तार फिलहाल धीमी है। 1 मई से 9 मई तक सिर्फ 49,491 घरों के मुखिया ने ही स्व-गणना की प्रक्रिया पूरी की है। हालांकि इसके लिए अभी भी छह दिन का समय बाकी है। राज्य में स्व-गणना का पोर्टल 15 मई तक खुला रहेगा। जिलों की बात करें तो रांची में सबसे अधिक 7356 घरों के मुखिया ने स्व-गणना पूरी की है, जबकि लोहरदगा में सबसे कम 722 परिवारों ने यह प्रक्रिया पूरी की। देश में पहली बार डिजिटल इंडिया अभियान के तहत नागरिकों को खुद ऑनलाइन जनगणना विवरण भरने की सुविधा दी गई है। यह पोर्टल हिंदी और अंग्रेजी समेत 16 भाषाओं में उपलब्ध है, ताकि क्षेत्रीय स्तर पर भी लोग आसानी से जानकारी दर्ज कर सकें। स्व-गणना के दौरान मकान की स्थिति, उपलब्ध सुविधाओं और संपत्तियों से जुड़े 33 निर्धारित सवालों के जवाब देने होते हैं। प्रक्रिया पूरी होने के बाद एक विशिष्ट आईडी मिलती है। बाद में घर पहुंचने वाले प्रगणक को सिर्फ यही आईडी दिखानी होगी, जिससे दोबारा लंबी प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ेगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि जनगणना से जुड़ा डेटा पूरी तरह गोपनीय रहेगा। इसका उपयोग केवल सांख्यिकीय उद्देश्यों और विकास योजनाओं के लिए किया जाएगा। स्व-गणना पूरी तरह स्वैच्छिक है। जो लोग ऑनलाइन जानकारी नहीं भर पाएंगे, उनके घर प्रगणक पहुंचेंगे और डिजिटल एप के माध्यम से डेटा एकत्र करेंगे। 16 मई से 14 जून तक प्रगणक घर-घर जाकर मकानों की सूची तैयार करेंगे और डेटा का सत्यापन करेंगे। इसके लिए राज्य में करीब 78 हजार अधिकारियों और कर्मचारियों की तैनाती की गई है, ताकि जून मध्य तक पहले चरण का काम पूरा किया जा सके। 15 मई तक स्व-गणना पोर्टल, 16 मई से घर-घर किया जाएगा सत्यापन मध्य जून तक पहले चरण का काम पूरा करने का लक्ष्य, 78 हजार कर्मी लगाए झारखंड में स्व-गणना की रफ्तार फिलहाल धीमी है। 1 मई से 9 मई तक सिर्फ 49,491 घरों के मुखिया ने ही स्व-गणना की प्रक्रिया पूरी की है। हालांकि इसके लिए अभी भी छह दिन का समय बाकी है। राज्य में स्व-गणना का पोर्टल 15 मई तक खुला रहेगा। जिलों की बात करें तो रांची में सबसे अधिक 7356 घरों के मुखिया ने स्व-गणना पूरी की है, जबकि लोहरदगा में सबसे कम 722 परिवारों ने यह प्रक्रिया पूरी की। देश में पहली बार डिजिटल इंडिया अभियान के तहत नागरिकों को खुद ऑनलाइन जनगणना विवरण भरने की सुविधा दी गई है। यह पोर्टल हिंदी और अंग्रेजी समेत 16 भाषाओं में उपलब्ध है, ताकि क्षेत्रीय स्तर पर भी लोग आसानी से जानकारी दर्ज कर सकें। स्व-गणना के दौरान मकान की स्थिति, उपलब्ध सुविधाओं और संपत्तियों से जुड़े 33 निर्धारित सवालों के जवाब देने होते हैं। प्रक्रिया पूरी होने के बाद एक विशिष्ट आईडी मिलती है। बाद में घर पहुंचने वाले प्रगणक को सिर्फ यही आईडी दिखानी होगी, जिससे दोबारा लंबी प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ेगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि जनगणना से जुड़ा डेटा पूरी तरह गोपनीय रहेगा। इसका उपयोग केवल सांख्यिकीय उद्देश्यों और विकास योजनाओं के लिए किया जाएगा। स्व-गणना पूरी तरह स्वैच्छिक है। जो लोग ऑनलाइन जानकारी नहीं भर पाएंगे, उनके घर प्रगणक पहुंचेंगे और डिजिटल एप के माध्यम से डेटा एकत्र करेंगे। 16 मई से 14 जून तक प्रगणक घर-घर जाकर मकानों की सूची तैयार करेंगे और डेटा का सत्यापन करेंगे। इसके लिए राज्य में करीब 78 हजार अधिकारियों और कर्मचारियों की तैनाती की गई है, ताकि जून मध्य तक पहले चरण का काम पूरा किया जा सके। 15 मई तक स्व-गणना पोर्टल, 16 मई से घर-घर किया जाएगा सत्यापन  

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