‘चूड़ा-मुढ़ी खा के रात काट रहल छी, रातभर जागे पड़तै’:भागलपुर के बरारी घाट पर फंसे यात्री, महिला बोली- नया जगह, नींद नै लागतै

‘चूड़ा-मुढ़ी खा के रात काट रहल छी, रातभर जागे पड़तै’:भागलपुर के बरारी घाट पर फंसे यात्री, महिला बोली- नया जगह, नींद नै लागतै

“परसों आयल रही, काल्हि घर गेल रही, आ आज फेर आयल छी तऽ एतय फंस गेल छी। चूड़ा-मुढ़ी खा के कइसो-कइसो दिन काट रहल छी। ई बिल्कुल नया जगह छै, एतय नींद कहियो नै लागतै, रात भर जागे के पड़तै, दोसर कोनो उपाय नै छै। काल्हि रातो तिलकामांझी में बितैलिऐ, ओहू रात भर जागल रही। हमनी भागलपुर सब्जी बेचे खातिर आयल छी, आ घर नवगछिया छै।” भागलपुर पुलिस जिला नवगछिया की रहने वाली अरुणा देवी ने ये बातें कही। अरुणा देवी दिनभर सब्जी बेचने के बाद घर जाने के लिए बुधवार की रात बरारी घाट पर ही फंस गईं। दरअसल, रविवार रात करीब 12:45 बजे विक्रमशिला पुल के एक हिस्सा के गिरने के बाद सड़क मार्ग पूरी तरह बाधित हो गया है। यात्रियों के लिए रहने की व्यवस्था भागलपुर की ओर से नवगछिया, सीमांचल की ओर जाने वाले अधिकतर लोगों के लिए नाव ही एकमात्र सहारा है या फिर सड़क मार्ग से मुंगेर-खगड़िया होते हुए नवगछिया जाना पड़ रहा है। नाव से यात्रा के लिए जिला प्रशासन ने सुबह 5 बजे से शाम 5:30 बजे तक ही नाव संचालन की अनुमति दी है, जिसके कारण लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि प्रशासन का दावा है कि यहां ठहरने वाले यात्रियों के लिए खाने, रहने, शौचालय सहित सभी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। दैनिक भास्कर रिपोर्टर ने बुधवार रात करीब 10 बजे जिला प्रशासन की ओर से बनाए गए यात्री विश्राम स्थल पर लोगों का हाल जाना और समझने की कोशिश की कि यहां रह रहे लोगों को किन-किन परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सबसे पहले यात्री विश्राम स्थल की 3 तस्वीरें देखिए ‘शाम 6 बजे बरारी घाट पहुंचे, लेकिन जाने के लिए नाव नहीं मिला’ नवगछिया के भदरा गांव की रहने वाली अरुणा देवी ने बताया, “हम परसों घर से आए थे, छोटे-छोटे बच्चा-बुतरू छोड़कर। यहां आकर परेशानी में फंस गए हैं। आज शाम 6 बजे से पहले ही बरारी घाट पहुंच गए, लेकिन अब तक घर नहीं जा सके हैं। घर में छोटे-छोटे बच्चे अकेले हैं, उनकी चिंता सता रही है। खाने के नाम पर बस थोड़ा-बहुत चूड़ा खाकर काम चला रहे हैं। अरुणा देवी ने बताया कि यहां न ठीक से बैठने की जगह है, न सोने की पूरी रात जागकर ही बितानी पड़ रही है। ‘चारों तरफ अंधेरा, तेज हवा चल रही, बेचैनी बनी रहती है’ घाट किनारे विश्राम स्थल में मौजूद किरण देवी ने बताया, “नींद कैसे आएगी? चारों तरफ अंधेरा है, तेज हवा चल रही है और बेचैनी बनी रहती है। ऐसी हालत में रात भर जागकर ही समय काटना पड़ता है। कल तिलकामांझी में भी पूरी रात जागकर गुजारनी पड़ी थी। भूख-प्यास से परेशान हैं, लेकिन मजबूरी में यहीं रुकना पड़ रहा है।” कुर्सेला के रहने वाले सुमित ने बताया कि मैं अपने भाई को एसएससी जीडी की परीक्षा दिलाने भागलपुर आया था। परीक्षा समाप्त होने के बाद हम लोग घर लौटने के लिए निकले, लेकिन यहां आकर पता चला कि नाव सेवा बंद है, जिसके कारण फंस गए। सुमित ने बताया कि प्रशासन की ओर से रहने के लिए जगह तो दी गई है, लेकिन खाने-पीने की काफी दिक्कत है। हम लोग दोपहर से ही भूखे हैं। अब रात यहीं गुजारनी पड़ेगी। मच्छर और ठंड की परेशानी भी है, लेकिन मजबूरी में यहीं रुकना पड़ रहा है। ‘टेंट के पास प्रशासन