पश्चिम चंपारण में मिलीं प्राचीन पांडुलिपियां:DM ने ‘ज्ञान भारतम’ ऐप पर अपलोड कर डिजिटाइज कराया,कहा-‘संरक्षण हमारी जिम्मेदारी’

पश्चिम चंपारण में मिलीं प्राचीन पांडुलिपियां:DM ने ‘ज्ञान भारतम’ ऐप पर अपलोड कर डिजिटाइज कराया,कहा-‘संरक्षण हमारी जिम्मेदारी’

पश्चिम चंपारण के कालीबाग स्थित श्री देवप्रकाश पांडेय के आवास से दुर्गा सहस्रनाम स्तोत्र सहित कई दुर्लभ एवं प्राचीन पांडुलिपियां मिली हैं। सूचना मिलने पर जिला पदाधिकारी तरनजोत सिंह स्वयं मौके पर पहुंचे और इन पांडुलिपियों का अवलोकन किया। इस दौरान जिलाधिकारी ने इन प्राचीन दस्तावेजों की ऐतिहासिक, धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्ता पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि ये पांडुलिपियां भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कृति और सभ्यता की अमूल्य धरोहर हैं, जिनका संरक्षण करना हम सभी की जिम्मेदारी है। इतिहास,दर्शन और समाज की महत्वपूर्ण जानकारियां जिलाधिकारी ने आगे कहा कि प्राचीन ग्रंथ और पांडुलिपियां न केवल हमारी धार्मिक आस्था से जुड़ी हैं, बल्कि वे इतिहास, साहित्य, दर्शन और समाज की महत्वपूर्ण जानकारियों को भी समेटे हुए हैं। ऐसी धरोहरों का सुरक्षित संरक्षण और आधुनिक तकनीक के माध्यम से डिजिटलीकरण अत्यंत आवश्यक है, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इनके महत्व को समझ सकें। डीएम ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी पांडुलिपियों को अत्यंत सावधानी और वैज्ञानिक तरीके से संरक्षित करते हुए उनका डिजिटलीकरण कराया जाए। दुर्लभ दस्तावेजों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी इसी क्रम में दुर्गा सहस्रनाम स्तोत्र सहित अन्य महत्वपूर्ण पांडुलिपियों को भारत सरकार की डिजिटल पहल ‘ज्ञान भारतम ऐप’ पर अपलोड किया गया है। इससे इन दुर्लभ दस्तावेजों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी और शोधकर्ताओं व आम लोगों तक इनकी पहुंच सुनिश्चित होगी। जिलाधिकारी ने बताया कि पश्चिम चंपारण ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक दृष्टि से अत्यंत समृद्ध जिला है। यहां अनेक प्राचीन धरोहरें और ऐतिहासिक दस्तावेज आज भी लोगों के पास सुरक्षित हैं। उन्होंने आम नागरिकों से अपील की कि यदि किसी के पास प्राचीन पांडुलिपियां, ऐतिहासिक दस्तावेज या दुर्लभ ग्रंथ हों, तो इसकी जानकारी प्रशासन को दें, ताकि उनका संरक्षण और डिजिटलीकरण कराया जा सके। पश्चिम चंपारण के कालीबाग स्थित श्री देवप्रकाश पांडेय के आवास से दुर्गा सहस्रनाम स्तोत्र सहित कई दुर्लभ एवं प्राचीन पांडुलिपियां मिली हैं। सूचना मिलने पर जिला पदाधिकारी तरनजोत सिंह स्वयं मौके पर पहुंचे और इन पांडुलिपियों का अवलोकन किया। इस दौरान जिलाधिकारी ने इन प्राचीन दस्तावेजों की ऐतिहासिक, धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्ता पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि ये पांडुलिपियां भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कृति और सभ्यता की अमूल्य धरोहर हैं, जिनका संरक्षण करना हम सभी की जिम्मेदारी है। इतिहास,दर्शन और समाज की महत्वपूर्ण जानकारियां जिलाधिकारी ने आगे कहा कि प्राचीन ग्रंथ और पांडुलिपियां न केवल हमारी धार्मिक आस्था से जुड़ी हैं, बल्कि वे इतिहास, साहित्य, दर्शन और समाज की महत्वपूर्ण जानकारियों को भी समेटे हुए हैं। ऐसी धरोहरों का सुरक्षित संरक्षण और आधुनिक तकनीक के माध्यम से डिजिटलीकरण अत्यंत आवश्यक है, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इनके महत्व को समझ सकें। डीएम ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी पांडुलिपियों को अत्यंत सावधानी और वैज्ञानिक तरीके से संरक्षित करते हुए उनका डिजिटलीकरण कराया जाए। दुर्लभ दस्तावेजों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी इसी क्रम में दुर्गा सहस्रनाम स्तोत्र सहित अन्य महत्वपूर्ण पांडुलिपियों को भारत सरकार की डिजिटल पहल ‘ज्ञान भारतम ऐप’ पर अपलोड किया गया है। इससे इन दुर्लभ दस्तावेजों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी और शोधकर्ताओं व आम लोगों तक इनकी पहुंच सुनिश्चित होगी। जिलाधिकारी ने बताया कि पश्चिम चंपारण ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक दृष्टि से अत्यंत समृद्ध जिला है। यहां अनेक प्राचीन धरोहरें और ऐतिहासिक दस्तावेज आज भी लोगों के पास सुरक्षित हैं। उन्होंने आम नागरिकों से अपील की कि यदि किसी के पास प्राचीन पांडुलिपियां, ऐतिहासिक दस्तावेज या दुर्लभ ग्रंथ हों, तो इसकी जानकारी प्रशासन को दें, ताकि उनका संरक्षण और डिजिटलीकरण कराया जा सके।  

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