Ahmedabad. डॉ. बाबा साहेब आंबेडकर ओपन यूनिवर्सिटी के 11 वें दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता करते हुए राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने कहा कि मुक्त विश्वविद्यालय उन विद्यार्थियों के लिए आशा की किरण है, जो प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण शिक्षा से वंचित रह गए हैं। उन्होंने युवाओं से कहा कि केवल डिग्री प्राप्त करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि समाज के प्रति अपने दायित्वों का निर्वहन करना भी आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों से पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण, गौसेवा और प्राकृतिक खेती जैसे अभियानों से जुड़ने का आह्वान किया।
राज्यपाल ने डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के संघर्षों को स्मरण करते हुए सामाजिक समानता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि वेदों और शास्त्रों में कहीं भी जातिवाद या भेदभाव का उल्लेख नहीं है, किंतु मध्यकाल में गलत व्याख्याओं के कारण समाज में विभाजन की दीवारें खड़ी कर दी गईं। महिलाओं को भी शिक्षा से वंचित रखा गया। जबकि पहले ऐसा नहीं था। पहले गार्गी, मैत्रेयी और लोपामुद्रा जैसी विदुषी नारियां भारत में जन्मी थीं। आज देश समरसता और समानता की दिशा में नए आयाम स्थापित कर रहा है। बेटियां शिक्षा सहित विभिन्न क्षेत्रों में नए कीर्तिमान स्थापित कर रही हैं, जो महिला सशक्तिकरण का श्रेष्ठ उदाहरण है। राज्यपाल ने राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष किशोर मकवाणा को ‘डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर समरसता पुरस्कार’ से सम्मानित किया। अंबेडकर ओपन विश्वविद्यालय के नए पाठ्यक्रमों एवं ‘पद्म’ पॉडकास्ट की शुरूआत कराई।
अतिथि विशेष के रूप में संबोधित करते हुए सुप्रीमकोर्ट की पूर्व न्यायाधीश बेला त्रिवेदी ने कहा कि सूचना पाना और शिक्षा पाने में अंतर है। ‘ज्ञान’ सूचना नहीं बल्कि सूचनाओं को अपनी समझदारी, विवेक की कसौटी पर कस कर उसे आत्मिक और सामाजिक उन्नति के लिए उपयोग करना है। उन्होंने आंकड़ों के मायाजाल से बचने की सलाह देते हुए गुणवत्ता का स्तर बनाए रखने पर जोर दिया।डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर ओपन यूनिवर्सिटी की कुलपति प्रो. अमी उपाध्याय ने स्वागत सम्बोधन में विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गतिविधियों एवं उपलब्धियों की जानकारी दी। कार्यकारी कुलसचिव डॉ.भाविन त्रिवेदी ने आभार ज्ञापित किया। पाटण रीजनल सेंटर ने श्रेष्ठ रीजनल सेंटर का अवार्ड प्रदान किया गया।
मेधावी विद्यार्थियों को मिला गोल्ड मेडल
दीक्षांत समारोह में 22,770 विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान की गईं। इनमें पीएच.डी. के साथ ही 12,008 स्नातक, 5,636 स्नातकोत्तर, 30 पीजी डिप्लोमा, 1,041 डिप्लोमा तथा 4,054 प्रमाणपत्र शामिल हैं। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को 37 स्वर्ण पदक, 40 रजत पदक और 41 प्रमाणपत्र से सम्मानित किया गया। समारोह में विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति, प्राध्यापक, डिग्री प्राप्त करने वाले विद्यार्थी एवं उनके परिवारजन सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।


