ग्वालियर को 137.79 करोड़ रुपए मिले:सवा 5 साल में 94.89 करोड़ रुपए का बजट साफ हुआ फिर भी शहर की हवा साफ नहीं हो सकी

ग्वालियर को 137.79 करोड़ रुपए मिले:सवा 5 साल में 94.89 करोड़ रुपए का बजट साफ हुआ फिर भी शहर की हवा साफ नहीं हो सकी

ग्वालियर में वायु प्रदूषण का स्तर कम होने का नाम नहीं ले रहा। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की वेबसाइट पर आंकड़े देखें तो पता चलेगा कि 2020-21 में पीएम-10 ( धूल के बड़े कण) का वार्षिक औसत 125 था। 2024-25 में ये बढ़कर 126 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रहा। ये स्थिति तब है, जब वायु प्रदूषण का स्तर कम करने बीते सवा 5 साल में 94.89 करोड़ खर्च किए गए। वायु प्रदूषण के कारण जानने, उसे कम करने के लिए कानपुर आईआईटी से स्टडी भी कराई गई। 2024 में इसकी रिपोर्ट में प्रदूषण बढ़ने के 3 कारण और उनकी रोकथाम के उपाय भी बताए गए हैं। वहीं, दूसरी ओर नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम (एनसीएपी) व वित्त आयोग से मिल रही आर्थिक सहायता से संसाधन भी जुटा लिए गए हैं। इसके बाद भी शहर में प्रदूषण का स्तर कम नहीं हुआ है। केंद्र सरकार से मिली आर्थिक सहायता से फॉगर मशीन, स्ट्रीट स्वीपिंग मशीन, सड़क निर्माण, बरा डंपिंग साइट में पार्क, सीएंडडी वेस्ट प्लांट, कॉलोनी में पेवर्स लगाने, रेसकोर्स रोड पर सौंदर्यीकरण, सीमेंट कंक्रीट सड़कें, इलेक्ट्रिक कार, पॉट होल मशीन, ई-व्हीकल व अन्य कार्य किए गए। लेकिन परिणाम बता रहे हैं कि स्थिति में सुधार नहीं हुआ। पीएम-10 का स्टैंडर्ड स्तर 60 माना जाता है। पढ़िए भास्कर की खास रिपोर्ट…. प्रदूषण घटाने का अनोखा तरीका: जहां प्रदूषण मापने के मीटर, वहीं पानी का छिड़काव प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड क्षेत्रीय कार्यालय जहां निगम का वाहन कार्यालय के बाहर पानी का छिड़काव कर रहा है। कारण- कार्यालय की छत पर प्रदूषण मापने का यंत्र लगा है। पानी डलने से आसपास की धूल नहीं उड़ेगी तो प्रदूषण तो कम दर्ज होगा ही ना! एक हजार बिस्तर अस्पताल के ठीक बगल से नियमित रूप से खुले में कचरा जलाया जा रहा है। कचरे से निकलने वाला धुआं लोगों की परेशानी बना हुआ है। प्लान में किसकी क्या भूमिका
जिला प्रशासन:योजना की पूरी निगरानी, अवैध खन्न पर रोक की जिम्मेदार।
निगम: कचरा संग्रहण और सीएंडडी कचरे के प्रबंधन के लिए जिम्मेदार हैं।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड:वायु-जल की निगरानी, उद्योगों के उत्सर्जन की जांच,
जिला पंचायत:ग्रामीण क्षेत्रों में अपशिष्ट प्रबंधन सुविधाएं विकसित करेंगे।
5. जल संसाधन विभाग/पीएचई: नदी, झील और जलाशयों के किनारों से अतिक्रमण हटाने का काम संभालेंगे।
नोट- 4 बार प्लान बना। पहली बार 2018 में, आखिरी बार 2025 में बना प्रदूषण के तीन कारण वायु प्रदूषण के कारण जानने लगभग 60 लाख खर्च कर आईआईटी कानपुर से स्टडी कराई गई। 2024 में आई रिपोर्ट में तीन प्रमुख कारण सामने आए- सड़क की धूल सबसे बड़ा कारण
कुल PM-10 उत्सर्जन में लगभग 88% योगदान सड़क की धूल का है।
हकीकत: एक भी सड़क डस्ट-फ्री नहीं। डिवाइडरों की मिट्टी सड़कों पर फैल रही है।
वाहनों का धुआं
करीब 7% प्रदूषण वाहनों से हो रहा है, खासकर डीजल वाहनों से।
हकीकत: ई-व्हीकल, सीएनजी बढ़े पर धुआं छोड़ने वाले वाहनों पर कार्रवाई दिखावटी। पुराने कमर्शियल वाहन अब भी चल रहे हैं।
कोयला, लकड़ी, बायोमास जलना
सर्दियों में 16-19% तक प्रदूषण बढ़ता है।
हकीकत: लागत कम करने के लिए अब भी कोयला-लकड़ी का इस्तेमाल जारी है। खुले में कचरा जलाने पर रोक प्रभावी नहीं है।
एक्सपर्ट – प्रो. एके सक्सेना, एमआईटीएस 3 तकनीकी सुधार से कम हो सकता है पीएम 2.5
वाहनों में उचित तकनीकी का प्रयोग कर एग्जॉस्ट पाइप को ऊपर की मोड़ना ताकि निकलने वाला धुंआ सड़क से ना टकराए। इससे धूल के कण वापस हवा में आ जाते है। ऐसा करने से धुंआ बायो तीव्र गति से ऊपर उठेगा। जिस कारण पॉल्युशन का लेवल जमीनी स्तर पर कम होगा

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