हादसे में जब्त गाड़ी अब 24 घंटे के भीतर लौटाएगी पुलिस

हादसे में जब्त गाड़ी अब 24 घंटे के भीतर लौटाएगी पुलिस

सड़क दुर्घटनाओं के मामलों में अब वाहन मालिकों को बड़ी राहत मिलने जा रही है। हादसे के दौरान जब्त वाहनों को 24 घंटे के भीतर उनके मालिकों को वापस किया जाएगा। इसका उद्देश्य थानों में लंबे समय तक गाड़ियों को खड़ा रखने की पुरानी व्यवस्था को खत्म करना और प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाना है। इसे लागू करने के लिए पुलिस मुख्यालय के स्तर से जिले में एक डीएसपी के नेतृत्व में टीम बनेगी। पुलिस मुख्यालय के स्तर पर कंट्रोल रूम बनाया गया है। ट्रैफिक एडीजी सुधांशु कुमार ने बताया कि इस कंट्रोल रूम का मोबाइल नंबर 9031829356 है। इसी नंबर पर वाट्सएप भी है। पुलिस को निर्देश दिया गया है कि दुर्घटना से संबंधित प्राथमिक जांच और जरूरी कानूनी प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूरा किया जाए। इसके बाद वाहन को अनावश्यक रूप से थाने में रोक कर न रखा जाए। 24 घंटे के भीतर वाहन मालिक को सौंप दिया जाए। यदि किसी विशेष मामले में वाहन को साक्ष्य के रूप में रखना जरूरी हो, तो नियमों के तहत उचित कारण दर्ज करना होगा। 24 घंटे में अस्पताल में भर्ती होने पर मुफ्त इलाज होगा पटना। सड़क हादसे के शिकार लोगों को अब अस्पताल के खर्च की चिंता नहीं करनी है। हादसे के बाद 24 घंटे के भीतर भर्ती होने पर केंद्र सरकार की पीएम राहत योजना के तहत 1.50 लाख तक का मुफ्त इलाज होगा। यह सुविधा अधिकतम 7 दिनों के लिए है। एडीजी ट्रैफिक सुधांशु कुमार ने बताया कि इस योजना की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गत 13 फरवरी को की है। हादसे के 24 घंटे के बाद अस्पताल में भर्ती होने पर योजना का लाभ नहीं मिलेगा। जिसके पास आयुष्मान कार्ड नहीं है, उसे भी इस योजना का लाभ मिलेगा। अभी छह माह तक लग रहे अभी दुर्घटना के बाद पुलिस गाड़ी को जब्त करती है आैर थाना ले जाती है। चालक भाग चुका होता है। मुश्किल से चालक या मालिक को बुलाया जाता है। केस दर्ज होता है। मामला कोर्ट में जाता है। पुलिस केस की जांच करती है। कोर्ट से पुलिस डायरी मांगी जाती है। पुलिस चार्जशीट करती है। कोर्ट गाड़ी छोड़ने का आदेश देता है तो मालिक को पुलिस के पास ही आना पड़ता है। उसके बाद गाड़ी छूटती है। इस प्रक्रिया में 1 से 6 महीने तक का समय लग जाता है। इस दौरान गाड़ी की स्थिति खराब हो जाती है। आंकड़ों में हादसे राज्य में रोज औसतन 32 हादसे होते हैं। पटना जिला सड़क हादसों में टॉप पर है। पटना में साल में करीब 3 हजार हादसे होते हैं। बिहार में हादसों में सालाना करीब 2200 लोगों की मौत होती है। सड़क दुर्घटनाओं के मामलों में अब वाहन मालिकों को बड़ी राहत मिलने जा रही है। हादसे के दौरान जब्त वाहनों को 24 घंटे के भीतर उनके मालिकों को वापस किया जाएगा। इसका उद्देश्य थानों में लंबे समय तक गाड़ियों को खड़ा रखने की पुरानी व्यवस्था को खत्म करना और प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाना है। इसे लागू करने के लिए पुलिस मुख्यालय के स्तर से जिले में एक डीएसपी के नेतृत्व में टीम बनेगी। पुलिस मुख्यालय के स्तर पर कंट्रोल रूम बनाया गया है। ट्रैफिक एडीजी सुधांशु कुमार ने बताया कि इस कंट्रोल रूम का मोबाइल नंबर 9031829356 है। इसी नंबर पर वाट्सएप भी है। पुलिस को निर्देश दिया गया है कि दुर्घटना से संबंधित प्राथमिक जांच और जरूरी कानूनी प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूरा किया जाए। इसके बाद वाहन को अनावश्यक रूप से थाने में रोक कर न रखा जाए। 24 घंटे के भीतर वाहन मालिक को सौंप दिया जाए। यदि किसी विशेष मामले में वाहन को साक्ष्य के रूप में रखना जरूरी हो, तो नियमों के तहत उचित कारण दर्ज करना होगा। 24 घंटे में अस्पताल में भर्ती होने पर मुफ्त इलाज होगा पटना। सड़क हादसे के शिकार लोगों को अब अस्पताल के खर्च की चिंता नहीं करनी है। हादसे के बाद 24 घंटे के भीतर भर्ती होने पर केंद्र सरकार की पीएम राहत योजना के तहत 1.50 लाख तक का मुफ्त इलाज होगा। यह सुविधा अधिकतम 7 दिनों के लिए है। एडीजी ट्रैफिक सुधांशु कुमार ने बताया कि इस योजना की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गत 13 फरवरी को की है। हादसे के 24 घंटे के बाद अस्पताल में भर्ती होने पर योजना का लाभ नहीं मिलेगा। जिसके पास आयुष्मान कार्ड नहीं है, उसे भी इस योजना का लाभ मिलेगा। अभी छह माह तक लग रहे अभी दुर्घटना के बाद पुलिस गाड़ी को जब्त करती है आैर थाना ले जाती है। चालक भाग चुका होता है। मुश्किल से चालक या मालिक को बुलाया जाता है। केस दर्ज होता है। मामला कोर्ट में जाता है। पुलिस केस की जांच करती है। कोर्ट से पुलिस डायरी मांगी जाती है। पुलिस चार्जशीट करती है। कोर्ट गाड़ी छोड़ने का आदेश देता है तो मालिक को पुलिस के पास ही आना पड़ता है। उसके बाद गाड़ी छूटती है। इस प्रक्रिया में 1 से 6 महीने तक का समय लग जाता है। इस दौरान गाड़ी की स्थिति खराब हो जाती है। आंकड़ों में हादसे राज्य में रोज औसतन 32 हादसे होते हैं। पटना जिला सड़क हादसों में टॉप पर है। पटना में साल में करीब 3 हजार हादसे होते हैं। बिहार में हादसों में सालाना करीब 2200 लोगों की मौत होती है।  

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