49.20 लाख की बैंक धोखाधड़ी में वांछित आरोपी गिरफ्तार:नाम बदलकर रहता आ रहा था आरोपी, पत्नी पहले जा चुकी है सलाखों के पीछे

49.20 लाख की बैंक धोखाधड़ी में वांछित आरोपी गिरफ्तार:नाम बदलकर रहता आ रहा था आरोपी, पत्नी पहले जा चुकी है सलाखों के पीछे

लालकुर्ती पुलिस ने 49.20 लाख रुपये की धोखाधड़ी में वांछित एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। यह आरोपी पिछले पांच वर्षों से नाम बदल बदलकर अलग अलग स्थानों पर रहते हुए पुलिस को चकमा देता आ रहा था। आरोपी की पत्नी पहले सलाखों के पीछे जा चुकी है जबकि मामले से जुड़े अन्य आरोपी हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत पर बाहर चल रहे हैं। पहले एक नजर डालते हैं मामले पर
पंजाब नेशनल बैंक मेरठ कॉलेज शाखा के वरिष्ठ प्रबंधक ने 29 सितंबर, 2020 को लालकुर्ती थाने में एक महिला समेत पांच लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी समेत कई गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया था। इन सभी पर धोखाधड़ी कर बैंक से 49.20 लाख रुपये का ऋण निकाले जाने का आरोप था। ऐसे किया लोन के लिए आवेदन
फरवरी, 2017 में नीलकंठपुरम भोला रोड निवासी अरुण कुमार आर्य व उनके बेटे अक्षय योगी ने बैंक को एक प्रोपर्टी दिखाई। डा. भोपाल सिंह रोड बेगमबाग में यह प्रोपर्टी थी, जिसका मालिक योगेंद्र शर्मा व उनकी पत्नी संध्या शर्मा को दिखाया। उन्होंने प्रोपर्टी स्वामी को बैंक के सामने खड़ा कर बताया कि वह उनकी प्रोपर्टी खरीदने के लिए लोन लेना चाहते हैं। बैंक अधिवक्ता ने जारी किया सर्टिफिकेट
बैंक ने नियमानुसार प्रक्रिया शुरु की और उक्त प्रोपर्टी के स्वामित्व सत्यापन व गैर भार प्रमाण पत्र लेने के लिए अपने अधिवक्ता अतुल शर्मा निवासी आदर्श नगर को भेजा। अतुल शर्मा ने जल्द सर्टिफिकेट जारी किया और बताया कि उक्त प्रोपर्टी के वास्तविक मालिक योगेंद्र शर्मा व उनकी पत्नी संध्या शर्मा हैं। प्रमाण पत्र जारी होने के बाद बैंक ने 49,20,000 रुपये का लोन 23 फरवरी, 2017 को जारी कर दिया। अरुण कुमार के नाम कराया बैनामा
यह प्रोपर्टी पूर्व में सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के पास बंधक दिखाई गई थी। लोन जारी करते हुए बैंक ने सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया का शेष भुगतान पूर्ण किया और योगेंद्र शर्मा व संध्या शर्मा से प्रोपर्टी के कागजात लेकर उन्हें पहले लोन लेने वाले अरुण कुमार आर्य के नाम कराया और फिर बैंक में 3 मार्च, 2017 को जमा करा दिया। किश्त जमा ना हुई तो खुली पोल
एसओ लालकुर्ती हरेंद्र पाल सिंह ने बताया कि लोन जारी होने के बाद तय हुआ कि 38552.51 रुपये की किश्त जमा की जाएगी लेकिन किश्त जमा नहीं की गई, जिस कारण खाता एनपीए हो गया। बैंक ने नोटिस प्रक्रिया शुरु की तो वह उस पते पर रहने वाले संजीव कुमार रस्तौगी, सुनीता रस्तौगी और राहुल रस्तौगी को प्राप्त हुआ। बैंक को नोटिस मिला तो हुई छानबीन
संजीव कुमार रस्तौगी ने भी अपने अधिवक्ता से बैंक को नोटिस भिजवा दिया। बताया कि उन्होंने यह प्रोपर्टी सूर्यकांत कौशिक पुत्र श्रीचंद कौशिक से खरीदी है। बैंक ने जांच कराई तो खुलासा हुआ कि ब्रजघाट गढ़मुक्तेश्वर निवासी पंडित बिहारी लाल पुत्र वासुदेव ने इस प्रोपर्टी को 20 जनवरी, 2007 को संध्या शर्मा व योगेंद्र शर्मा को बेच दिया था। संध्या व योगेंद्र शर्मा ने मकान सूर्यकांत को बेचा, जिनसे संजीव,सुनीता व राहुल ने यह प्रोपर्टी खरीदी। पांच लोगों के खिलाफ दर्ज हुई FiR
एसओ ने बताया कि 26 सितंबर, 2020 को इस मामले में तत्कालीन वरिष्ठ प्रबंधक संजय कुमार जैन की तरफ से अरुण कुमार आर्य, अक्षय योगी, योगेंद्र शर्मा व उनकी पत्नी संध्या शर्मा के अलावा बैंक अधिवक्ता अतुल शर्मा के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा दी गई। इस मामले में अरुण, अक्षय व अधिवक्ता अतुल शर्मा अग्रिम जमानत पर हैं। संध्या शर्मा को पहले जेल भेजा जा चुका है। योगेंद्र शर्मा की तलाश चल रही थी, जिन्हें सोमवार को दबोच लिया गया।

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