भास्कर न्यूज | अररिया बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था की संवेदनहीनता का एक ऐसा हृदयविदारक चेहरा गुरुवार को सामने आया, जिसने पूरे तंत्र को शर्मसार कर दिया। फारबिसगंज के घोड़ाघाट गोलीकांड में मृत 17 वर्षीय चांदनी की लाश पोस्टमार्टम से पहले एक अदद एक्स-रे कराने के लिए घंटों तक एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल भटकती रही। परिजन अपनी बेटी का शव लेकर अररिया, फारबिसगंज और फिर रानीगंज तक दौड़ते रहे, लेकिन जिले के दो बड़े अस्पतालों में से कहीं भी समय पर यह बुनियादी सुविधा उपलब्ध नहीं हो सकी। घटना फारबिसगंज प्रखंड के रमै पंचायत स्थित घोड़ाघाट की है, जहां घर में घुसकर नाबालिग चांदनी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। जो पोस्टमार्टम प्रक्रिया सुबह 10 बजे तक पूरी हो जानी चाहिए थी, वह सिस्टम की लाचारी के कारण शाम तक खिंच गई। इस दौरान एक मृत बेटी की देह अस्पताल दर अस्पताल ठोकर खाती रही। इधर सिस्टम सोता रहा। करोड़ों के मॉडल अस्पताल और निजी एजेंसियां फेल, रानीगंज में हुई जांच, तब जाकर हुआ पोस्टमार्टम। जिला पार्षद इश्तियाक आलम ने नाराजगी जताते हुए इसे सरकार और स्वास्थ्य विभाग की बड़ी विफलता करार दिया। कहा कि एक मृतका के शव को इस तरह भटकाना शर्मनाक है। राजद नेता मो. कमाले हक और कांग्रेस नेता शशिभूषण झा ने कहा कि यही सरकारी दावों की जमीनी हकीकत है। वहीं, अररिया के सिविल सर्जन डॉ. केके कश्यप ने सफाई देते हुए कहा कि एक्स-रे सेवा निजी एजेंसी के माध्यम से संचालित होती है। तकनीकी खराबी के कारण सेवा बाधित हुई थी, जिसे एक-दो दिनों के भीतर बहाल कर दिया जाएगा। शव को अररिया सदर अस्पताल भेजा गया, लेकिन वहां एक्स-रे मशीन खराबी के कारण बंद मिली। चूंकि गोली लगने के मामलों में पोस्टमार्टम से पहले एक्स-रे अनिवार्य है, इसलिए शव को वापस फारबिसगंज अनुमंडलीय अस्पताल भेजा गया। यहां भी कई दिनों से यह सेवा ठप थी। अंततः एंबुलेंस से शव को रानीगंज रेफरल अस्पताल ले जाया गया, जहां एक्स-रे होने के बाद फिर अररिया लाकर देर शाम पोस्टमार्टम हो सका। भास्कर न्यूज | अररिया बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था की संवेदनहीनता का एक ऐसा हृदयविदारक चेहरा गुरुवार को सामने आया, जिसने पूरे तंत्र को शर्मसार कर दिया। फारबिसगंज के घोड़ाघाट गोलीकांड में मृत 17 वर्षीय चांदनी की लाश पोस्टमार्टम से पहले एक अदद एक्स-रे कराने के लिए घंटों तक एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल भटकती रही। परिजन अपनी बेटी का शव लेकर अररिया, फारबिसगंज और फिर रानीगंज तक दौड़ते रहे, लेकिन जिले के दो बड़े अस्पतालों में से कहीं भी समय पर यह बुनियादी सुविधा उपलब्ध नहीं हो सकी। घटना फारबिसगंज प्रखंड के रमै पंचायत स्थित घोड़ाघाट की है, जहां घर में घुसकर नाबालिग चांदनी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। जो पोस्टमार्टम प्रक्रिया सुबह 10 बजे तक पूरी हो जानी चाहिए थी, वह सिस्टम की लाचारी के कारण शाम तक खिंच गई। इस दौरान एक मृत बेटी की देह अस्पताल दर अस्पताल ठोकर खाती रही। इधर सिस्टम सोता रहा। करोड़ों के मॉडल अस्पताल और निजी एजेंसियां फेल, रानीगंज में हुई जांच, तब जाकर हुआ पोस्टमार्टम। जिला पार्षद इश्तियाक आलम ने नाराजगी जताते हुए इसे सरकार और स्वास्थ्य विभाग की बड़ी विफलता करार दिया। कहा कि एक मृतका के शव को इस तरह भटकाना शर्मनाक है। राजद नेता मो. कमाले हक और कांग्रेस नेता शशिभूषण झा ने कहा कि यही सरकारी दावों की जमीनी हकीकत है। वहीं, अररिया के सिविल सर्जन डॉ. केके कश्यप ने सफाई देते हुए कहा कि एक्स-रे सेवा निजी एजेंसी के माध्यम से संचालित होती है। तकनीकी खराबी के कारण सेवा बाधित हुई थी, जिसे एक-दो दिनों के भीतर बहाल कर दिया जाएगा। शव को अररिया सदर अस्पताल भेजा गया, लेकिन वहां एक्स-रे मशीन खराबी के कारण बंद मिली। चूंकि गोली लगने के मामलों में पोस्टमार्टम से पहले एक्स-रे अनिवार्य है, इसलिए शव को वापस फारबिसगंज अनुमंडलीय अस्पताल भेजा गया। यहां भी कई दिनों से यह सेवा ठप थी। अंततः एंबुलेंस से शव को रानीगंज रेफरल अस्पताल ले जाया गया, जहां एक्स-रे होने के बाद फिर अररिया लाकर देर शाम पोस्टमार्टम हो सका।


