NVIDIA M-Cap: भारत के पूरे शेयर मार्केट से भी ज्यादा निकली इस 1 कंपनी की वैल्यू, जानिए क्या बेचती है प्रोडक्ट

NVIDIA M-Cap: भारत के पूरे शेयर मार्केट से भी ज्यादा निकली इस 1 कंपनी की वैल्यू, जानिए क्या बेचती है प्रोडक्ट

NVIDIA m-Cap: दुनिया में इस वक्त अगर किसी चीज का सबसे ज्यादा शोर है, तो वो है एआई यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस। इसी AI की लहर ने एक कंपनी को ऐसी ऊंचाई पर पहुंचा दिया है कि अब उसकी कीमत भारत के पूरे शेयर बाजार से भी ज्यादा हो गई है। बात हो रही है NVIDIA की, जो कभी सिर्फ गेमिंग चिप बनाने वाली कंपनी मानी जाती थी। आज वही कंपनी AI की दुनिया की सबसे बड़ी ताकत बन चुकी है। एनवीडिया की मार्केट वैल्यू करीब 5.05 ट्रिलियन डॉलर पर पहुंच गई है। तुलना करें तो भारतीय शेयर बाजार यानी दलाल स्ट्रीट की कुल वैल्यू करीब 5 ट्रिलियन डॉलर के आसपास है। यानी अकेली एनवीडिया अब पूरे भारतीय शेयर बाजार पर भारी पड़ रही है। तीन साल पहले तक कंपनी का आकार इतना बड़ा नहीं था, लेकिन एआई की मांग ने इसकी किस्मत पलट दी।

GPU चिप्स मार्केट पर है Nvidia का दबदबा

एआई की दुनिया में एक प्रमुख चीज होती है- GPU चिप्स और इस बाजार पर Nvidia का दबदबा है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक AI मॉडल चलाने के लिए जिस तरह की हाई-पावर कंप्यूटिंग चाहिए, उसमें एनवीडिया करीब 80 फीसदी हिस्सेदारी रखती है। बड़ी टेक कंपनियां हों, क्लाउड प्रोजेक्ट हों या AI मॉडल बनाने वाली कंपनियां, लगभग सभी को एनवीडिया के चिप्स चाहिए होते हैं।

कई गुना बढ़ गया शेयर

इस तेजी का असर कंपनी के शेयरों में भी दिखा है। कुछ साल पहले तक एनवीडिया का शेयर 50 डॉलर से नीचे था, लेकिन अब यह 211 डॉलर के ऊपर पहुंच चुका है। यानी निवेशकों का पैसा कई गुना बढ़ गया। वॉल स्ट्रीट में इस समय AI कंपनियों पर पैसा बरस रहा है और एनवीडिया इस रेस में सबसे आगे निकल चुकी है।

इन कंपनियों को भी हुआ फायदा

एआई की इस दौड़ में सिर्फ एनवीडिया ही नहीं, बल्कि एल्फाबेट (गूगल), एपल और माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनियां भी रिकॉर्ड वैल्यूएशन तक पहुंच चुकी हैं। अमेजन, मेटा, टेस्ला और सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स जैसी कंपनियों को भी एआई से जबरदस्त फायदा मिला है।

भारतीय मार्केट की वैल्यू घटी

लेकिन दूसरी तरफ भारत की तस्वीर थोड़ी फीकी दिख रही है। भारतीय बाजार की कुल वैल्यू 2024 में 5.7 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गई थी, जो अब घटकर करीब 5 ट्रिलियन डॉलर रह गई है। इसकी बड़ी वजह विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली मानी जा रही है। विदेशी फंड AI से जुड़ी कंपनियों और बाजारों में ज्यादा पैसा लगा रहे हैं, जबकि भारत इस रेस में पीछे छूटता दिख रहा है।

रिवर्स AI ट्रेड

मार्केट एक्सपर्ट क्रिस्टोफर वुड ने भारत को “रिवर्स AI ट्रेड” तक बताया है। मतलब दुनिया जहां AI पर दांव लगा रही है, वहां भारत उस लहर का बड़ा फायदा नहीं उठा पा रहा। विदेशी निवेशक अमेरिका, ताइवान और साउथ कोरिया जैसे बाजारों की तरफ ज्यादा आकर्षित हो रहे हैं। रॉकफेलर इंटरनेशनल के चेयरमैन Ruchir Sharma का भी मानना है कि भारत के पास अभी ऐसा कोई बड़ा एआई प्लेयर नहीं है, जो ग्लोबल निवेशकों को खींच सके। उनका कहना है कि भारतीय आईटी कंपनियां लंबे समय तक सर्विस मॉडल पर चलती रहीं, लेकिन अब दुनिया प्रोडक्ट और इनोवेशन वाली कंपनियों को ज्यादा महत्व दे रही है। यही वजह है कि टीसीएस और इन्फोसिस जैसी मजबूत भारतीय आईटी कंपनियां भी वैसी वैल्यूएशन हासिल नहीं कर पा रहीं, जैसी एनवीडिया या माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनियों को मिल रही है।

एक्सपर्ट्स का कहना है कि सर्विस कंपनियों की कमाई कर्मचारियों की संख्या से जुड़ी होती है, जबकि एआई और टेक प्रोडक्ट बनाने वाली कंपनियां बड़े स्तर पर तेजी से बढ़ सकती हैं। दुनिया एआई पर दांव लगा रही है और पैसा वहीं जा रहा है जहां इनोवेशन दिख रहा है। भारत के लिए अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या वह एआई की इस नई दौड़ में अपनी जगह बना पाएगा या फिर सिर्फ दर्शक बनकर रह जाएगा।

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