की ओर से खाने की व्यवस्था होती तो ठीक होता’ दूध व्यापारी कैलाश मंडल ने बताया, “घर में छोटे-छोटे बच्चे और परिवार हैं, लेकिन हम लोग यहां फंसे हुए हैं। अब सुबह ही जा पाएंगे। खाने की व्यवस्था हो जाती तो बेहतर होता। रहने के लिए प्रशासन ने टेंट लगवाया है, उसी में किसी तरह रात गुजार रहे हैं।” अब जानिए जिला प्रशासन की तैयारी है विश्राम स्थल पर लोगों से बातचीत के बाद जिला प्रशासन की ओर से की गई तैयारियों के बारे में पता करना था। पता चला कि जिला प्रशासन ने बरारी घाट और महादेवपुर घाट पर सुविधाएं बढ़ा दी हैं। यात्रियों की सहूलियत के लिए घाटों पर जगह-जगह शौचालय और पेयजल की व्यवस्था की गई है। साथ ही शिकायतों के समाधान के लिए नियंत्रण कक्ष भी बनाया गया है, जहां यात्री अपनी समस्याएं दर्ज करा सकते हैं। घाटों तक पहुंच को आसान बनाने के लिए बरारी और महादेवपुर घाट के पहुंच पथ का समतलीकरण किया गया है, जिससे बाइक और छोटे वाहन आसानी से आ-जा सकें। सुरक्षा के लिहाज से घाटों पर पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। बड़े स्टीमर पर पुलिस की निगरानी में यात्रियों को चढ़ाने और उतारने की व्यवस्था की जा रही है। घाट पर एंबुलेंस की भी सुविधा निजी नावों के लिए कई स्थानों पर किराया सूची भी लगाई गई है, ताकि यात्रियों से मनमाना किराया न वसूला जा सके। अधिक किराया लेने की शिकायत मिलने पर नियंत्रण कक्ष में संबंधित नाविक के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। आपात स्थिति से निपटने के लिए घाटों पर 24×7 एंबुलेंस सेवा उपलब्ध कराई गई है और चिकित्सा शिविर लगातार संचालित हो रहे हैं। साथ ही दंडाधिकारी और पुलिस पदाधिकारियों की तैनाती भी सुनिश्चित की गई है। जिला प्रशासन यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा को लेकर लगातार सक्रिय है। “परसों आयल रही, काल्हि घर गेल रही, आ आज फेर आयल छी तऽ एतय फंस गेल छी। चूड़ा-मुढ़ी खा के कइसो-कइसो दिन काट रहल छी। ई बिल्कुल नया जगह छै, एतय नींद कहियो नै लागतै, रात भर जागे के पड़तै, दोसर कोनो उपाय नै छै। काल्हि रातो तिलकामांझी में बितैलिऐ, ओहू रात भर जागल रही। हमनी भागलपुर सब्जी बेचे खातिर आयल छी, आ घर नवगछिया छै।” भागलपुर पुलिस जिला नवगछिया की रहने वाली अरुणा देवी ने ये बातें कही। अरुणा देवी दिनभर सब्जी बेचने के बाद घर जाने के लिए बुधवार की रात बरारी घाट पर ही फंस गईं। दरअसल, रविवार रात करीब 12:45 बजे विक्रमशिला पुल के एक हिस्सा के गिरने के बाद सड़क मार्ग पूरी तरह बाधित हो गया है। यात्रियों के लिए रहने की व्यवस्था भागलपुर की ओर से नवगछिया, सीमांचल की ओर जाने वाले अधिकतर लोगों के लिए नाव ही एकमात्र सहारा है या फिर सड़क मार्ग से मुंगेर-खगड़िया होते हुए नवगछिया जाना पड़ रहा है। नाव से यात्रा के लिए जिला प्रशासन ने सुबह 5 बजे से शाम 5:30 बजे तक ही नाव संचालन की अनुमति दी है, जिसके कारण लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि प्रशासन का दावा है कि यहां ठहरने वाले यात्रियों के लिए खाने, रहने, शौचालय सहित सभी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। दैनिक भास्कर रिपोर्टर ने बुधवार रात करीब 10 बजे जिला प्रशासन की ओर से बनाए गए यात्री विश्राम स्थल पर लोगों का हाल जाना और समझने की कोशिश की कि यहां रह रहे लोगों को किन-किन परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सबसे पहले यात्री विश्राम स्थल की 3 तस्वीरें देखिए ‘शाम 6 बजे बरारी घाट पहुंचे, लेकिन जाने के लिए नाव नहीं मिला’ नवगछिया के भदरा गांव की रहने वाली अरुणा देवी ने बताया, “हम परसों घर से आए थे, छोटे-छोटे बच्चा-बुतरू छोड़कर। यहां आकर परेशानी में फंस गए हैं। आज शाम 6 बजे से पहले ही बरारी घाट पहुंच गए, लेकिन अब तक घर नहीं जा सके हैं। घर में छोटे-छोटे बच्चे अकेले हैं, उनकी चिंता सता रही है। खाने के नाम पर बस थोड़ा-बहुत चूड़ा खाकर काम चला रहे हैं। अरुणा देवी ने बताया कि यहां न ठीक से बैठने की जगह है, न सोने की पूरी रात जागकर ही बितानी पड़ रही है। ‘चारों तरफ अंधेरा, तेज हवा चल रही, बेचैनी बनी रहती है’ घाट किनारे विश्राम स्थल में मौजूद किरण देवी ने बताया, “नींद कैसे आएगी? चारों तरफ अंधेरा है, तेज हवा चल रही है और बेचैनी बनी रहती है। ऐसी हालत में रात भर जागकर ही समय काटना पड़ता है। कल तिलकामांझी में भी पूरी रात जागकर गुजारनी पड़ी थी। भूख-प्यास से परेशान हैं, लेकिन मजबूरी में यहीं रुकना पड़ रहा है।” कुर्सेला के रहने वाले सुमित ने बताया कि मैं अपने भाई को एसएससी जीडी की परीक्षा दिलाने भागलपुर आया था। परीक्षा समाप्त होने के बाद हम लोग घर लौटने के लिए निकले, लेकिन यहां आकर पता चला कि नाव सेवा बंद है, जिसके कारण फंस गए। सुमित ने बताया कि प्रशासन की ओर से रहने के लिए जगह तो दी गई है, लेकिन खाने-पीने की काफी दिक्कत है। हम लोग दोपहर से ही भूखे हैं। अब रात यहीं गुजारनी पड़ेगी। मच्छर और ठंड की परेशानी भी है, लेकिन मजबूरी में यहीं रुकना पड़ रहा है। ‘टेंट के पास प्रशासन की ओर से खाने की व्यवस्था होती तो ठीक होता’ दूध व्यापारी कैलाश मंडल ने बताया, “घर में छोटे-छोटे बच्चे और परिवार हैं, लेकिन हम लोग यहां फंसे हुए हैं। अब सुबह ही जा पाएंगे। खाने की व्यवस्था हो जाती तो बेहतर होता। रहने के लिए प्रशासन ने टेंट लगवाया है, उसी में किसी तरह रात गुजार रहे हैं।” अब जानिए जिला प्रशासन की तैयारी है विश्राम स्थल पर लोगों से बातचीत के बाद जिला प्रशासन की ओर से की गई तैयारियों के बारे में पता करना था। पता चला कि जिला प्रशासन ने बरारी घाट और महादेवपुर घाट पर सुविधाएं बढ़ा दी हैं। यात्रियों की सहूलियत के लिए घाटों पर जगह-जगह शौचालय और पेयजल की व्यवस्था की गई है। साथ ही शिकायतों के समाधान के लिए नियंत्रण कक्ष भी बनाया गया है, जहां यात्री अपनी समस्याएं दर्ज करा सकते हैं। घाटों तक पहुंच को आसान बनाने के लिए बरारी और महादेवपुर घाट के पहुंच पथ का समतलीकरण किया गया है, जिससे बाइक और छोटे वाहन आसानी से आ-जा सकें। सुरक्षा के लिहाज से घाटों पर पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। बड़े स्टीमर पर पुलिस की निगरानी में यात्रियों को चढ़ाने और उतारने की व्यवस्था की जा रही है। घाट पर एंबुलेंस की भी सुविधा निजी नावों के लिए कई स्थानों पर किराया सूची भी लगाई गई है, ताकि यात्रियों से मनमाना किराया न वसूला जा सके। अधिक किराया लेने की शिकायत मिलने पर नियंत्रण कक्ष में संबंधित नाविक के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। आपात स्थिति से निपटने के लिए घाटों पर 24×7 एंबुलेंस सेवा उपलब्ध कराई गई है और चिकित्सा शिविर लगातार संचालित हो रहे हैं। साथ ही दंडाधिकारी और पुलिस पदाधिकारियों की तैनाती भी सुनिश्चित की गई है। जिला प्रशासन यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा को लेकर लगातार सक्रिय है।  

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *